छ्पी-अनछपी: ईरान के साथ खड़ा हुआ भारत, बिहार को 900 क्यूसेक मिलेगा गंगाजल

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। यूएनएचआरसी में पश्चिमी देशों द्वारा ईरान के खिलाफ लाए गए एक विवादास्पद वोटिंग प्रस्ताव में भारत ने इसके ख़िलाफ़ वोट दिया। बिहार को 2000 क्यूसेक की मांग पर 900 क्यूसेक गंगाजल मिलेगा।

और जानिएगा कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे डॉक्टर शकील अहमद ने राहुल गांधी को क्यों डरपोक बताया।

पहली ख़बर

जागरण लिखता है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पश्चिमी देशों द्वारा ईरान के खिलाफ लाए गए एक विवादास्पद वोटिंग प्रस्ताव में भारत ने अप्रत्याशित रूप से विरोध में मतदान किया। इस कदम से भारत ने अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता का स्पष्ट प्रदर्शन किया है। प्रस्ताव में ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन भारत के वोट ने इसे और जटिल बना दिया। चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इंडोनेशिया, इराक, विएतनाम जैसे कुछ गिने-चुने देशों ने ही इस प्रस्ताव का विरोध किया। यह प्रस्ताव पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा पेश किया गया था, जिसमें ईरान की सरकार पर महिलाओं के अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति के दमन के आरोप लगाए गए थे। भारत के फैसले पर नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने शनिवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ईरान इस्लामिक गणराज्य के प्रति संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक्स पर लिखा- ‘भारत सरकार को उसके सिद्धांतवादी एवं दृढ़ समर्थन के से प्रेरित एक प्रस्ताव का विरोध भी लिए मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं जिसमें अन्यायपूर्ण एवं राजनीतिक दलों शामिल है। यह रुख भारत की न्याय, बहुपक्षवाद तथा राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।’

बिहार को मिलेगा 900 क्यूसेक गंगाजल

हिन्दुस्तान के अनुसार अब तक गंगाजल के उपयोग के लिए केंद्र की तरफ टकटकी लगाकर देखने वाले बिहार को पहली बार गंगा के पानी में हिस्सेदारी मिल सकती है। बिहार को 900 क्यूसेक गंगाजल के उपयोग की अनुमति केंद्र की ओर दिए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब आधिकारिक रूप से गंगा नदी के पानी में बिहार को निर्धारित हिस्सेदारी मिलेगी। अब तक गंगाजल में बिहार का कोई निर्धारित कोटा नहीं रहा है। हालांकि, बिहार ने गंगा नदी के पानी में कम-से -कम 2000 क्यूसेक पानी की हिस्सेदारी मांगी थी।

सीतामढ़ी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रा की मौत के बाद हंगामा

जागरण के अनुसार भागलपुर जिले के सुल्तानगंज निवासी धर्मेंद्र पराशर की पुत्री और सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एसआइटी) की छात्रा मेघा पराशर की मौत पर शनिवार को छात्र-छात्राओं ने हंगामा किया। मेघा को न्याय दिलाने व कालेज के प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर आक्रोशित छात्र-छात्राएं धरने पर बैठ कालेज प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की। आक्रोशितों के तेवर को देखते हुए कालेज प्रशासन ने इसकी सूचना जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को दी। सूचना पर पहुंचे एसडीओ सदर आनंद कुमार ने आक्राशितों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे प्राचार्य को हटाने की मांग पर डटे रहे। स्थिति को देखते हुए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल को बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद छात्रों से मांग पत्र लिया गया। एसडीओ सदर के आश्वासन के बाद छात्रों को गुस्सा शांत हुआ। इसे लेकर पूरे दिन कालेज में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित रहीं।

भारत से 25% एक्स्ट्रा पेनल्टी को हटा सकता है अमेरिका

भास्कर के अनुसार अमेरिका ने भारत पर ट्रम्प टैरिफ पेनल्टी में कमी के बड़े संकेत दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी कटौती की है। ऐसे में भारत से 25% एक्स्ट्रा पेनल्टी को हटाया जा सकता है। दावोस में एक कार्यक्रम में बेसेंट ने कहा, भारतीय रिफाइनरीज द्वारा रूसी तेल खरीद में कमी करने से रूस की वॉर मशीन को फंड की कमी आ गई है। उन्होंने कहा कि भारत पर लगाई गई 25% टैरिफ पेनल्टी का उद्देश्य सफल रहा है। मुझे लगता है कि भारत से जल्द इस पेनल्टी को हटाया जा सकता है। एक सवाल पर बेसेंट ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए अमेरिका से तेल और प्राकृतिक गैस का आयात कर सकता है। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। उन्होंने कहा, यूरोपीय यूनियन (ईयू) को टैरिफ के मुद्दे पर अमेरिका का सहयोग करना चाहिए था, लेकिन वे (ईयू) भारत के साथ एफटीए करना चाहते हैं। इसलिए साथ नहीं दिया।

शकील ने राहुल को बताया डरपोक

हिन्दुस्तान के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सबसे डरपोक और असुरक्षित नेता बताया है। एक निजी चैनल के साथ पॉडकास्ट में उन्होंने राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि वे अंदर से पूरी तरह डरे हुए नेता हैं और कांग्रेस में मजबूत नेताओं को पसंद नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केवल नाम के अध्यक्ष हैं, जबकि सभी बड़े फैसले राहुल गांधी ही लेते हैं। राहुल गांधी को वरिष्ठ और बड़े नेताओं के साथ काम करने में दिक्कत होती है। जहां उन्हें बॉस वाली फीलिंग नहीं आती, वहां से वे किनारा कर लेते हैं। शकील अहमद ने राहुल के संविधान बचाओ आंदोलन पर भी तीखा हमला बोला और इसको भी निरर्थक बताया। कहा कि इसका जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं है।

कुछ और सुर्खियां:

  • भारत में नहीं खेलने के मुद्दे पर विश्व कप टी 20 क्रिकेट से बांग्लादेश बाहर स्कॉटलैंड को किया गया शामिल
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत चार दिन के बिहार दौरे पर आज आ रहे हैं
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की कनाडा को- धमकी चीन से ट्रेड डील की तो लगाएंगे 100% टैरिफ
  • बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इंटर्नशिप के पैसे बढ़े, अब हर महीने मिलेंगे 27 हज़ार

अनछपी: पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने जजों के तबादलों में सरकार के दखल पर गंभीर चिंता जताई है लेकिन हिंदी के अक्सर अखबारों ने इसकी खबर को नज़अंदाज़ किया है जबकि उन्होंने साफ कहा कि जजों का तबादला पूरी तरह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं हो सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता लेकिन उनके इस बयान से इतर हमने देखा है कि निचली अदालत से हाई कोर्ट तक के जज ने अगर ऐसा कोई फैसला दिया जो सरकार के खिलाफ जाता हो तो अगले कुछ दिनों में ही उनका तबादला कर दिया जाता है। हाल में ही संभल में पुलिसवालों पर एफआईआर का आदेश देने वाले जज का ट्रांसफर भी इसी तरह का एक मामला है। जस्टिस भुइयां का कहना है कि अगर जजों को सरकार के खिलाफ दिए गए फैसलों के कारण इधर-उधर किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचेगा। जस्टिस भुइयां ने कहा कि किसी भी जज का तबादला न्याय के बेहतर प्रशासन के लिए होता है, न कि किसी दबाव या सिफारिश के आधार पर। उनकी इस बात से हर आदमी सहमत होगा लेकिन यह बात भी सबको मालूम है कि आज जजों के तबादले का एक बड़ा आधार यह है कि उसका फैसला ऐसा था जो सरकार या उसके तंत्र के ख़िलाफ़ जाता हो।

 

 

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