छपी-अनछपी: डेहरी के एग्जेक्यूटिव अफसर का मर्डर, पूर्व मंत्री व पति को 7 साल की सज़ा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। डेहरी- डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. विमल कुमार की औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र में हत्या कर दी गई। पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट मामले में सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। ईरान ने अमेरिका को मिलिट्री बेस देने के मामले में ब्रिटेन को चेतावनी दे।

और, जानिएगा कि क्या हुआ जब मंत्री को फोन पर लाइव सुनाई गई 50 हज़ार के घूस की मांग। 

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार डेहरी डालमिया नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) विमल कुमार की शनिवार रात पटना जाने के क्रम में औरंगाबाद जिला के बारुण थाना क्षेत्र में नहर रोड पर सौजन्य स्वजन लख डिहरा गांव विमल कुमार के पास अपराधियों ने हत्या कर दी। उनकी गाड़ी सड़क किनारे खाई में मिली। वाहन चालक मिथिलेश पूरी तरह सुरक्षित है। पुलिस उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। चालक घटना के समय कार्यपालक पदाधिकारी को छोड़कर फरार हो गया था। ईओ के चेहरे और सिर पर जख्म के काफी गहरे निशान हैं, जिससे पुलिस धारदार हथियार से हत्या की आशंका जता रही है। पुलिस के अनुसार, विमल कुमार डेहरी में आयोजित “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पटना लौट रहे थे। इसी दौरान बारुण-थाना क्षेत्र के लख डिहरा गांव के दाउदनगर नहर रोड पर बारुण समीप बदमाशों ने उनकी गाड़ी रोक ली। आशंका है कि लूटपाट की नीयत से बदमाशों ने वाहन को घेरा और हमला कर दिया। चालक मिथलेश ने मोबाइल से नगर परिषद कार्यालय के कर्मियों को सूचना दी। कार्यपालक पदाधिकारी का परिवार पटना के गोला रोड में रहता है। यहां उनकी पत्नी अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं। वह मूलरूप से शेरघाटी बाजार के रहने वाले थे। भास्कर के अनुसार औरंगाबाद एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि डॉ. विमल कुमार अपने वाहन से डिहरी से सोन नहर के सेवा पथ के रास्ते पटना जा रहे थे। धनौती पुल के पास अपराधियों ने वाहन रोककर उन्हें गोली मार दी जिससे उनकी मौत हो गई।

आर्म्स ऐक्ट में पूर्व मंत्री और उनके पति को 7 साल की सजा

हिन्दुस्तान के अनुसार एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने शनिवार को पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट मामले में सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आर्म्स एक्ट की एक अन्य धारा में भी पति-पत्नी को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। सिविल कोर्ट के एडीजे-दो और विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश बृजेश कुमार सिंह ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद उपलब्ध साक्ष्य और गवाही के आधार पर यह फैसला दिया। इसके पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। पूर्व विधायक के बचाव में अधिवक्ता विजय महाराज ने अपना पक्ष रखा। सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व मंत्री मंजू वर्मा व उनके पति चंद्र शेखर वर्मा को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

कब का मामला, क्या मिला था?

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के पता लगने के बाद मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को समाज कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सीबीआई ने 17 अगस्त 2018 को चेरिया बरियारपुर थाना के अर्जुन टोल स्थित उनके आवास पर छापे मारे थे, जिसमें 50 गोलियां बरामद हुई थीं। सीबीआई ने कमरा संख्या दो में रखे एक बॉक्स से 323 बोर के 15, आठ एमएम बोर के 10 और 7.62 बोर के 19 और श्री नट थ्री बोर के छह कारतूस बरामद किए थे। इस मामले में सीबीआई ने मजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वर्तमान में मंजू वर्मा के पुत्र अभिषेक आनंद चेरियाबरियारपुर सीट से जदयू के विधायक हैं।

ईरान ने अमेरिका को मिलिट्री बेस देने के मामले में ब्रिटेन को चेतावनी दी

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान ने ब्रिटेन को चेताया है कि यदि वह अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है, तो इसे आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा। साथ ही कहा कि तेहरान को आत्मरक्षा का अधिकार होगा। ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद किसी भी रक्षा समझौते का हवाला देकर हमलावर देश के साथ सहयोग करना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के आक्रामकता की परिभाषा संबंधी प्रस्ताव के तहत यदि कोई देश अपने क्षेत्र या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर अवैध हमले के लिए करने देता है, तो इसे आक्रामकता माना जाएगा। साथ ही हमले का शिकार देश को आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त होगा।

मंत्री को फोन पर लाइव सुनाई गई 50 हज़ार के घूस की मांग

भास्कर के अनुसार एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि के भुगतान के लिए 50 हजार रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में संविदा पर तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार को बर्खास्त कर दिया गया। मामला शनिवार को पटना स्थित अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखींद्र पासवान के कार्यालय में हुई जनसुनवाई में सामने आया। सीतामढ़ी के शिकायतकर्ता कमलेश पासवान ने मंत्री के सामने अपनी समस्या रखी। मंत्री ने उन्हें संबंधित कर्मचारी को फोन करने को कहा। कमलेश ने चंदन कुमार को फोन किया और स्पीकर ऑन कर दिया। अनुदान राशि के भुगतान की बात पर चंदन कुमार ने 50 हजार रुपए मांगे। मंत्री और वहां मौजूद अधिकारियों ने बातचीत सुनी। इसके बाद मंत्री ने सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी सुभाष चन्द्र राजकुमार को फोन किया। उन्होंने चंदन कुमार के बारे में पूछा। पदाधिकारी ने बताया कि वह जिला मिशन कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर है। जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि फोन पर संबंधित व्यक्ति को पैसा मांगते हुए सुना गया था। स्पष्टीकरण में चंदन कुमार ने आरोप से इनकार किया। 

कुछ और सुर्खियां:

  • नेपाल में 7 दिनों के सांप्रदायिक तनाव बाद हटा कर्फ्यू
  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने बॉक्सिंग मुकाबले में एक साथ सात गोल्ड जीता
  • रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी शोभा ओहतकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग का अध्यक्ष बनाया गया
  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर संसद में नाटक के प्रदर्शन के मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद पप्पू यादव पर बनारस में मुकदमा
  • पटना में पाटलिपुत्र टाउनशिप का फॉर्मेट तैयार जमीन खरीद बिक्री पर लगी रोक हटी
  • मानसून को लेकर 18 राज्यों में अलर्ट जारी, केरल में जमीन खिसकने से 6 लोगों की मौत

अनछपी: इन दिनों संसद में पास एंटी पेपर लीक बिल की बहुत चर्चा है लेकिन सच्चाई यह है कि भारत के किस कोने में कब कौन सा पेपर लीक हो रहा है इसका हिसाब किताब रखना मुश्किल हो गया है। यह बात भी याद रखने की है कि बहुत से मामलों में पेपर लीक की खबर तो पता भी नहीं चल पाती है। आज के अखबारों में पेपर लीक से जुड़ी दो खबरें आई हैं लेकिन बिहार में एक कमजोर और सुस्त विपक्ष की वजह से यह कोई मुद्दा नहीं बन पाएगा। पहली खबर पटना यूनिवर्सिटी से है जहां शनिवार को आयोजित 3 वर्षीय एलएलबी एंट्रेंस एग्जाम का पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दिलचस्प बात यह है कि एग्जामिनेशन कंट्रोलर का कहना है कि ऐसा लगता है कि किसी परीक्षार्थी ने प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर मोबाइल फोन बाहर फेंक दिया हो या किसी और तरीके से उसे पहुंचाया गया हो। उनका यह भी कहना है कि पेपर तो वायरल हुआ लेकिन उसका उत्तर परीक्षा हॉल के अंदर नहीं आ सका इसलिए परीक्षा रद्द करने पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। यह दलील कितने लोगों को सही लगेगी, इसके बारे में परीक्षा नियंत्रक को अंदाजा होगा ही। 29 जुलाई को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने होमगार्ड के हवलदार ट्रेनर के लिए इम्तिहान लिया था। इसके बारे में भी खबर है कि परीक्षा खत्म होने से करीब 40 मिनट पहले ही किसी परीक्षार्थी के मोबाइल में आंसर की पहुंच चुका था। यह सारा खेल बायोमेट्रिक कर्मियों ने किया था। इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पेपर लीक का इससे ज्यादा खुला खेल और क्या हो सकता है और याद रखने की बात यह है कि यह सब तब हो रहा है जबकि देश में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून बनाने का दावा किया जा रहा है और एक बड़े प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।

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