छपी-अनछपी: राहुल गांधी को ‘सारे मोदी टाइटल…’ मामले में सज़ा, बिहार में बिजली 24% महंगी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वायनाड से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी को मानहानि के मामले में सजा होने के साथ ही उनकी लोकसभा सदस्यता पर भी खतरा हो गया है। इससे संबंधित खबरें अखबारों में छाई हुई हैं। बिहार में बिजली कम से कम 24% महंगी हो गई है। इस खबर को भी अच्छी जगह मिली है। भाजपा ने संजय जायसवाल की जगह सम्राट चौधरी को बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसे भी पहले पन्ने पर जगह मिली है

हिन्दुस्तान की मेन हेडलाइन है: राहुल को 2 साल की सजा, जमानत। जागरण की सबसे बड़ी सुर्खी है: मोदी उपनाम मामले में राहुल को दो वर्ष सजा। सूरत की सत्र अदालत ने गुरुवार को ‘मोदी उपनाम’ संबंधी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो साल कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अदालत ने उन्हें जमानत भी दे दी। साथ ही सजा के अमल पर 30 दिनों के लिए रोक लगा दी ताकि वे फैसले के खिलाफ अपील कर सकें। फैसले से राहुल की संसद सदस्यता पर संकट बढ़ गया है। वर्ष 2019 में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कांग्रेस नेता को आईपीसी की धाराओं 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया। ये धाराएं मानहानि और उससे संबंधित सजा से जुड़ी हैं। कांग्रेस ने कहा, वह निर्णय को चुनौती देगी। यह केस सूरत वेस्ट के एमएलए पूर्णेश मोदी ने किया था।

राहुल की लोकसभा सदस्यता

भास्कर की खबर है: राहुल ने 10 साल पहले जो अध्यादेश फाड़ा था वही बना फांसी, सजा ना रुकी तो जाएगी सांसदी। अख़बार लिखता है कि 10 साल पहले 27 सितंबर 2013 को दिल्ली में कांग्रेस नेता अजय माकन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने एक अध्यादेश की प्रति फाड़ी थी। अगर वह अध्यादेश कानून बन जाता तो मानहानि के मामले में सजा पाने के बाद राहुल की सांसदी पर संकट नहीं आता। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 को अपने फैसले में जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8 (4) को असंवैधानिक करार दिया था। यह धारा कोर्ट में अपील लंबित होने के दौरान पद पर बने रहने की छूट देती थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2 साल की सजा पाए जनप्रतिनिधि की सदस्यता तत्काल रद्द हो  जाती। वैसे सूरत कोर्ट ने जमानत देते हुए अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है इस दौरान उन्हें गुजरात हाई कोर्ट में अपील कर सजा पर रोक लगाने की मांग करनी होगी।

महंगी बिजली

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: कोयले के ऊंचे दामों से महंगी मिल रही बिजली, दरों में 24.10% इजाफा फिक्स्ड चार्ज भी दुगनी। बिहार के 1.85 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के जेब पर बिल का बोझ बढ़ गया है। बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग में फिक्स्ड चार्ज में 100% और प्रति यूनिट रेट में 24.10% की बढ़ोतरी की है। साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने फिक्स चार्ज में डेढ़ सौ प्रतिशत और दर में 53.62% बढ़ोतरी की मांग की थी। कोयले के दामों में बढ़ोतरी के कारण थर्मल पावर से बिजली खरीद दर में बढ़ोतरी हुई है। इस कारण रेट रिवाइज किया गया है। यह दर 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगी। शहरी क्षेत्र में फिक्स्ड चार्ज ₹80 होगा और 100 यूनिट तक प्रति यूनिट दर ₹6.10  से बढ़ाकर ₹7.57 कर दिया गया है। सब यूनिट से ऊपर अब हर यूनिट पर ₹9.10 देने होंगे।

सम्राट चौधरी नए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

सम्राट चौधरी को भारतीय जनता पार्टी का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा सभी अखबारों में है। सम्राट चौधरी कुशवाहा जाति से आते हैं और फिलहाल बिहार विधान परिषद के सदस्य और वहां नेता प्रतिपक्ष हैं। कहा जाता है कि राज्य में यादव के बाद यह सबसे बड़ी जाति है जिसकी संख्या तकरीबन 8% है। राजद से राजनीति शुरू करने और जदयू से भाजपा में शामिल होने वाले सम्राट के पिता शकुनी चौधरी थे। सम्राट चौधरी का भारतीय जनता पार्टी ने काफी विरोध किया था जब वह राजद सरकार में मंत्री बने थे। सम्राट ने निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल की जगह ली है। सम्राट चौधरी राज्य में कृषि, नगर विकास एवं आवास तथा पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड के लखनपुर गांव निवासी सम्राट चौधरी (54 वर्ष) खगड़िया जिले के परबत्ता से विधायक रहे हैं। वह पहली बार वर्ष 1999 में राजद सरकार में मंत्री बने थे। एक जुलाई, 2020 से वह विधान परिषद के सदस्य हैं। अगस्त, 2022 में वह विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाये गये। इसके पहले वह एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री थे।

संसद का बुरा हाल

जागरण की सुर्खी है: बिना किसी चर्चा के विनियोग विधेयक और अनुदान मांग पारित। वित्तीय वर्ष 2023 24 में 45 लाख करोड़ के बजट खर्च के लिए अनुदान मांग और संबंधित विनियोग विधेयक 2023 को गुरुवार को बिना किसी चर्चा के लोकसभा में पारित कर दिया। सुबह के स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही शाम 6:00 बजे शुरू की गई और 15 मिनट से भी कम समय में कांग्रेसी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच अनुदान मांग और विनियोग बिल को पारित करा लिया गया। इस दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। बजट सत्र के दूसरे चरण में शोर शराबे के चलते एक भी दिन कार्यवाही नहीं चल पाई है। ऐसे में बजट पारित कराने के लिए सरकार को गिलोटिन का रास्ता अपनाना पड़ा यानी सभी मंत्रालयों की अनुदान मांगों को एक साथ बिना चर्चा के पारित करा लिया गया।

जेपीसी की मांग पर प्रदर्शन

हिन्दुस्तान की खबर है: जेपीसी की मांग को लेकर विपक्षी दलों का प्रदर्शन। अडानी समूह मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद भवन परिसर में गुरुवार को प्रदर्शन किया। इसमें कांग्रेस, भारतीय राष्ट्र समिति, आम आदमी पार्टी और डीएमके सहित कई दलों के सांसद शामिल हुए। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी दलों के सांसद मार्च करते हुए संसद भवन परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने इकठ्ठा हुए।

अमृतपाल की पहेली

जागरण ने खबर दी है: फिर हाथ से फिसल गया अमृतपाल। कुरुक्षेत्र से दी गई इस खबर में जागरण ने लिखा है कि पंजाब पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह एक बार फिर एसटीएफ के हाथ से फिसल गया। हैरानी की बात यह है वह लगभग 12 घंटे एसडीएम ऑफिस में क्लर्क हरजिंदर के घर छुपा रहा मगर पुलिस को भनक तक नहीं लगी। जब पता चला देर हो चुकी थी अमृतपाल साथी के साथ उत्तराखंड की ओर फरार हो गया है।

कुछ और सुर्खियां

  • अमेरिका में बिजनेस या टूरिस्ट वीजा पर भी नौकरी के लिए कर सकते हैं आवेदन
  • 17 करोड़ आम लोग और सैन्य कर्मियों का डेटा लीक
  • पीएचसी में भी होगी दो पारियों में ओपीडी
  • भवन निर्माण विभाग में हो रही 551 जेई व 1000 हजार मालिक की बहाली
  • सीआरपीएफ़ में 9212 पदों पर होगी भर्ती
  • एशिया कप पाकिस्तान में होगा, भारत के मैच न्यूट्रल वेन्यू पर होंगे
  • कोरोना से निपटने को अस्पतालों में पूरी तैयारी रखने का निर्देश
  • सारण शराब कांड में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दावा: 42 नहीं 77 लोग मरे

अनछपी: आज बात बोतलबंद पानी की। जागरण ने अपने संपादकीय में ‘आश्चर्य का विषय’ शीर्षक से इस पर चर्चा की है। बात यह है कि बिहार में बोतल बंद पानी की क्वालिटी जांचने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बारे में विधानसभा के बजट सत्र में एक सवाल आया। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी की मेहनत के बाद लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग जवाब देने को तो तैयार हुआ लेकिन जवाब में यह तय नहीं हुआ कि बोतलबंद पानी की निगरानी कौन विभाग करेगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी। यानी यह फैसला करने में एक डेढ़ महीना लग जाएगा कि आखिर बोतल बंद पानी की क्वालिटी की जांच कौन विभाग करेगा। बताने की जरूरत नहीं कि बोतल बंद पानी का उद्योग को कुकुरमुत्ते की तरह हर जगह फैला हुआ है। जल निकासी से लेकर बोतल में पानी भरने और इसके वितरण के बारे में शायद ही कोई जांच-पड़ताल होती हो। बिहार में कई जिलों में भूगर्भीय जलस्तर काफी नीचे है और इसके बावजूद इस तरह अनियंत्रित जल निकासी लंबे समय से जारी है। बोतलबंद पानी बेचने वाले तो मालामाल हो रहे हैं लेकिन पीने वालों को यह भी नहीं पता कि उनका पानी कितना शुद्ध है। बोतल बंद पानी की एक दूसरी समस्या मिलते-जुलते नामों की भी है। उदारण के लिए बिसलेरी जैसे ब्रांड नाम से मिलते जुलते नाम की पानी की बोतलें हर जगह मिल जाएंगी। सरकार को कोसने के साथ-साथ हमें यह भी सोचना चाहिए कि बहुत सारे गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ भी इस मामले में पूरी तरह विफल हुए हैं। कम से कम अब तो सामाजिक स्तर पर भी बोतल बंद पानी की क्वालिटी के लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए।

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