छ्पी-अनछपी: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में होगा प्राइवेट दखल, पेपर लीक में ‘बार्क’ कर्मी गिरफ्तार

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के 16 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का संचालन अब पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत होगा। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के तकनीकी सहायक रोशन कुमार को गिरफ्तार किया गया है। दुबई के जबल अली औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार देर रात करीब 20 मिनट के भीतर सात धमाके होने के बाद भीषण आग लग गयी।

और, बिना एमएलए-एमएलसी बने मंत्री पद संभाल रहे उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने एमएलसी मनोनीत किया।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार बिहार के 16 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का संचालन अब पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत होगा. बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी दी गयी. कैबिनेट की बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी. मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों को उन्नत कर बनाये गये 16 ब्राउनफील्ड डेंटल कॉलेज सहित चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पतालों को पीपीपी मोड पर चलाया जायेगा. इनमें चार अस्पताल पहले से संचालित हैं. 12 अस्पतालों के भवन निर्माण का कार्य किया जा रहा है. इन अस्पतालों के संचालन के लिए निविदा के माध्यम से ट्रांजेक्शन एडवाइजर के रूप में चयनित प्राइस वाटर हाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एग्रीमेंट करने की कैबिनेट ने स्वीकृति दी. साथ ही इस पर खर्च होने वाली आठ करोड़ 27 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी. 

लोक-निजी साझेदारी में संचालन के लिए संस्थानों की दो कोटि 

मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि लोक-निजी साझेदारी में संचालन के लिए संस्थानों को दो कोटि में बांटा गया है। पहली कोटि में मधेपुरा, और पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा नालंदा (रहुई) डेंटल कॉलेज अस्पताल शामिल है। संस्थान पूर्व से राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं। दूसरी कोटि में 12 वैसे संस्थान हैं, जिनका निर्माण प्रगति पर या प्रक्रियाधीन है। इनमें समस्तीपुर, सारण, मधुबनी, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, सीवान, बेगूसराय, सीतामढ़ी, जमुई, मुंगेर और सुपौल के मेडिकल कॉलेज अस्पताल शामिल हैं।

पेपर लीक में ‘बार्क’ कर्मी गिरफ्तार

जागरण के अनुसार बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर- बार्क) के तकनीकी सहायक रोशन कुमार को गिरफ्तार किया है। रोशन के विरुद्ध आंसर-की (उत्तर-कुंजी) लीक करने और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है। वह मूल रूप से नालंदा जिले के कंकरिया गांव का रहने वाला है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ईओयू की तीन सदस्यीय टीम सोमवार को ही पटना से मुंबई गई थी, जहां स्थानीय पुलिस की मदद से रिसर्च सेंटर परिसर से रोशन को गिरफ्तार किया गया।  

किसको दी आंसर की?

सूत्रों के अनुसार, 17 अप्रैल को एईडीओ परीक्षा के दिन रोशन नालंदा के सोहसराय परीक्षा केंद्र पर मौजूद था। अनुसंधान में जानकारी मिली है कि उसके पास परीक्षा शुरू होने से पहले ही आंसर-की मौजूद थी। परीक्षा के दिन उसने यह आंसर-की श्वेता कुमारी नाम की अभ्यर्थी के पति कुणाल को दी। इसके बाद कुणाल ने बायोमीट्रिक एजेंसी के कर्मचारी चंदन कुमार और राहुल कुमार को उत्तर कुंजी देकर परीक्षा कक्ष संख्या-25 में बैठी श्वेता तक पहुंचाने को कहा। रोशन परीक्षा केंद्र पर जैमर सिस्टम लगाने वाली कंपनी की टी-शर्ट पहनकर केंद्र पर पहुंचा था।

20 मिनट में सात धमाकों से दहली दुबई

प्रभात ख़बर के अनुसार दुबई के जबल अली औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार देर रात करीब 20 मिनट के भीतर सात धमाके होने के बाद भीषण आग लग गयी. घटना के बाद इलाके के ऊपर काले धुएं का घना गुबार छा गया. हालांकि यूएई प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि विस्फोट किसी हमले का नतीजा थे या किसी औद्योगिक दुर्घटना के कारण हुए, घटना में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. क्षेत्रीय मीडिया ने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यमन से मिसाइल हमला होने का दावा भी किया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जबल अली दुबई के सबसे अहम औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल है. यहां दुनिया के सबसे बड़े मानव-निर्मित बंदरगाहों में से एक, फ्री ट्रेड जोन तथा ईंधन एवं माल भंडारण की बड़ी सुविधाएं मौजूद है. उधर, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष जहाजों की आवाजाही के लिए नयी व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं. 

गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें तभी संसद चलने दी जाएगी: विपक्ष

हिन्दुस्तान के अनुसार संसद में गतिरोध खत्म करने को लेकर विपक्ष अपने कड़े रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। विपक्ष ने बुधवार को सरकार को दो टूक कह दिया कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जब तक गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब नहीं देते, तब तक सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी। गतिरोध दूर करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से वार्ता जरूर की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इस बीच, मानसून सत्र में हंगामे की वजह से अब तक एक दिन भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया है।

सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद दीपक प्रकाश एमएलसी मनोनीत

भास्कर के अनुसार मंत्री पद जाने का खतरा झेल रहे पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश आखिरकार बिहार को विधान परिषद के सदस्य हो गए। उन्हें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने मनोनीत किया। 31 जुलाई को भाजपा के विधान पार्षद देवेश कुमार ने इस्तीफा दिया था। दीपक का मनोनयन उनकी जगह हुआ। अगले वर्ष मार्च तक उनका कार्यकाल होगा। चूंकि दीपक एमएलए या एमएलसी बने बिना मंत्री थे, इसलिए उनका पद खतरे में था। दीपक दो बार बिना एमएलए एमएलसी रहे मंत्री बने। रालोमो अध्यक्ष व पिता उपेंद्र कुशवाहा ने दीपक के मनोनयन के लिए प्रधानमंत्री, सीएम के प्रति आभार व्यक्त किया। 

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार में 3 महीनों के भीतर दो एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की हत्या के विरोध में हड़ताल पर गए कार्यपालक अधिकारी मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद काम पर लौटे
  • आईजीआईएमएस में एमबीबीएस की पूरक परीक्षा के पेपर लीक मामले में छह छात्रों को सस्पेंड किया गया
  • सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढाकर 38 करने के प्रावधान वाले बिल को संसद से मंजूरी मिली
  • राजगीर में विश्व शांति स्तूप तक जाने वाले रोपवे में तकनीकी खराबी से चार केबिन में 16 पर्यटक आधे घंटे तक हवा में लटके रहे
  • कोसी नदी में बाढ़ आने से कई घर नदी में समाए, कई गांव में फैला पानी
  • अगले वर्ष अप्रैल से चलन में आएंगे प्लास्टिक के कुछ नोट

अनछपी: आपने वाट्सऐप यूनिवर्सिटी के बारे में सुना होगा। इंस्टाग्राम पर रील्स की हरकतें भी जानते होंगे। फेसबुक पर रीच बढ़ाने और घटाने का खेल भी समझते होंगे। इन तीनों की मूल कंपनी मेटा है और इनके मालिक हैं मार्क जुकरबर्ग। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के बाद मेटा की बहुत आलोचना हुई थी। लेकिन उससे ज़्यादा खतरनाक बात यह थी कि मेटा पर बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट को पैसे लेकर प्रमोट का आरोप लगा। इसी तरह डीपफेक और बहुत सारा पैसा लेकर कुछ कुछ खास कंटेंट को बढ़ावा देने जैसी खामियों की शिकायत लंबे अरसे से रही है। अब मेटा के मालिक ने इन खामियों के लिए माफी मांगी है लेकिन इस माफी से उसे सामाजिक और नैतिक नुकसान की भरपाई कैसे होगी जो उनकी कंपनियों ने किया है? इससे एक बात तो स्पष्ट है कि अगर कुछ देशों ने फेसबुक वगैरा पर पाबंदी लगाई है तो वह बिना कारण नहीं है। दूसरी बात यह कि हम सोशल मीडिया को मुफ्त में मिलने वाली सेवा समझते हैं लेकिन दर हकीकत हमें इसका बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि हमारा समाज इसके लिए क्या कीमत चुका रहा है। व्यक्तिगत तौर पर भी लोगों को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ रही है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। यह सही है कि आधुनिक तकनीक और नए-नए विचारों के साथ लोगों को जोड़ने का सोशल मीडिया एक अच्छा माध्यम बना है लेकिन इसके खतरनाक पहलू भी हमारे सामने रहने चाहिए। इन पर पाबंदी लगाना कोई उपाय नहीं है लेकिन इन पर कड़ी नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है। 

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