छपी-अनछपी: नीतीश की शर्मनाक हरकत- हर तरफ निंदा, 5 बच्चों संग मजबूर बाप ने लगाई फांसी 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ज्वाइनिंग लेटर बांटते हुए एक डॉक्टर के चेहरे के पर्दे को ज़बर्दस्ती हटाने की शर्मनाक हरकत की हर तरफ निंदा हो रही है। हालांकि ज़्यादातर अखबारों ने अपनी मजबूरी में यह खबर नहीं दी है। मुजफ्फरपुर में आर्थिक तंगी और सूदखोर की जोर ज़बर्दस्ती से मजबूर एक बाप ने पांच बच्चों संग फांसी लगा ली जिसमें बाप समेत चार की मौत हो गई। 

पहली ख़बर 

भास्कर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक महिला चिकित्सक का हिजाब हटा दिया। इसका वीडियो वायरल हुआ। राजद ने उन पर तंज कसा। उनसे पूछा-क्या अब आप 100% संघी हो गए हैं? मौका, सोमवार को आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति पत्र वितरण का था। मुख्यमंत्री, नियुक्ति पत्र दे रहे थे। एक अल्पसंख्यक महिला चिकित्सक नियुक्ति पत्र लेने आईं। वह हिजाब लगाए थीं। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र देने के क्रम में उनका हिजाब (खींच कर) हटा दिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंगल पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार आदि मौजूद थे। राजद ने हिजाब हटाने का वीडियो अपने सोशल मीडिया साइट पर अपलोड किया। लिखा-”यह क्या हो गया नीतीश जी को? क्या वे अब 100% संघी हो चुके हैं?’ डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक चैनल के अलावा बहुत लोगों ने साइट्स पर इस वीडियो को शेयर किया।

आर्थिक तंगी से सामूहिक आत्महत्या 

जागरण के अनुसार मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र की रूपनट्टी पंचायत के नवलपुर मिश्रौलिया गांव के वार्ड चार में सोमवार तड़के सामूहिक आत्महत्या का मामला सामने आया है। कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान पिता ने पांच बच्चों के साथ फांसी लगा ली। तीन बेटियों समेत पिता की मौत हो गई। फंदा पूरी तरह नहीं कस पाने से बड़ा बेटा बच निकला और उसने छोटे भाई को भी मौत के मुंह से बाहर पुलिस ने जांच की। पूछताछ में सामने आया कि अमरनाथ की पत्नी को ब्याज पर पैसे देने वाले लोग तगादा कर दबाव बना रहे थे। अमरनाथ राम की पत्नी दीपा देवी की बीती फरवरी में मौत हो गई थी। इसके बाद से अमरनाथ मानसिक रूप से परेशान थे। राजमिस्त्री का काम करने वाले अमरनाथ का दहिना हाथ क़रीब छह माह पहले टूट गया। वह काम भी नहीं कर पा रहा था।

फांसी से पहले खाई अंडे की भुजिया

बड़े बेटे ने बताया कि रविवार रात सभी ने साथ बैठकर खाना खाया। खाने में अंडे की भुजिया, आलू सोयाबीन की सब्जी व चावल था। खाना खाकर सभी सोने चले गए। पिता ने करीब चार बजे सभी को जिंदगी जी लिए। यह कहकर सभी को जगाया। कहा, अब हो गया, बहुत चाचा के कमरे में ले गए। वहां मां की तीन साड़ियां लीं। एक फंदा बना दो वहनों के गले में बांधा और एस्बेस्टस में लगे बांस से बांध दिया। फिर एक फंदा खुद और एक बहन को और तीसरे फंदे से हम दोनों भाइयों के गले को बांध दिया। कहा, आंख बंद कर मम्मी को याद कर प्रणाम करो, फिर ट्रंक पर से छलांग लगा दी। दोनों बेटियां व वह खुद एक बेटी के साथ ट्रंक से कूद गया। बड़े बेटे के गले से फंदा ढीला पड़ गया था। छोटे भाई के गले में फंद बंधा था। उसने तुरंत उसे पकड़ा और फंदा खोलकर उतारा।

कोहरे से ट्रेनें और फ्लाइट्स लेट

हिन्दुस्तान ने लिखा है कि ठंड का मौसम शुरू होते ही कोहरे का कहर शुरू हो गया। इससे ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने लगा है। सोमवार को संपूर्ण क्रांति, अमृत भारत, मगध एक्सप्रेस, विक्रमशिला सहित 10 ट्रेनें घंटों देरी से पटना जंक्शन पहुंची। इस कारण रेल मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पटना एयरपोर्ट पर 19 विमानों का सोमवार को परिचालन विलंब से हुआ। वहीं इंडिगो और एयर इंडिया की एक-एक जोड़ी विमान रद्द रहे।

मनरेगा का नाम अब ‘VB-G RAM G’ होगा

भास्कर के अनुसार ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना अब नए नाम और कलेवर में लागू होगी। मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम। केंद्र सरकार ने इसका नया रूप ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025’ यानी ‘VB-G RAM G)’ तैयार कर लिया है, जो इसी शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा। नए ग्रामीण रोजगार कानून का उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। इसमें हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 की जगह 125 दिन मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी मिलेगी। बशर्ते परिवार के व्यस्क सदस्य अकुशल श्रम के लिए तैयार हों। राज्यों को बुवाई और कटाई के पीक सीजन की अवधि बतानी होगी। इस अवधि में नए कानून के तहत कोई काम नहीं कराया जाएगा, ताकि कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध रहें।

पति-पत्नी का लंबे समय तक अलग रहना क्रूरता: सुप्रीम कोर्ट

जागरण के अनुसार अलग रह रहे दंपती की शादी भंग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पति और पत्नी का लंबे समय तक अलग रहना और सुलह की कोई उम्मीद न होना, दोनों पक्षों के लिए क्रूरता के समान है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों से भी कहा कि तलाक के ऐसे मामलों को लंबा न खींचा जाए। न्यायमूर्ति मनमोहन और जोयमाल्या बागची की पीठ ने गौर किया कि आपसी विचार न मिलने की वजह से दंपति दो दशक से एक दूसरे से अलग रह रहा है। दोनों की शादी अगस्त 2000 में हुई और दो साल बाद ही दोनों ने 2003 में तलाक का मुकदमा दायर कर दिया। 

कुछ और सुर्खियां:

  • दरभंगा विधानसभा के लगातार 6 बार से विधायक 56 वर्ष के संजय सरावगी बने भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष
  • दिल्ली में सोमवार को सोना ₹4000 बढ़कर 137600 प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया 
  • आईपीएल में खिलाड़ियों की मिनी नीलामी आज, 10 टीमें 77 जगह को भरने के लिए बोली लगाएंगी 
  • एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल की 
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की अपनी यात्रा के तहत जॉर्डन पहुंचे 

अनछपी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वैसे तो पिछले कई महीनों से अपने अजीबो गरीब हरकत के लिए बदनाम चल रहे हैं लेकिन सोमवार को एक महिला डॉक्टर को ज्वाइनिंग लेटर देते वक्त जिस तरह उन्होंने उसका नकाब चेहरे से खींच लिया वह बेहद शर्मनाक, आपत्तिजनक और निंदनीय है। यह दरअसल छेड़खानी जैसा मामला है जो गुंडे करते हैं। अगर यह मान भी लिया जाए कि नीतीश कुमार का मानसिक संतुलन सही नहीं है तब भी यह घटना ऐसी नहीं है जिसे आसानी से जाने दिया जाए। दिक्कत यह है कि अगर कोई व्यक्ति मानसिक रूप से असंतुलित हो तो उससे ऐसी घटना के लिए गलती और माफी मांगने के लिए कहना भी बेकार साबित होता है। लेकिन इससे ज़्यादा अफसोसनाक बात यह भी है कि नीतीश कुमार की इस शर्मनाक हरकत को इस देश की सांप्रदायिक शक्तियां न केवल सपोर्ट कर रही हैं बल्कि ऐसी बातें लिख रही हैं जो पूरी तरह उकसाने वाली हैं। साफ तौर पर यह बैड टच और उससे भी बुरी हरकत है लेकिन बहुत से बेशर्म लोग ऐसे भी हैं जो दलील दे रहे कि नीतीश कुमार पिता समान हैं। होंगे पिता समान, लेकिन उन्हें भी यह अधिकार नहीं किसी महिला के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाएं और उसके कपड़ों से ऐसी हरकत करें। कुछ घटिया लोग कह रहे कि यह पर्दा प्रथा हटाने का नीतीश का अच्छा कदम है। यह लोग बेहद घटिया दलील दे रहे जो किसी लोकतांत्रिक माहौल में किसी भी तरह सही नहीं मानी जाएगी। ऐसी हरकतों पर शब्दों का संयम रखना बहुत मुश्किल हो जाता है। कोई और देश रहता तो नीतीश कुमार अब तक मुख्यमंत्री नहीं, जेल में रहते। आख़िर में यह सवाल ज़रूर पूछा जाना चाहिए कि क्या नीतीश कुमार की इस हरकत के लिए कोई एफआईआर नहीं हो सकती, अदालत में कोई मुकदमा नहीं हो सकता? 

 238 total views

Share Now