छ्पी-अनछपी: वादों का दौर खत्म- कल 122 सीटों पर वोटिंग, तेजस्वी बोले- अफसरों को धमका रहे शह

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए वादों का दौर खत्म हुआ और अब कल 20 जिलों में 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने भाजपा नेता अमित शाह पर अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उन्होंने सारे वादे पूरे किए उन्हें एक और मौका दें। राजद नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में यह सवाल उठाया है कि वह गुजरात में विकास और बिहार में कैट की बात करते हैं।

और, जनिएगा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संगठन के रजिस्ट्रेशन के बारे में क्या कहा।

पहली ख़बर

20 जिलों में रविवार शाम 5 बजे चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। इसमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर शामिल हैं। 122 सीटों पर 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान मंगलवार सुबह 7 बजे से शुरू होगा। 45,399 बूथ बनाए गए हैं। सोमवार शाम तक चुनाव कर्मी अर्द्धसैनिक बलों के साथ ईवीएम वीवीपैट और अन्य सामग्री लेकर बूथों पर पहुंच जाएंगे। 

नीतीश के साथ नहीं जाएंगे: लालू

प्रभात खबर के अनुसार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा है कि हम नीतीश कुमार के संपर्क में नहीं है. उन्हें अब हम स्वीकार नहीं करेंगे, उन्होंने यह बात एक अंग्रेजी समाचार पत्र के साक्षात्कार के दौरान कही है. लालू प्रसाद ने यह जवाब एक खास सवाल के पूछे जाने पर दिया. दरअसल उनसे पूछा गया था कि अगर मतगणना के बाद महागठबंधन सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े से दूर रह जाता है. तो क्या वह नीतीश कुमार के साथ जायेंगे? बातचीत के क्रम में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है तो हम बेरोजगारी खत्म करेंगे. साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि हम इस बार नीतीश कुमार की सरकार को हटायेंगे. यहां मालूम हो कि इस साल के शुरुआती महीने में लालू प्रसाद ने बड़े दिलचस्प अंदाज में एक सवाल के जवाब में कहा था कि हां, नीतीश कुमार को साथ में ले लेंगे. उनकी सारी गलतियां माफ कर देंगे, माफ करना हमारा फर्ज है. 

तेजस्वी का आरोप: अमित शाह अधिकारियों को धमका रहे

महागठंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने एनडीए नेताओं विशेष रूप से गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाये हैं. रविवार को जारी बयान में तेजस्वी ने कहा कि प्रथम चरण के बाद एनडीए खेमे में भारी गमगीन माहौल है. हार के खौफ से गृहमंत्री अधिकारियों से मिलकर एवं फोन पर धमकी दे रहे है. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री जिस होटल में ठहरते हैं, वहां के सीसीटीवी बंद करा कर देर रात्रि अधिकारियों को बुलाते हैं. राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में इस बार बदलाव निश्चित है. उन्होंने दो टूक कहा कि ‘दो गुजराती’ येनकेन प्रकारेण बिहार पर कब्जा करना चाहते हैं. वो बिहार को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं. बिहार की जनता संविधान विरोधी कार्य करने बे-जमीर सत्ताधारी नेताओं को कड़ा सबक सिखाने के लिए एक पैर पर खड़ी है. 

बिहार आते हैं तो कट्टा की बात करने लगते हैं मोदी: तेजस्वी

जागरण के अनुसार महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री पर जमकर निशाना साधा। कहा कि जब मोदी गुजरात जाते हैं तो फैक्ट्री और विकास की बात करते हैं, लेकिन बिहार आते हैं तो कट्टा की बात करने लगते हैं। एक बिहारी सौ पर भारी, 37 वर्ष के एक युवक को रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री तक को बिहार का दौरा करना पड़ रहा है। जनता सब समझती है। अब बिहार में विकास की नई शुरुआत होगी। तेजस्वी रविवार को कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, जहानाबाद व अरवल में जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनी तो एनडीए 20 साल में जो नहीं कर पाई, 20 महीने में बिहार में कर दिखाएंगे।

एक मौक़ा और दें: नीतीश

हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हम सत्ता में आये, उस समय बिहार में अपराधियों का बोल बाला था। लोग भय के माहौल में जी रहे थे। उन्होंने कहा कि हमने अपने सारे वायदे पूरे किए, एक और मौका दीजिए। बिहार को विकसित बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने राजद सुप्रीमो का नाम लिए बिना कटाक्ष किया कि पहले पत्नी को सीएम बनाये। अब वे अपने बेटे को सीएम बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब बिहार में डर-भय नहीं, कानून का राज है। केंद्र के सहयोग से बिहार में चौतरफा विकास हो रहा है।

घुसपैठियों का वोट नहीं चाहिए: शाह

भास्कर के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार में फिर से गलती हुई तो राज्य जंगलराज में लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण के मतदान ने ही यह तय कर दिया है कि एनडीए की सरकार बनने जा रही है। जनता को महागठबंधन के झांसे में नहीं आना चाहिए। शाह ने कहा कि घुसपैठिए युवाओं की नौकरी और गरीबों के राशन में हिस्सा मार रहे हैं। वे देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। विपक्ष ने घुसपैठियों को वोट बैंक बनाया है, लेकिन भाजपा को घुसपैठियों का वोट नहीं चाहिए। भाजपा सरकार एक-एक घुसपैठिए को चुनकर बाहर करेगी। मोदी की सरकार ने पाकिस्तान में घुस आतंकवादियों को मारने का काम किया। उन्होंने कहा कि एनडीए बिहार को अगले पांच साल में विकसित राज्य बनाएगा। रविवार को अमित शाह ने सासाराम और अरवल में चुनावी सभाओं को संबोधित किया। 

दानापुर दिनारा में छत गिरी, पांच की मौत

जागरण की खबर है कि दानापुर दियारा में अकिलपुर थाना क्षेत्र के मानस नया पानापुर 42 पट्टी में रविवार की रात एक घर की छत गिरने से गृहस्वामी सहित पांच सदस्यों की मलबे में दबने से मौत हो गई। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाया और शवों को बाहर निकाला। पूर्व प्रमुख सीपी सिंह ने बताया कि यह मकान पीएम आवास योजना के तहत बनाया गया था। जानकारी के अनुसार, बबलू खान (32 वर्ष) अपनी पत्नी रौशन खातून (30 वर्ष) और बच्चों के साथ इस घर में रहते थे। रात में दंपती और बच्चे घर में सो रहे थे, तभी रात लगभग दस बजे मकान की छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। इस हादसे में बबलू खान, उनकी पत्नी रौशन खातून, पुत्री रुखसार (12 वर्ष), चांदनी (दो वर्ष) और पुत्र मो चांद (10 वर्ष) मलबे में दब गए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के रजिस्ट्रेशन के बारे में क्या कहा?

जागरण के अनुसार आरएसएस पर बिना रजिस्ट्रेशन काम करने का आरोप लगाने वाले कांग्रेस नेताओं पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि उनके संगठन को व्यक्तियों के निकाय के रूप में मान्यता प्राप्त है। आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन संघ द्वारा आयोजित आंतरिक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान भागवत ने कहा-हमें तीन बार प्रतिबंधित किया गया। इसलिए सरकार ने हमें मान्यता दी है। अगर हमारा अस्तित्व नहीं था, तो उन्होंने किस पर प्रतिबंध लगाया? कई चीजें पंजीकृत नहीं हैं। यहाँ तक कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है। भागवत ने स्पष्ट किया आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी। क्या आप उम्मीद करते हैं कि हम ब्रिटिश सरकार के पास रजिस्ट्रेशन कराते?

कुछ और सुर्खियां:

  • राहुल गांधी बोले- अगर वोट चोरी रोकेंगे तो पक्का बनेगी बिहार में महागठबंधन की सरकार
  • सोनपुर मेले की शुरुआत 32 दिनों तक चलेगा मेला
  • चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुआ हादसा: गया जंक्शन पर प्लेटफार्म और कोच के गैप में फंसने से पटना के यात्री की मौत
  • फुलवारी शरीफ के चर्चित अनवर हत्याकांड के मुख्य आरोपित आफताब मलिक उर्फ आफताब आलम को गिरफ्तार किया गया
  • दूसरे चरण के 17 जिलों के सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ी, नेपाल बॉर्डर 11 नवंबर तक सील

अनछपी: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रचार का दौर थम गया हालांकि आज भी अखबारों में एनडीए के पक्ष में जदयू के विज्ञापन छपे हुए हैं। यहां तक कि चुनाव के दिन भी ऐसे विज्ञापन छपते हैं तो प्रचार बंद होने का दावा किस हद तक सही है इस पर भी सोचना चाहिए। अखबार और टीवी वाले तो इसलिए इस पर सवाल नहीं होने देते क्योंकि यह उनके पैसे कमाने का जरिया है और उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह ऐसे सवाल उठाएं। इस चुनाव की जो बात बराबर याद की जाएगी वह है नीतीश कुमार कि उन मुद्दों पर चुप्पी जिसके लिए वह यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कभी कम्युनलिज़्म से समझौता नहीं किया। दरअसल इस दावे के साथ वह मुसलमान का वोट लेना चाहते हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसी बातें हैं जिनके सहारे वह मुसलमान से अपील करते हुए नजर आते हैं कि उनकी पार्टी को वोट दिया जाए। लेकिन नीतीश कुमार ने कभी भारतीय जनता पार्टी के उस प्रोपेगेंडा का जवाब नहीं दिया जिसमें वह मुसलमान को घुसपैठिया बताती है। चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घुसपैठियों की बात करें या गृह मंत्री अमित शाह, नीतीश कुमार ने कभी इनसे यह नहीं कहा कि वह गलत बात कह रहे हैं। अमित शाह तो साफ साफ मुसलमान घुसपैठिया शब्द का भी प्रयोग कर चुके हैं। एक तरफ नीतीश कुमार मुसलमान को यह बताना चाहते हैं कि वह उनके हितैषी हैं लेकिन दूसरी तरफ हकीकत यह है कि जब उनके अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया जाता है तो वह चुप्पी साधे रहते हैं और उनके साथ ही मिलकर सरकार चलाते हैं। इस चुप्पी को नीतीश कुमार का समर्थन क्यों नहीं माना जाना चाहिए और यह बात क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि क्या नीतीश कुमार को समर्थन करने का मतलब यह मानना नहीं है कि मुसलमान घुसपैठिया हैं? मुसलमानों के भारी विरोध के बावजूद विवादास्पद वक़्फ़ कानून को नीतीश कुमार ने समर्थन दिया। ऐसे में नीतीश कुमार को समर्थन देने का मतलब क्या यह नहीं है कि वक़्फ़ पर सरकारी क़ब्ज़े का समर्थन दिया जाए? जिस तरह सीएए का नीतीश कुमार ने समर्थन किया, ऐसे में नीतीश कुमार को समर्थन मतलब क्या सीएए को समर्थन देना नहीं होगा?इसी सिलसिले में वोटर लिस्ट के एसआईआर को भी जोड़ सकते हैं। जो लोग नीतीश कुमार की पार्टी या सरकार से फायदा उठा रहे हैं वह तो अपने फायदे की बाद सोचेंगे, उनसे क्या उम्मीद करना? वोटर को अपने फायदे की बात सोचनी चाहिए। 

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