छपी-अनछपीः फुलवारी मामले की जांच पटना पुलिस के हाथ से निकली, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ठगा गये

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। फुलवारी शरीफ में कथित आतंकी गतिविधियों के बारे में स्थानीय थाने में दर्ज एफआईआर की जांच अब पटना पुलिस के हाथ से निकल गयी है। दो-तीन दिनों से यह बात चल रही थी कि इन मामलों की जांच एनआईए को करना है मगर बिहार पुलिस मुख्यालय यह कह रहा था कि उसे इसकी सूचना नहीं है। अब अखबारों में पटना पुलिस का ही बयान छपा है कि दोनों मामले की अब तक की उसकी जांच एनआईए को सौंप दी गयी है और एनआईए की रांची टीम ने यह मामला अपने हाथ में ले लिया है।
फुलवारी शरीफ की यह खबर अब लीड नहीं बन रही है लेकिन सभी अखबारों में इसकी चर्चा है। आज के हिन्दी अखबारों की सबसे बड़ी खबर है पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से पांच लोगों की मौत। कुछ अखबारों में मरने वालों की संख्या छह लिखी गयी है। इस आलेख के साथ लगी तस्वीर उसी जगह की है। बिना लाइसेंस चल रही यह फैक्ट्री सारण जिले के नगरा प्रखंड के खोदाईगंज बाजार में थी। मरने वालों में पटाखा कारोबारी मुलाजिम मियां और उनकी बीवी, मां, भाई और एक भांजाा शामिल थे।
फुलवारी से जुड़ी खबरों में जागरण की एक सुर्खी हैः अतहर और अरमान का रिकाॅर्डिंग बयान सुनकर टूटा जलालुद्दीन। इसी तरह एक और सुर्खी हैः मरगूब को कतर से क्रिप्टो करेंसी में हो रही थी फंडिंग। यह खबर सभी अखबारों में है। अखबार के दावे से अलग मरगूब के घरवाले कहते हैं कि उसके नाम से कोई बैंक खाता नहीं।
टाइम्स आॅफ इंडिया की सबसे बड़ी खबर हैः दिल्ली में मंकीपाॅक्स, मरीज हाल में विदेश नहीं गया। अखबार ने बताया है कि यह स्माॅल पाॅक्स की तरह ही होता है लेकिन इसमें तकलीफ कुछ कम होती है। इसी अखबार में यह खबर है कि भारत का रूस से तेल आयात 3.7 गुना बढ़ गया है। केरल हाईकोर्ट के उस फैसले की खबर भी इसमें पहले पेज पर है जिसमें कहा गया है कि बच्चे को हक है कि अपने दस्तावेज में वह सिर्फ अपनी मां का नाम दर्ज कराये। यह मामला बिन ब्याही मां के बच्चे का था।
पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का नकली व्हाट्सऐप प्रोफाइल बनाकर वहां के रजिस्ट्रार रंगजी मिश्र से अमेजन गिफ्ट कार्ड के नाम पर डेढ़ लाख की ठगी की खबर भी प्रमुखता से छपी है। यह फेक प्रोफाइल मिजोरम के नंबर पर बना हुआ है। यह नंबर भी फेक बताया जा रहा है। हालांकि किसी अखबार ने यह नहीं बताया है कि अनजान नंबर से बने प्रोफाइल पर उन्होंने क्यों गिफ्ट कार्ड खरीदकर दिये गये लिंक पर भेजे।
अनछपीः बिहार में बहुत से काम बिना लाइसेंस के होते हंै। ऐसे में पटाखा फैक्ट्री के बिना लाइसेंस चलने की बात पर शायद ही किसी को ताज्जुब हो। यह जरूर है कि पुलिस कितनी ढिटाई से यह बात बताती है कि फैक्ट्री बिना लाइसेंस के चल रही थी। अब पुलिस और प्रशासन से यह कौन पूछे कि इतनी बड़ी फैक्ट्री चलती है तो इसके अवैध होने का पता तब क्यों लगता है जब कोई बड़ी घटना हो जाती है। इससे पहले भागलपुर, बिहारशरीफ से सटे सोहसराय और पटना जिले के खुसरूपुर में भी पटाखा फैक्ट्री में आग लगी चुकी है। ’हिन्दुस्तान’ के मुताबिक 15 सिंतबर 2005 को खुसरूपुर मंे हुए विस्फोट में 27 लोग मारे गये थे। अच्छी बात है कि पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच करेगी मगर क्या इस जांच के दायरे में सरकार के उन केारिंदों को भी नहीं लाना चाहिए जिनकी जिम्मेदारी बिना लाइसेंस चल रहे धंधे पर रोक लगाने की है।

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