असम पुलिस की ‘दहशतगर्दी’ के खिलाफ दरभंगा में प्रदर्शन

बिहार लोक संवाद डॉट नेट

असम पुलिस की ‘दहशतगर्दी’ के खिलाफ दरभंग के नाका न. 5 पर शनिवार को बड़ी संख्या में फ्रेटेरनिटी मूवमेंट (एल.एन.एम.यू,बिहार), एस.आई.ओ (दरभंगा) और एस.डी.पी.आई के कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं के सहयोग से प्रदर्शन कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

फ्रेटरनिटी मूवमेंट के सय्यद नवाज़ ने कहा कि असम में गरीब, निहत्थे मुसलमान जिनके पास नागरिकता के सारे दस्तावेज़ हैं, जो 1951 कि एनआरसी में भी शामिल थे, उनके खिलाफ सरकार द्वारा प्रायोजित क़त्लेआम को कोई भी दिल रखने वाला इंसान बर्दाश्त नहीं कर सकता। पुलिसिया गोली से ज़िंदगी गवांने के बाद जिस तरह लाशों पर भी हैवानियत दिखाई गई ये देख कर चुप वही रह सकता है जो खुद लाश हो,जो जीते जी मर चुका हो। सरकार की कोई भी सफाई इस बर्बरता को सही नहीं ठहरा सकती।

एसआईओ के यूनिट प्रेसिडेंट एहसानुल्लाह खालिद ने कहा कि हम अभी ज़िंदा हैं, हमारी इंसानियत अभी बाकी है, हम इस दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ हरगिज़ चुप नहीं बैठेंगे। हम असम की सरकार से गुनाह के ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ संगीन धारा में करवाई की मांग करते हैं और जबतक हमारी मांगें नहीं मानी जाएंगी हम मज़बूती के साथ इस विभाजनकारी मानसिकता का मुकाबला करते रहेंगे।

एस डी पी आई के मोहम्मद अदीब ने कहा कि हम तमाम अमनपंसद लोगों से अपील करते हैं कि इस मामले पर हरगिज़ चुप न बैठें,अपने घरों से निकल कर सरकार को अपने रोष से अवगत कराएं। ये सरकार और उसकी मानसिकता को आम नागरिकों के मौन से बल और समर्थन मिलता है।

दुख के साथ कहना पड़ता है कि अब हमारे समाज का एक बड़ा वर्ग दूसरे समाज (विशेषकर मुस्लिमों) के प्रति ऐसी नफरती, बांटने वाली और लोगों को उनकी जमीन से ही विस्थापित करने वाली मानसिकता को तथ्यों की कसौटी पर परखे बिना उसका खुला समर्थन करता है। इस वजह से ये सरकारें पूरे देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ बिल्कुल चिन्हित तरीके से क्रूरता और दहशतगर्दी की मुहिम चला रही हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में नौजवानो ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर समाज को ऐसे गम्भीर मसलों पर गौर करने की अपील की है और देश मे न्याय का राज स्थापित करने को लेकर एक विशाल जनांदोलन का आह्वान किया।
विरोध प्रदर्शन की अगुवाई फ़्रेटर्निटी मूवमेंट और ऐसआईओ ने एस.डी.पी.आई के बेहतरीन सहयोग के साथ किया। साथ ही दरभंगा ज़िला के युवा नेता फैज़ान कैप्टन,शाज़िया कन्दील,
बुशरा,नाज़िया,साहिबा, इब्राहिम जुनैदी,सैफ़ी, अंसर जलाल,अमानुल्लाह,साकिब इक़बाल,अहमद बशर,अहमद रज़ा खां,फैहान महमूदी,यूसुफ रज़ा,मोज़म्मिल,आदि दर्जनों युवाओं ने इस आंदोलन को सफल बनाने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

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