छ्पी-अनछपी: सरकारी डॉक्टर नहीं कर पाएंगे प्राइवेट प्रैक्टिस, चाबहार पर भारत अमेरिकी दबाव में
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लायी जायेगी। भारत अमेरिका के दबाव में ईरान के चाबहार पोर्ट में अपने निवेश और मौजूदगी से पीछे हट सकता है। महाराष्ट्र में हुए नगर निगम के चुनाव में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट में भारी जीत हासिल की है और पहली बार मुंबई में भाजपा का मेयर होगा।
और जानिएगा कि नोबेल पीस प्राइज राष्ट्रपति ट्रंप के पास कैसे पहुंचा?
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार नीतीश कुमार ने कहा है कि सात निश्चय-3 में सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन के तहत सरकारी अस्पतालों में पदस्थापित चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगेगी। बिहार के 27 जिलों में मेडिकल कालेज का निर्माण हो रहा है। पटना में पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। पीएमसीएच 5400 बेड का अस्पताल बन रहा है। वहीं, आईजीआईएमएस में बेडों की संख्या तीन हजार हो रही है। अस्पतालों में मुफ्त दवा एवं जांच मुहैया कराई जा रही। वे शुक्रवार को बिहार समृद्धि यात्रा के दौरान बेतिया के रमना मैदान में जन संवाद में संबोधित कर रहे थे।
बिहार जल्द विकसित राज्यों की श्रेणी में आएगा
प्रभात खबर ने लिखा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शुक्रवार से पश्चिम चंपारण से शुरू हुई समृद्धि यात्रा के दौरान बिहार के विकास का विस्तृत रोडमैप सामने आया. मुख्यमंत्री ने कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद बेतिया के बड़ा रमना मैदान में आयोजित जन संवाद में कहा कि बिहार लगातार प्रगति कर रहा है. आने वाले वर्षों में देश के विकसित राज्यों में शामिल होगा. राज्य के विकास में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है, इससे योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है. मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और जल संसाधन मंत्री विजय सिन्हा भी मौजूद रहे. सीएम ने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी. लेकिन 24 नवंबर 2005 के बाद उनकी सरकार ने विकास को प्राथमिकता दी.
ईरान के बंदरगाह के मामले में भारत अमेरिका के दबाव में
हिन्दुस्तान के अनुसार भारत के संचालन स्वामित्व वाले ईरान के चाबहार पोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि चाबहार पोर्ट पर हमें अमेरिका से इस साल 26 अप्रैल तक बिना शर्त प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है। भारतीय पक्ष अमेरिका से बातचीत भी कर रहा है। उन्होंने कहा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 12 जनवरी को ऐलान किया था कि ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगेगा। बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया था कि भारत चाबहार पोर्ट में अपने निवेश और मौजूदगी से पीछे हट सकता है।
मुंबई में बीजेपी का मेयर होगा, ठाकरे परिवार पिछड़ा
जागरण के अनुसार बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के ऐतिहासिक चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। तीन दशकों से मुंबई की सत्ता पर काबिज ‘मातोश्री’ का वर्चस्व आखिरकार समाप्त हो गया है। शुक्रवार को घोषित परिणामों में भाजपा-शिवसेना शिंदे महायुति ने प्रचंड बहुमत हासिल कर ठाकरे परिवार के ‘आखिरी किले’ को ध्वस्त कर दिया है। अब यह साफ हो गया है कि देश के सबसे अमीर नगर निकाय में इस बार भाजपा का मेयर बैठेगा। बीएमसी के साथ ही महाराष्ट्र की अन्य 28 महानगरपालिकाओं के चुनाव में भी 23 के परिणाम भाजपा के ही पक्ष में आए हैं। 29 महानगरपालिकाओं में से 24 के मेयर भारतीय जनता पार्टी के बनने जा रहे हैं। कुल 227 सीटों वाली बीएमसी में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। उद्धव और राज ठाकरे 20 साल बाद साथ आकर भी बीएमसी की सत्ता हासिल नहीं कर पाए। अजीत पवार की पार्टी राकांपा ने अलग चुनाव लड़ा था और पार्टी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। कांग्रेस को 24 और एआईएमआईएम को 8 सीटों पर कामयाबी मिली।
रिजर्व कैटगरी के उम्मीदवार को जरूरी नंबर लाने पर जनरल में जगह मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी जो सामान्य श्रेणी की कटआफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें अनारक्षित (जनरल) सीटों पर समायोजित किया जाना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने इसे स्थापित कानूनी सिद्धांत बताते हुए कहा कि मेरिट के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी का ही अभ्यर्थी माना जाएगा। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को निरस्त करते हुए यह टिप्पणी की।
बिहार के हर जिले में ड्रोन पुलिसिंग की तैयारी
भास्कर के अनुसार बिहार में अब ड्रोन पुलिसिंग होगी। पुलिस की टीम ड्रोन टेक्नोलॉजी से लैस होगी। इसके लिए हर जिले में ड्रोन पुलिस यूनिट बनेगी। पुलिस मुख्यालय मार्च तक 50 ड्रोन की खरीद करेगी। इस पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हर जिले की पुलिस को एक-एक ड्रोन दिया जाएगा। वहीं एसटीएफ को 10 ड्रोन दिया जाएगा। सभी ड्रोन एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकार्डर) टेक्नोलॉजी से लैस होंगे। एडीजी मॉडर्नाइजेशन सुधांशु कुमार ने कहा कि 14 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय की बैठक में इसकी मंजूरी मिल गई है। मार्च तक ड्रोन की खरीद कर ली जाएगी। एडीजी ने कहा कि जिन राज्यों में पहले से ड्रोन पुलिसिंग लागू हैं, वहां विस्तृत अध्ययन किया गया है। इससे हमारी पुलिसिंग सशक्त होगी।
किसने अपना नोबेल पीस प्राइज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंपा?
हिन्दुस्तान ने लिखा है कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप यह पदक अपने पास रख सकते हैं। मुलाकात के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि मचाडो ने उनके कार्यों के सम्मान में यह पदक भेंट किया है। उन्होंने इसे ‘आपसी सम्मान का अद्भुत प्रतीक’ बताया। वहीं, मचाडो ने बैठक को बेहद सकारात्मक करार और कहा कि यह भेंट वेनेजुएला के लोगों की स्वतंत्रता के प्रति ट्रंप की प्रतिबद्धता के सम्मान में दी गई है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी तस्वीर में ट्रंप और मचाडो साथ नजर आ रहे हैं। ट्रंप के हाथ में सुनहरे फ्रेम में जड़ा नोबेल शांति पुरस्कार का पदक है।
कुछ और सुर्खियां:
- भारत सरकार ने अवैध सैट बड़ी और हुए से जुड़ी 242 वेबसाइटों और ऐप्स को बंद किया
- फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी ने जब्त की
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा से देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे
- कैश जलने के मामले से चर्चित इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की महाभियोग के खिलाफ याचिका खारिज
अनछपी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को बड़ा साबित करने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे अपना सकते हैं, इसकी एक मिसाल नोबेल पीस प्राइज के लिए उनकी कोशिशों से चलती है। अब किसी और का नोबेल पुरस्कार लेकर उनका ख़ुश होना भी इसकी ताज़ा कड़ी है। याद रहे कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल पीस प्राइज मिला था, और अब उन्होंने इसे राष्ट्रपति ट्रंप को सौंप दिया है। नोबेल प्राइज को लेकर पहले भी बहुत सारे विवाद रहे हैं लेकिन इस पुरस्कार की इतनी बेइज्जती शायद पहली बार हुई हो। नोबेल प्राइज़ को इस तरह राष्ट्रपति ट्रंप के हाथों सपने से यह भी पता चलता है कि इस पुरस्कार को देने वाली संस्था ने कितनी बड़ी गलती की है। इससे नोबेल प्राइज कमेटी पर राजनीतिक पक्षपात और घरेलू मामले में दखलअंदाजी कभी आरोप लग सकता है। क्या इन तमाम परिस्थितियों को लेकर नोबेल पीस प्राइज कमेटी शर्मिंदा है? कहने को तो नोबेल प्राइज विपक्षी नेता को दिया गया था लेकिन ऐसा लगता है कि वह पूरी तरह अमेरिका की गोद में बैठी हुई नेता हैं और किसी भी तरह अमेरिका को खुश कर वेनेजुएला में सत्ता संभालना चाहती हैं। ऐसी हालत में क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि नोबेल प्राइज कमेटी अपने पुरस्कारों के बारे में कुछ ऐसी बातें तय कर दे ताकि वह किसी और को नहीं सौंपा जा सके?
282 total views
