छ्पी-अनछपी: चुनाव आयोग को सुप्रीम आर्डर- आधार को मानें, नेपाल में उबाल-19 की मौत
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को साफ तौर पर निर्देश दिया है कि वह आधार कार्ड को वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करे। नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हुए बवाल में 19 लोगों की मौत हो गई। बिहार सरकार ने आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय ₹2000 बढ़ा कर ₹9000 किया। एनआईए ने आतंकी साजिश के मामले में कटिहार और दूसरे शहरों में छापेमारी की।
और, जानिएगा कि आज होने वाले उपराष्ट्रपति के चुनाव में बीआरएस और बीजू जनता दल ने वोटिंग से दूरी क्यों बनाई।
पहली खबर
प्रभात खबर के अनुसार बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार मतदाता सूची के लिए वैध पहचान पत्र है लेकिन इसे नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता। सोमवार को बिहार के एसआईआर मामले पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे 9 सितंबर तक आधार कार्ड को 12वीं दस्तावेज के रूप में शामिल करें ताकि मतदाता वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए आधार को भी पेश कर सकें। आयोग पहले ही 11 दस्तावेजों की सूची जारी कर चुका है जिन्हें दिखाकर मतदाता वोटर लिस्ट में नाम शामिल कर सकते हैं। पहले इसमें आधार कार्ड शामिल नहीं था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आधार को बतौर 12वां दस्तावेज मानने का आदेश दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग से सभी अधिकारियों को निर्देश जारी करने को भी कहा है ताकि आधार कार्ड को स्वीकार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को आधार कार्ड की वैधता जचने का पूरा अधिकार होगा।
नेपाल में युवाओं का उबाल- 19 की मौत

हिन्दुस्तान के अनुसार भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को नौजवानों के गुस्से से नेपाल सुलग उठा। सड़क से संसद तक भारी हंगामा हुआ। आक्रोशित नौजवान संसद परिसर में घुस गए। इस दौरान कई शहरों में पुलिस से झड़प और गोलीबारी में 19 की मौत हो गई, जबकि 350 से अधिक घायल हैं। कई स्थानों पर सेना तैनात कर कर्फ्यू लगाना पड़ा। देर रात नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध वापस ले लिया। वहां के संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा, सूचना मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों को सोशल मीडिया साइटों को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। जेन जेड के बैनर तले काठमांडू में स्कूली छात्रों समेत हजारों युवा संसद भवन के सामने एकत्र हो गए और सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटाने की मांग करने लगे। इस दौरान युवा सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब कुछ आंदोलनकारी संसद परिसर में घुस गए, तो विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलानी पड़ीं।
आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय ₹9000 हुआ
जागरण के अनुसार आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के मानदेय में सरकार ने बढ़ोतरी का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपने एक्स हैंडल पर सरकार के इस फैसले की जानकारी दी। आंगनबाड़ी सेविकाओं को अब ₹7000 की जगह ₹9000 मानदेय मिलेगा। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर काम कर रही सेविकाओं का मानदेय ₹500 बढ़ाकर ₹4500 किया गया है। नई घोषणा से 2 लाख 10000 सेविकाओं और सहायिकाओं को मानदेय में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।
टेरर फंडिंग के आरोप में कटिहार में एनआईए की छापेमारी
हिन्दुस्तान के अनुसार आतंकवादियों से जुड़ाव और टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को बिहार के कटिहार सहित पांच राज्यों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान जम्मू-कश्मीर में नौ, बिहार में आठ, उत्तर प्रदेश में दो तथा कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक स्थानों पर तलाशी ली गई। छापेमारी को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बिहार पुलिस या एनआईए अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। कटिहार एसपी शिखर चौधरी ने एनआईए छापेमारी की पुष्टि करते हुए टेरर फंडिंग और आतंकी कनेक्शन में छापेमारी की संभावना जताई। कटिहार जिले के सेमापुर थाना क्षेत्र स्थित सुखासन, दुर्गापुर पंचायत में एनआईए टीम ने दबिश दी। करीब छह-सात गाड़ियों से सुबह पहुंची टीम ने दुर्गापुर के मुबारक, नूर, हाशिम, निजाम, इकबाल, एखलाक के घर में छापेमारी की। बालूघाट निवासी मुतालिब गुजरात के सूरत में काम करता है। घर के लोगों को नोटिस देकर एक-डेढ़ माह पहले ही सूरत से गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की।
उपराष्ट्रपति चुनाव में बीआरएस और बीजू जनता दल वोटिंग से दूर क्यों
भास्कर के अनुसार उपराष्ट्रपति के लिए मंगलवार को होने वाले चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार क राधाकृष्णन और विपक्ष के साझा प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधी टक्कर होगी। मतदान से ठीक एक दिन पहले बीआरएस और बीजू जनता दल ने ऐलान किया कि उनके सांसद वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे। तेलंगाना में यूरिया की भारी कमी को कारण बताते हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने इसकी जानकारी दी। ओडिशा की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल ने भी वोट नहीं डालने का ऐलान किया। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने यह फैसला पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति, वरिष्ठ नेताओं और सांसदों से चर्चा के बाद लिया। पार्टी के फैसले से एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को सीधा फायदा मिलेगा। बीआरएस के राज्यसभा में चार और बीजू जनता दल के सात सांसद हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- पटना में मेट्रो का न्यूनतम किराया ₹15 और अधिकतम ₹30 होगा
- वरिष्ठ पत्रकार और टेलीग्राफ के संपादक संकर्षण ठाकुर की 63 साल की उम्र में मौत
- एशिया कप हॉकी जीतने वाली भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों को बिहार सरकार 10-10 लाख देगी
- बिहार की सरकारी बसों में अब ऑनलाइन टिकट काटने की सुविधा
- जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए और दो जवानों की जान गई
- पटना स्थित तख्त श्री हरि मंदिर साहब को ईमेल भेजकर बम से उड़ने की धमकी
अनछपी: नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगाने के खिलाफ जेन ज़ी के बैनर तले जो आंदोलन हुआ और जिसके हिंसक होने पर पुलिस की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकरियों की मौत हो गई, उस सिलसिले में यह समझना जरूरी है कि आखिर नेपाल सरकार को क्या परेशानी हुई जिसकी वजह से उसने ऐसा कदम उठाया। पता यह चला कि दरअसल नेपाल में बड़े पैमाने पर हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से वहां की युवा पीढ़ी नाराज है। नेपाल के युवा अपनी इस नाराजगी को सोशल मीडिया पर लगातार सामने ला रहे थे। ऐसा लगता है कि भारत की तरह ही नेपाल में भी मेनस्ट्रीम मीडिया पर सरकार का कब्जा है। ऐसे में वहां के युवा सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे थे जिससे सरकार को बहुत परेशानी हो रही थी। हालांकि भारत में भी सोशल मीडिया पर एक तरह की पाबंदी है लेकिन उसको लेकर अभी युवाओं में नेपाल की तरह का गुस्सा नहीं है। भारत में सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बैन नहीं किया जाता बल्कि सरकार और सरकार चला रही पार्टी के खिलाफ जो भी आवाज उठाता है उसके हैंडल को भारत में बैन कर दिया जाता है। चूंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने के लिए सरकार की इजाजत जरूरी होती है इसलिए वह सरकार की तानाशाही भरी बंदिशों को मानने के लिए भी मजबूर होती है। जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ट्विटर के नाम से चल रहा था तो उस समय मोदी सरकार के आदेशों से तंग आकर यह भी कहा गया था कि ट्विटर भारत में अपनी सेवाएं बंद कर देगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मालिकों का असल मक़सद मुनाफा कमाना होता है, इसलिए वह सरकार के हर आदेश को मानने के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि नेपाल सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी मर्जी के मुताबिक दबाने में भारत की तरह कामयाब नहीं हो पा रही थी तो उसने इस पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी। अब इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन हुए और जब 19 लोग मार दिए गए तो नेपाल सरकार ने इस पाबंदी को हटाने का एलान किया। कई लोग इस बात का भी ध्यान दिला रहे हैं कि श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद नेपाल में युवाओं ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया है। लेकिन यह भी सच्चाई है कि पाकिस्तान और भारत में युवाओं को अब तक ऐसी कोई कामयाबी नहीं मिली है।
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