छपी-अनछपी: लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास, पाकिस्तान पलटा- भारत से मैच खेलेगा
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विपक्षी पार्टियों ने मिलकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ होने वाले मैच के बहिष्कार का अपना फैसला वापस ले लिया है। फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद अयोध्या के राम मंदिर में हमले की साजिश को लेकर आरोपित अब्दुल रहमान की रविवार आधी रात हत्या कर दी गई।
और, जानिएगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को ‘लड़की’ कहा और नीतीश का माइक क्यों बंद हुआ?
पहली ख़बर
जागरण ब्यूरो के अनुसार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने देने को घमासान का मुद्दा बनाते हुए विपक्षी पार्टियों ने मिलकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। इसके लिए विपक्षी दलों ने सोमवार को अपने 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लिए। राहुल समेत विपक्षी सांसदों को नहीं बोलने देने, विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र से निलंबित आक्षेप लगाने के बिरला के फैसले को पक्षपातपूर्ण बताते हुए विपक्ष उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस तैयार कर रहा है। विपक्षी दलों ने सुलह का विकल्प भी खुला रखा है। इसके लिए राहुल के साथ अखिलेश यादव अभिषेक बनर्जी और टीआर बालू ने सोमवार को बिरला से मुलाकात करके टकराव टालने पर चर्चा की।
भारत से नहीं खेलने के फैसले से पलटा पाकिस्तान
हिन्दुस्तान के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने सोमवार देर रात टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ होने वाले मैच के बहिष्कार का अपना फैसला वापस ले लिया है। पाक सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने यह जानकारी दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को श्रीलंका और बांग्लादेश बोर्ड ने इसके लिए तैयार किया। भारत और पाकिस्तान के बीच मैच कोलंबो में 15 फरवरी को होना है। सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को श्रीलंका और बांग्लादेश से फोन आया था और उन्होंने बहिष्कार का फैसला वापस लेने का उनका अनुरोध मान लिया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के प्रमुख अमीनुल इस्लाम ने इससे पहले एक बयान जारी करके खेल के भले के लिए पाकिस्तान से यह मैच खेलने का अनुरोध किया था।पाकिस्तान सरकार ने सोमवार देर रात टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ होने वाले मैच के बहिष्कार का अपना फैसला वापस ले लिया है। पाक सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने यह जानकारी दी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को श्रीलंका और बांग्लादेश बोर्ड ने इसके लिए तैयार किया। भारत और पाकिस्तान के बीच मैच कोलंबो में 15 फरवरी को होना है। सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को श्रीलंका और बांग्लादेश से फोन आया था और उन्होंने बहिष्कार का फैसला वापस लेने का उनका अनुरोध मान लिया है। भारत-पाक द्विपक्षीय क्रिकेट आईसीसी के दायरे में नहीं है जबकि त्रिकोणीय सीरीज की मांग खारिज कर दी गई है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के प्रमुख अमीनुल इस्लाम ने इससे पहले एक बयान जारी करके खेल के भले के लिए पाकिस्तान से यह मैच खेलने का अनुरोध किया था।
राम मंदिर पर हमले के आरोपित अब्दुल रहमान का जेल में मर्डर
जागरण के अनुसार हरियाणा में फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद अयोध्या के राम मंदिर में हमले की साजिश को लेकर आरोपित अब्दुल रहमान की रविवार आधी रात हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में अब्दुल रहमान के साथ ही बंद गैंगस्टर अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट पर लगा है। इस सेल में देशद्रोह के मामले में बंद शोएब रियाज को भी रखा गया था। आरोप है कि जब अब्दुल रहमान रात दो से तीन बजे के बीच सो रहा था, तब सिर पर नुकीला पत्थर मारकर उसकी हत्या की गई। अब्दुल रहमान अयोध्या के राम मंदिर में हमले की साजिश को लेकर आरोपित था। जेल प्रशासन ने अब्दुल रहमान, अरुण और शोएब रियाज को एक ही सेल में रखा था। भास्कर के अनुसार अयोध्या के रहने वाले अब्दुल रहमान को 2 मार्च 2025 को गुजरात एटीएस और हरियाणा एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फरीदाबाद के गांव से कथित तौर पर हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर के साथ गिरफ्तार किया था।
जनरल नरवणे की किताब की पीडीएफ वायरल, साइबर सेल कार्रवाई करेगा
हिन्दुस्तान के अनुसार सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे (सेवानिवृत्त) की अप्रकाशित पुस्तक की कथित पीडीएफ सोशल मीडिया पर लीक होने का मामला सामने आया है। मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए साइबर अपराध, कॉपीराइट उल्लंघन एवं अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति पूर्व सेना प्रमुख की पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की प्री-प्रिंट पीडीएफ सोशल मीडिया पर वायरल करना अपराध है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस पुस्तक को अब तक संबंधित अधिकािरयों की ओर से प्रकाशन की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
राबड़ी देवी को लड़की बोल विवाद में नीतीश
प्रभात खबर ने लिखा है कि सोमवार को विधान परिषद में हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बीच तीखी नोकझोंक हो गयी. मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के विकास के लिए व्यापक काम किया है. भास्कर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लड़की कहा। बोले- ये जो लड़की है, इसका क्या है? इसको कुछ आता है? ई कोई काम की है? ई सबको कुछ आता था? इसके (पति) हट गए, तो कुछ दिन बाद इसी को (सीएम) बना दिया। ई सब कोई काम नहीं किया। 15 साल तक कुछ काम नहीं किया। और आज बोल रहा है। ये कोई तरीका है? ई लोग का कोई मतलब नहीं है। फालतू है। ई सब पर तो एक्शन लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद सदन का माहौल और ज्यादा गरमा गया. राबड़ी देवी अपनी सीट से उठकर सामने आ गयीं, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच बहस शुरू हो गयी. हालांकि मुख्यमंत्री का माइक बंद हो जाने के कारण कुछ सुना नहीं जा सका. विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गये और नारेबाजी तेज हो गयी. हालात बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. इससे पहले राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री के लिए कहा- होश में आइए। चुप रहिए। बैठिए। डुबा दिए। शर्म कीजिए। इस्तीफा दीजिए।
विपक्ष का आरोप, नीतीश का माइक बंद किया गया
जागरण की ख़बर है कि सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी सदस्य सुनील सिंह, शशि यादव और कारी सोहेब ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब सदन में बोल रहे थे तो जानबूझकर उनका माइक बंद कर दिया गया। विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाए कि नेता सदन का माइक किसके कहने पर बंद कराया गया, इसकी जांच कर उस अधिकारी पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: अगर आपसे यह कहा जाए कि बिहार के एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडेटेशन (एनबीए) की मान्यता नहीं है तो शायद आपके लिए यकीन करना मुश्किल हो। लेकिन यही हक़ीक़त है। यह और बात है कि बिहार सरकार सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का दावा करती है और मीडिया में अक्सर इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता है। एआईसीटीई ने हाल ही में देशभर के एनबीए मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची जारी की है। एआईसीटीई की इस सूची में बिहार का कोई कॉलेज नहीं हैं। एनबीए से मान्यता प्राप्त करने के लिए जिन मानकों पर खरा उतरने की जरूरत होती है उसके बारे में बिहार सरकार की कोशिश शायद ही नजर आती हो। मान्यता देने के लिए एनबीए यह देखता है कि कॉलेजों के सभी विभागों में छात्रों के अनुपात में शिक्षक है या नहीं। इसके अलावा कॉलेज में अपडेट और आधुनिक लैब होनी चाहिए। पढ़ाई का सारा रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए। कॉलेज में होने वाली गतिविधियों का भी रिकॉर्ड होना चाहिए। प्लेसमेंट बेहतर होना चाहिए। कॉलेज में आधारभूत संचरना बेहतर होनी चाहिए। लाइब्रेरी में सभी किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए। जाहिर है ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण ही बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेज को एनबीए से मानता नहीं मिल पाई है। एनबीए से मान्यता नहीं मिलने से यहां के छात्रों को एडमिशन और नौकरी के लिए अच्छे संस्थानों खासकर विदेश में कोई उम्मीद नहीं रहती। ऐसे में समझा जा सकता है कि हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का दावा कितना खोखला और भ्रम में डालने वाला है।
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