छपी-अनछपी: लालू बोले- आरएसएस बैन हो, सुशील मोदी की चुनौती- बैन करके दिखाएं

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पीएफआई आई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पर लगाए गए प्रतिबंध की खबरें आज के अखबारों में छाई हुई हैं।

हिंदुस्तान की सबसे बड़ी सुर्खी है है: पीएफआई पर 5 साल के लिए प्रतिबंध। इतने बताया गया है कि यह प्रतिबंध गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम यानी यूएपीए के तहत लगाया गया है। साथ ही केंद्र ने राज्यों से पीएफआई की खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा है। प्रतिबंध आदेश के मुताबिक पीएफआई और उसके संगठन एजेंडे के तहत वर्ग विशेष को कट्टर बनाकर लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहे थे। प्रतिबंध के दो सूचना के बाद संगठन की संपत्तियां जप्त होगी और बैंक खातों पर रोक भी लगेगी। अखबार के अनुसार सरकार की पाबंदी से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति आदेश की तामील की तारीख से 14 दिनों के भीतर जिला जज की अदालत जा सकेगा। 

हिंदुस्तान और दूसरे अखबारों ने भी अपने विश्लेषण में बताया है कि पीएसआई पर छापेमारी की कार्रवाई की तैयारी फुलवारी शरीफ में छापे पड़ने के बाद से शुरू हो गई थी।

जागरण ने लिखा है पीएफआई और उसके आठ सहयोगी संगठन पांच साल के लिए प्रतिबंधित। इसमें लिखा गया है कि गृह मंत्रालय ने कहा यह संगठन आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। भास्कर की सुर्खी है पीएफआई पर पांच साल का प्रतिबंध, लालू बोले- आरएसएस पर भी बैन लगाया जाए।

प्रभात खबर की लीड आज सबसे अलग है: केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार फ़ीसदी की बढ़ोतरी। अखबार ने से त्यौहार को तोहफा बताया है। इसमें यह जानकारी भी दी गई है कि मुफ्त राशन योजना की अवधि 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई है। ध्यान में रखने की बात यह है कि अगले 3 महीनों में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होना है।

सभी अखबारों में इस बात पर जोरदार बहस छपी है कि आरएसएस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा रहा है। लालू प्रसाद के बयान पर हिंदुस्तान की सुर्खी है पीएसआई की तरह आरएसएस. पर भी प्रतिबंध लगे। जागरण में लालू प्रसाद का बयान है जिसमें वह कह रहे हैं कि पीएफआई से भी बदतर है आरएसएस। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का बयान है: पीएफआई पर लगे प्रतिबंध का आधार बताए केंद्र। जदयू के एक और वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने कहा है कि भाजपा और आरएसएस दोनों पर लगाया जाए प्रतिबंध। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्र ज़मां खान का बयान है बहन उचित नहीं पहले हो जांच। इसी तरह पूर्व एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने कहा है कि अगर पीएफआई को  क्यों बैन किया गया है इसका तो जवाब दें।

दूसरी तरफ पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी का बयान है; हिम्मत है तो आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए महागठबंधन सरकार। 

बिहार में सत्ता से भाजपा के बाहर होने के बाद सीबीआई तेजस्वी यादव के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करने में लगी हुई है। हिंदुस्तान की खबर है: तेजस्वी 18 को सीबीआई कोर्ट में पेशी के लिए तलब।

भारत में तीनों सेनाओं के मुखिया को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ या सीडीएस कहा जाता है। एक विमान दुर्घटना में पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौत के बाद से यह पद लंबे समय तक खाली रहा। अब इस पद पर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड अनिल चौहान को नियुक्त किया गया है। यह खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है।

बिहार में बैंकों पर यह आरोप बराबर लगता रहा है कि वह क़र्ज़ देने में आनाकानी करते हैं। हिंदुस्तान की सुर्खी है: बिहार के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को बैंकों से नहीं मिल रहा लोन। यह बयान वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी का है। इस खबर में बताया गया है कि बिहार में सीडी रेशियो यानी साख जमा अनुपात राष्ट्रीय औसत से याब भी 21 फ़ीसदी कम है।

अनछपी: पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद कई सेकुलर नेता यह मांग कर रहे हैं कि आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बिहार की महागठबंधन सरकार खुली चुनौती दी है कि वह आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर दिखाए। सवाल यह है कि क्या महागठबंधन सरकार के लिए राज्य स्तर पर ऐसा करना संभव है? सेकुलर नेता जबानी जमा खर्च तो बहुत करते हैं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई उनकी ओर से नहीं देखी जाती है। खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर यह सवाल उठ सकता है कि उन्होंने भाजपा के साथ रहकर आरएसएस को मजबूत किया है या कमजोर। यह तो बीती बात हो गई, सवाल आज का है। क्या महा गठबंधन सरकार या जहां भी भाजपा सत्ता में नहीं है वहां की राज्य सरकारें आरएसएस की गतिविधियों पर कोई वाइट पेपर जारी कर सकती हैं? खासकर बिहार में आरएसएस ने अपना जितना विस्तार किया है क्या उस बारे में हिसाब किताब तैयार किया जा सकता है?

पीएफआई पर प्रतिबंध का एक रहस्यमयी पहलू यह है कि इसके राजनैतिक संगठन एसडीपीआई पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है जबकि उसके दूसरे संगठनों को प्रतिबंधित किया गया है। कुछ लोगों को कहना है कि यह काम चुनाव आयोग की ओर से कराया जाएगा तो कुछ लोग यह समझते हैं कि एसडीपीआई पर प्रतिबंध न लगाने का कारण दरअसल केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और एसडीपीआई के बीच वोटों का बंटवारा कराना है। 

पीएफआई पर प्रतिबंध के सिलसिले में एक और बात नोट करने की है कि मुस्लिम संगठनों में भी इस पर मतभेद दिखे हैं। कुछ संगठन यह कह रहे हैं कि वे उनकी नीति से सहमत नहीं है लेकिन उनके उन पर प्रतिबंध का भी विरोध करते हैं। कुछ ऐसे भी मुस्लिम संगठन हैं जो साफ तौर पर पीएफआई को प्रतिबंधित करने पर खुशी का इजहार कर रहे हैं। खुशी का इजहार करने वाले ऐसे संगठनों ने अब तक आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग नहीं की है। 

 623 total views

Share Now

Leave a Reply