छपी-अनछपी: नीतीश कुमार का इस्तीफा आज- कल फिर शपथ, रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑफिस से एक करोड़ जब्त

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यपाल को अपना इस्तीफा से सौंपेंगे और कल 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सीबीआई ने हाजीपुर के रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑफिस में छापेमारी कर एक करोड़ रुपए की घूस की रकम पकड़ने का दावा किया है। दिल्ली विस्फोट से चर्चा में आए अलफलाह ग्रुप के अध्यक्ष को ईडी ने गिरफ्तार किया। पटना जिले के दुल्हिनबाजार थाना के नबीनगर के पास बालू माफियाओं ने खनन विभाग की टीम पर मैं एक सिपाही की मौत हो गई।

पहली ख़बर

भास्कर के अनुसार बिहार की नई एनडीए सरकार में मंत्रिमंडल छोटा हो सकता है। हालांकि बुधवार को तय होगा कि कौन और कितने मंत्री बनेंगे। यह लगभग तय है कि विधानसभा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री भाजपा के ही होंगे। बुधवार को 11 बजे भाजपा और जेडीयू के विधायकों की अलग-अलग बैठक होगी। इसके बाद तीन बजे एनडीए विधायकों की संयुक्त बैठक होगी। इसमें तय होगा कि कौन-कौन शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को इस्तीफा देंगे। फिर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इस बीच पांचों घटक दल भी अपना-अपना नेता चुनेंगे। 20 नवंबर को गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा। नीतीश के साथ 23 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इनमें भाजपा और जदयू के 10-10, लोजपा आर, हम और रालोमो के 1-1 हैं। नए मंत्रिमंडल में सामाजिक समीकरण का खास ख्याल रखा जाएगा। अभी सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा डिप्टी सीएम हैं। सम्राट का नाम लगभग तय माना जा रहा है। दूसरे डिप्टी सीएम पर विचार चल रहा है। विजय सिन्हा सहित तीन-चार लोगों के नामों की चर्चा जोरों पर है। विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के वरीय नेता प्रेम कुमार का नाम सबसे आगे है। नीतीश मिश्रा के नाम की भी चर्चा है।

रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑफिस से एक करोड़ रुपए की घूस की रकम पकड़ी

हिन्दुस्तान के अनुसार निर्माण परियोजनाओं में घूसखोरी के मामले में सीबीआई ने हाजीपुर स्थित पूर्व मध्य रेल मुख्यालय के निर्माण विभाग में छापेमारी की है। इस दौरान उप मुख्य अभियंता (निर्माण) आलोक कुमार सहित संवेदक के दो निजी कर्मियों को करीब एक करोड़ रुपये घूस की रकम के साथ गिरफ्तार कर लिया। आशंका है कि घूस की यह रकम कई पदाधिकारियों को दी जानी थी। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी कर बिहार-झारखंड सहित कई राज्यों में छापेमारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने गुप्त सूचना के आधार पर सोमवार की देर रात हाजीपुर जंक्शन के पीछे स्थित पूर्व मध्य रेल के निर्माण विभाग में छापेमारी की। सीबीआई टीम ने उप मुख्य अभियंता (निर्माण 2) आलोक कुमार, संवेदक जेपी डब्लू इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट मैनेजर गोविंद उर्फ अमन भुल्लर और कर्मी सूरज प्रसाद को दबोच लिया। इसके बाद उनसे गहन पूछताछ की कई।

पीके बोले- 40 हजार करोड़ से वोट खरीदे गए

जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा है कि बिहार सुधारने की जिद पर पूरी ताकत से लगे रहेंगे। विधानसभा चुनाव हार का उनके अभियान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। वे अब दोगुनी मेहनत करेंगे और व्यापक अभियान चलाएंगे। वे बिहार छोड़कर नहीं जाने वाले। मंगलवार को पार्टी दफ्तर में पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वे आज भी इस बात पर कायम हैं कि नीतीश कुमार को 25 से अधिक सीटें नहीं आ सकती हैं। लेकिन, बिहार में वोट की खरीद की गई। इसके लिए 40 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई। नीतीश कुमार सरकार बनने के बाद 6 महीने के अंदर डेढ़ करोड़ महिलाओं को दो दो लाख दे दें तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। पीके ने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में 60-62 हजार महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिये गए। सिर्फ सितंबर और अक्टूबर में ही 18 योजनाओं की घोषणा की गई है। अब जबकि सरकार बन गई है, तो महिला स्वरोजगार योजना को लागू करना चाहिए। डेढ़ करोड़ परिवारों में एक भी परिवार ऐसा नहीं होना चाहिए जिसे वादा किए गए दो लाख रुपये न मिलें। अगर यह नहीं हुआ तो साबित होगा कि पैसे सिर्फ वोट खरीदने के लिए दिए गए थे।

सबसे खतरनाक बताए गए नक्सली कमांडर हिड़मा को मुठभेड़ में मारने का दावा

प्रभात ख़बर के अनुसार आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले में मंगलवार की सुबह सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई. इसमें शीर्ष नक्सली कमांडर माडवी हिडमा (हिड़मा), उसकी पत्नी मदकम राजे समेत छह माओवादी मारे गये. यह मुठभेड़ मरेतुमिल्ली मंडल के जंगलों में सुबह 6.30 से सात बजे के बीच हुई. हिडमा पर एक करोड़ से अधिक का इनाम था. वह ताड़मेटला (दंतेवाड़ा) के 2010 हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे. पुलिस ने कहा कि उसकी मौत उग्रवाद के ताबूत की आखिरी कील है. उसकी पहचान सुरक्षा घेरे और गुरिल्ला युद्ध कौशल के कारण वर्षों तक चुनौती बनी रही. मुठभेड़ में दो महिलाएं और चार पुरुष ढेर हुए. आंध्र प्रदेश खुफिया विभाग के एडीजीपी महेश चंद्र लड्डा ने बताया कि लगातार दबाव से कुछ माओवादी आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे थे. 31 माओवादी समर्थक भी हिरासत में लिये गये हैं.

बालू माफियाओं ने सिपाहियों पर चढ़ाई कर एक की मौत, दूसरा घायल

भास्कर के अनुसार पटना जिले के दुल्हिनबाजार थाना के नबीनगर के पास बालू माफियाओं ने खनन विभाग की टीम पर हमल कर दिया। खनन विभाग की टीम और सैप जवानों ने बालू से लदे ट्रैक्टर को रोकना चाहा तो ट्रैक्टर के पीछे लाइनर के रूप में स्कॉर्पियो पर सवार बालू माफियाओं ने जवानों पर गाड़ी चढ़ा दी। इसमें एक सौप जवान दुखहरण पासवान की मौके पर मौत हो गई जबकि लक्ष्मण सिंह बुरी तरह घायल हो गए। दुखहरण पासवान मुजफफरपुर के रहने वाले थे। लक्ष्मण सासाराम के रहने वाले हैं। बावल लक्ष्मण की पैर की हड्डी टूट गई। उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें पीएमसीएच रेफर कर दिया। घटना सोमवार की रात करीब पौने बारह बजे हुई। इस घटना के बाद भागने के चक्कर में ट्रैक्टर गड्ढे की चपेट में आकर पलट गया। पुलिस ने जब पीछा किया तो स्कॉर्पियो चालक गाड़ी छोड़कर भाग गया। मामले में एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गई है। थानेदार ने बताया कि घटना के बाद इलाके में छापेमारी कर स्कॉर्पियो मालिक हेमनाथ यादव और उसी गाड़ी पर सवार सुधीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

अलफलाह ग्रुप के अध्यक्ष को ईडी ने गिरफ्तार किया

हिन्दुस्तान के अनुसार ईडी ने मंगलवार को अल फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दिकी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम में गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले, ईडी ने यूनिवर्सिटी के ओखला स्थित कार्यालय के साथ दिल्ली-एनसीआर में 25 ठिकानों पर सुबह पांच बजे छापेमारी की। दिल्ली आतंकी हमले की जांच कर रही एजेंसियों ने फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने जवाद अहमद सिद्दिकी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लेने के लिए अदालत में पेश किया। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ईडी ने कई दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी ने जिन ठिकानों पर छापा मारा वो यूनिवर्सिटी के ट्रस्टी, परिवार से जुड़े सदस्यों और अन्य लोगों से संबंधित हैं। छापेमारी के दौरान ईडी ने 48 लाख रुपये नकद जब्त किए।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए एक करोड़ परिवारों का सत्यापन होगा
  • मधुबनी, भागलपुर, किशनगंज, दरभंगा वैशाली, समस्तीपुर और शिवहर के 17 मद्रास को बिहार सरकार का अनुदान भुगतान मिलेगा
  • बीपीएससी सिविल सर्विस पीटी में 14261 उम्मीदवार सफल
  • दिल्ली से सिवान आ रही बस कानपुर के पास पलटी, तीन लोगों की मौत

अनछपी: उत्तर प्रदेश के मोदीनगर-गाजियाबाद रूट पर चलती बस में हुए विस्फोट की घटना को लेकर उम्र कैद काट रहे मोहम्मद इलियास को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए बरी कर दिया है कि पुलिस के सामने दिया गया बयान मानने लायक नहीं है और अभियोजन पक्ष ब्लास्ट में शामिल होने का सबूत नहीं जुटा सका। लंबे समय तक जेल में रखे जाने के बाद बरी किए जाने का यह मामला पहले नहीं है। मोटे तौर पर इससे यह बात पता चलती है कि या तो पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम है या उसने किसी बेकसूर आदमी को फंसाया था। याद रखने की बात यह है कि आज भले ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार को इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार माना जाता है लेकिन यह दूसरी पार्टियों के सरकार में भी होता रहा है। सच पूछा जाए तो ऐसे बहुत से कानून कांग्रेस ने बनाए हैं जिनका गलत इस्तेमाल कर बेकसूर लोगों को बरसों बरस तक जेल में रखा गया। इसका पता नहीं कि मोहम्मद इलियास को कब से जेल में बंद किया गया था लेकिन इस दुखद घटना के साल को ध्यान में रखा जाए तो लगभग 28-29 साल तक उनकी जिंदगी में दुख और तकलीफ ही भरी रही होगी। इस घटना के बारे में बताया गया कि 27 अप्रैल 1996 की दोपहर रुड़की डिपो से निकली बस पर 53 यात्री सवार हुए थे जिसमें विस्फोट के बाद 18 लोगों की मौत हो गई थी। यह बस दिल्ली जा रही थी और इसमें मोहन नगर में 14 और यात्री सवार हुए थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि हमले को पाकिस्तानी नागरिक ने मोहम्मद इलियास और तस्लीम के साथ मिलकर अंजाम दिया था। अभियोजन का दावा था कि मुजफ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद इलियास लुधियाना में काम कर रहे थे जिन्हें जम्मू कश्मीर के आतंकियों ने भड़काया था। 2013 में निचली अदालत ने तस्लीम को तो बरी कर दिया लेकिन मोहम्मद इलियास को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में पुलिस की नाकामी का एक सबूत यह भी है कि कोर्ट ने कहा कि जिस टेप रिकॉर्डर पर इलियास का कथित बयान दर्ज किया गया था उसे सबूत के रूप में पेश नहीं किया गया। इस एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि कैसे विस्फोट में लोगों की जान जाती है और फिर ऐसे लोग पकड़े जाते हैं जिनके खिलाफ पुलिस के पास सबूत नहीं होता और उनका जीवन बर्बाद हो जाता है। भारत में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं इसलिए पुलिस और न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों को इस पर गौर करना चाहिए कि दोषी कैसे पकड़ा जाए और निर्दोष कैसे फंसाया ना जाए।

 

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