बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने कहा है कि दसियों लाख नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी होगी और संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज़ होती जा रही है।
और, जन्म तिथि में फर्जीवाड़ा कर तीन महीनों में बिहार के 1.66 लाख लोगों के आधार नंबर रद्द कर दिए गए हैं।
पहली ख़बर
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि करोड़ों भारतीयों को वोट के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है। इससे वे अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाएंगे। ऐसी प्रक्रिया संविधान का उल्लंघन होगी। इसे किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि उन्होंने एसआईआर का सीधे जिक्र नहीं किया। हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में कार्यक्रम में जस्टिस भुइयां ने कहा, ‘यह संविधान के मूल ढांचे पर चोट और संवैधानिक व्यवस्था को नकारने जैसा है। कोई अथॉरिटी ऐसा नहीं कर सकती, कोई कोर्ट इसे मंजूर नहीं कर सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर सुनवाई आज
चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत की बेंच सोमवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने और उनके कथित फैसले रद्द करने से जुड़ी याचिकाएं सुनेगी। पटना के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह व अन्य की याचिकाओं में आरोप है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना सॉफ्टवेयर और फॉर्म-6 में बदलाव हुए। गोवा में 97 मतदाताओं की बहाली और बंगाल में 16.10 लाख से ज्यादा अपीलों का मुद्दा भी है। वहीं, आयोग का कहना है कि सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक हैं।
ज्ञानेश के खिलाफ आंदोलन तेज
हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में रविवार को दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन हुए। दिल्ली में छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, जबकि मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे के नेतृत्व में मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। दिल्ली में आइसा के बैनर तले इंडिया गेट से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला गया। शांगरी-ला होटल के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों ने एक बैरिकेड तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस सेफ्टी की नोक झोंक हुई।
ज्ञानेश कुमार पर केरलम में जांच का अंदेश
एसआईआर और चुनावों में कथित धांधली के आरोपों के बीच केरलम सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने एक मामले में जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला वर्ष 2006 में केरलम के पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन सचिव ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान केरल राज्य सड़क परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रोजेक्ट से जुड़े एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की मौत से जुड़ा है। ज्ञानेश केरलम कैडर के अधिकारी हैं।
लापरवाही बरतने के आरोप में सात इंजीनियर सस्पेंड
गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव के बाद तटबंधों की सुरक्षा और आकस्मिक स्थिति से निपटने में लापरवाही बरतने के मामले में जल संसाधन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. विभाग ने कुल आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है. इनमें सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, मुख्य अभियंता मुजफ्फरपुर के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है. गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव के बाद तटबंधों की सुरक्षा और आकस्मिक स्थिति से निपटने में लापरवाही बरतने के मामले में जल संसाधन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. विभाग ने कुल आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है. इनमें सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, मुख्य अभियंता मुजफ्फरपुर के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है.
इमरान खान की रिहाई मांगते हज़ारों गिरफ्तार
भास्कर के अनुसार पाकिस्तान की सियासत रविवार को गरमा गई। पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों ने खैबर सूबे के लक्की मरवत से लॉन्ग मार्च निकाला। सुबह से ही लोगों ने हाईवे पर जुटना शुरू कर दिया। दोपहर में लक्की मरवत से बाहर निकलने के लगभग 3 किमी बाद ही फ्रंटियर फोर्स और इमरान समर्थक आमने-सामने हो गए। दोनों ओर से पथराव होने लगा। फोर्स ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। आरपार के मूड में इमरान समर्थकों ने भी जमकर मुकाबला किया। लगभग एक घंटे बाद मार्च फिर से शुरू हो गया। लॉन्ग मार्च की शुरुआत में ही हिंसक झड़पों से सकते में आए पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने देर शाम बैठक भी की है। हालांकि बैंठक में किए गए फैसलों के बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। इससे पहले शहबाज सरकार ने शनिवार रात को पंजाब सूबे में बड़ा क्रैकडाउन किया। इमरान की पार्टी पीटीआई के कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर धरपकड़ की गई। पीटीआई का दावा है कि लगभग 2000 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई है।
डेट ऑफ बर्थ बदलने के फर्जीवाड़ा में 1.66 लाख आधार रद्द
बिहार में फर्जी दस्तावेजों से जन्मतिथि बदलने वालों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने बीते तीन महीनों में राज्य के 1.66 लाख लोगों के आधार नंबर रद्द कर दिए हैं। अब आवेदन खारिज करने के बजाय सीधे मूल आधार नंबर ही ब्लॉक किया जा रहा है। प्राधिकरण अब जन्म प्रमाण पत्रों का मिलान सीधे नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीकरण डेटा से कर रहा है। डेटा मिसमैच होते ही जालसाजी पकड़ी जा रही है। आधार बंद होने पर लोग इसे चालू कराने पटना के शक्ति टावर और जीपीओ सेवा केंद्रों पर चक्कर काट रहे हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- पाकिस्तानी एजेंट के हनी ट्रैप में फंसे भारतीय नौसेना के जवान प्रदीप मुखर्जी आंध्र प्रदेश के कोयंबटूर से गिरफ्तार
- थार कार से भागलपुर जा रहे पटना के व्यापारी अमर सिंघानिया और उनके ड्राइवर की ट्रक से टक्कर के बाद मौत
- सरकारी स्कूल के छात्रों का हेल्थ डेटा नहीं देने पर 32 डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर को नोटिस
- बिहार प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष बने अजय पासवान
- पांचवी सीट पर भी आमने-सामने हुए राजद और कांग्रेस; विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन पूरी तरह टूटा
अनछपी: बिहार में आज कितनी जगह इस बात पर चर्चा हुई होगी कि जमुई के सदर अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान दो प्रसूता और एक गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई? जिन मरीजों की मौत हुई उनके रिश्तेदारों का का आरोप है कि शनिवार की रात अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं थी। इसकी वजह से डिलीवरी के लिए पहुंची महिलाओं का इलाज नहीं हो सका। यह संतोष की बात है कि स्थानीय विधायक और मंत्री सह श्रेयसी सिंह ने अधिकारियों से कहा कि उन लोगों की लापरवाही के कारण ही दो प्रसूता की मौत हुई है। उन्होंने मामले की जानकारी डीएम को दी। डीएम ने जांच के लिए डीडीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी को 24 घंटे में रिपोर्ट देनी है। इसके बारे में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. थनीष कुमार का कहना कि जांच की जा रही है और ड्यूटी से गायब रहने वाली महिला डॉक्टर पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। सरकार ने बड़े पैमाने पर इस बात का प्रचार किया था कि डिलीवरी के लिए महिलाओं को अस्पताल आना चाहिए और घर पर प्रसव खतरनाक होता है। लेकिन अस्पतालों में होने वाली इस तरह की दुखद घटना से यह सवाल तो जरूर उठना है कि आखिर सरकार के इस प्रचार पर कितने लोग भरोसा करेंगे? आमतौर पर कमजोर तबके के लोग ही सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के लिए जाते हैं लेकिन उनके लिए मुसीबत यह है कि घर पर यह काम हो तब मौत का खतरा रहता है और वह अस्पताल पहुंचें तो वहां भी इसी समस्या से दो-चार होना पड़ता है। वैसे डॉक्टरों को खुद भी इस बात पर गौर करना चाहिए कि जब सरकार उन पर इतने पैसे खर्च करती है तो वह सेवा देने में लापरवाही क्यों बरतते हैं? बात किसी एक दो डॉक्टर की नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्था ही इस बीमारी का शिकार है और बिहार यह लंबे समय से झेल रहा है।
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