छपी-अनछपी: होर्मुज़ पर ट्रंप को ‘अपनों’ का साथ नहीं, तेजस्वी के ‘अपने’ ही बने बीजेपी की बी टीम
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को होर्मुज स्ट्रेट में उनके अपने माने जाने वालों ने साथ नहीं दिया। इधर तेजस्वी के कुछ अपने और सहयोगी कांग्रेस के विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में साथ नहीं दिया और बीजेपी की बी टीम साबित हुए। ओडिशा के एक अस्पताल में आग लगने से 10 मरीजों की मौत हो गई।
और जानिएगा कि अमेरिका के एक संगठन ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को गंभीर बताते हुए आरएसएस पर पाबंदी की सिफारिश की है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में गहराते वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक मोर्चे पर अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं। इस मार्ग को सुरक्षित करने के लिए ट्रंप ने जिन ‘मित्र देशों’ से सैन्य मदद और युद्धपोत भेजने की अपील की थी, उन्होंने एक सुर में इसे ठुकरा दिया है। जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों ने यह हमारा युद्ध नहीं है कहकर हाथ पीछे खींच लिए हैं, तो ब्रिटेन और जापान ने भी किसी भी सैन्य टकराव में फंसने से साफ इनकार कर दिया। ऑस्ट्रेलिया ने भी युद्धपोत भेजने से इनकार किया है। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने समीक्षा के बाद निर्णय की बात कही है।
ईरान ने दुबई हवाई अड्डे पर हमला किया
जंग के 17वें दिन ईरान ने दुबई हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला किया। इससे वहां आग लग गई और उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दूसरी ओर, अमेरिका ने कथित तौर पर चाबहार के पास ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसराइली वायुसेना ने तेहरान में मेहराबाद हवाई अड्डे पर एक विमान को उड़ा दिया। दावा किया कि इसका इस्तेमाल खामेनेई करते थे। बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकाने भी तबाह करने का दावा किया।
नुकसान का पाई पाई वसूलेंगे: ख़ामेनई
जागरण के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक बार फिर कहा है हमें हुए नुकसान की पाई-पाई की भरपाई दुश्मन से कराई जाएगी। आइएएनएस के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर के आधिकारिक टेलीग्राम संदेश में कहा गया कि यदि विरोधी पक्ष क्षतिपूर्ति देने से इन्कार करता है तो ईरान उसकी उतनी संपत्ति अपने नियंत्रण में लेगा, जितनी वह उचित समझेगा, और यदि यह संभव नहीं हुआ तो बराबर नुकसान पहुंचाया जाएगा। इससे पहले देश के नाम अपने पहले संदेश में मोजतबा ने देश में प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया था और कहा था कि होर्मुज जलमार्ग को दुश्मन के लिए बंद रखने की रणनीति कायम रहेगी। लिखित संदेश में उन्होंने कहा ‘कि तेहरान संघर्ष में मारे गए लोगों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान शांतिवार्ता के लिए छटपटा रहा है और ये युद्ध ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में खत्म हो सकता है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए और जब तक संभव हो सकेगा, लड़ाई लड़ी जाएगी।
तेजस्वी के अपने बने बीजेपी की बी टीम, राज्यसभा चुनाव हारा आरजेडी
बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने क्लीन स्वीप करते हुए पांचों सीटों पर जीत दर्ज की है. इस चुनाव में न केवल आंकड़ों का खेल चला, बल्कि महागठबंधन के भीतर की दरार भी उजागर हो गयी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवार विजयी घोषित किये गये, जबकि महागठबंधन के अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा. एनडीए की इस बड़ी जीत के पीछे दो मुख्य कारण रहे. पहला विपक्ष के चार सदस्यों की गैरहाजिरी. मतदान के दौरान महागठबंधन के चार विधायक सदन से गायब रहे. राजद के फैसल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायकों सुरेंद्र कुशवाहा, मनोहर प्रसाद सिंह और मनोज विश्वास के अनुपस्थित रहने से अमरेंद्र धारी सिंह का वोट बैंक कमजोर पड़ गया।
बीजेपी की बी टीम की दलील
पूर्वी चंपारण के ढाका से राजद के विधायक फैसल रहमान का अपना कोई बयान सामने नहीं आया लेकिन उनके करीबियों ने दलील दी कि उनकी मां बीमार थी इसलिए वह वोट देने नहीं आए। दूसरी तरफ यह कहा जा रहा है कि फैसल रहमान मर्डर के एक मामले में फंसे हुए हैं और कम वोटों से जीत का मामला भी अदालत में है, इसलिए सरकार से हमदर्दी लेने के लिए उन्होंने बीजेपी का साथ दिया। सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के बारे में यह समझा जाता है कि उन्होंने अपने पुराने नेता उपेंद्र कुशवाहा के लिए काम किया और वोटिंग नहीं की हालांकि उन्होंने यह दलील दी की महा गठबंधन के उम्मीदवार से वह खुश नहीं थे। मनोज विश्वास के बारे में समझा जाता है कि वह बीजेपी से नजदीकी चाहते हैं इसीलिए उन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उनकी दलील यह है कि पार्टी के विधायकों को सम्मान नहीं मिला इसलिए उन्होंने वोट नहीं दिया। मनोहर की दलील थी कि उम्मीदवार दलित, अल्पसंख्यक या ओबीसी कोटे से नहीं था इसलिए उन्होंने वोट नहीं दिया।
ओडिशा के अस्पताल में आग, दस मरीजों की जलने से मौत
भास्कर के अनुसार कटक के सरकारी एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आईसीयू में सोमवार तड़के करीब 2:30 बजे लगी भीषण आग में 10 मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल के 11 कर्मचारी भी झुलसे हैं। 5 घायल गंभीर हैं। ट्रॉमा केयर आईसीयू, आईसीयू और वार्ड में 23 मरीज थे। अस्पताल पहुंचे सीएम मोहन चरण मांझी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए। आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने घटना पर दुख जताया है।
अमेरिका की संस्था ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को गंभीर बताया
भारत सरकार ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) की ताजा रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को ”पक्षपातपूर्ण” करार देते हुए कहा है कि यह तथ्यों के बजाय एजेंडे पर आधारित है। यूएससीआइआरएफ ने अपनी रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को गंभीर बताते हुए कई विवादास्पद सिफारिशें की हैं। इसने भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश” के रूप में नामित करने का सुझाव दिया। धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आरएसएस और रा जैसी संस्थाओं तथा विशिष्ट व्यक्तियों पर “लक्षित प्रतिबंध” लगाने की बात भी कही। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि अमेरिका को भारत के साथ सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़ना चाहिए।
कुछ और सुर्खियां:
- पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव और गृह सचिव के बाद चुनाव आयोग ने डीजीपी और कोलकाता पुलिस के कमिश्नर को भी हटाया
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की 144 नाम की पहली सूची जारी, ममता बनर्जी के सामने होंगे सुवेंदु अधिकारी
- यूएई में युद्ध के बारे में भ्रामक वीडियो फैलाने के आरोप में 19 भारतीय गिरफ्तार
- हिंदी में ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादमी अवार्ड मिला
- सरकार का दावा- हड़ताल कर रहे रेवेन्यू सर्विस के 300 सीओ और आरओ काम पर लौटे
- वन बैटल आफ्टर अनदर को छह ऑस्कर मिले, माइकल बी जॉर्डन बेस्ट एक्टर
अनछपी: राजद नेता तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार के हारने के बाद चावल कपट की चाहे जितनी शिकायत करें, इससे कोई फायदा नहीं होने वाला क्योंकि इस मामले में फरियाद से नहीं बल्कि इसका मुकाबला करने और उससे लड़ने में ही फायदा होता है। तेजस्वी यादव को इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी इस बात का पता लग गया था कि कैसे उनके ही घर में सेंध लगाकर भारतीय जनता पार्टी की साम, दाम, दंड, भेद की राजनीति कामयाब हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीति का धुरंधर इसीलिए माना जाता है कि वह विपक्षी दलों के एमएलए या एमपी को तोड़ सकें, चाहे इसके लिए उन पर लालच देने का इल्जाम लगे या किसी केस में फंसाने का डर दिखाने का इल्जाम हो। तेजस्वी यादव को उन आरोपों के बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए जो जीतन राम मांझी लग रहे हैं। जीतन राम मांझी का कहना है कि जब पैसा देकर टिकट दीजिएगा तो लोग फोन ऑफ कर ही लेंगे। राजद के अलावा कांग्रेस पर भी यह आरोप लगता रहा है कि वहां टिकट बेचे जाते हैं, और जीतने के बाद उम्मीदवार अपने उन पैसों को, चाहे वह जहां से भी मिले, वापस पाना चाहते हैं। टिकट बेचने का आरोप उन पार्टियों पर भी लग सकता है जो सरकार में हैं, लेकिन फर्क यह है कि सरकार में रहने वाले एमएलए-एमपी के पास अपने पैसे वसूलने के दूसरे साधन भी आ जाते हैं। राजनीति को पैसों का खेल मानने में अब किसी को हिचक नहीं होनी चाहिए। राजनीति में नीति सिद्धांत की बात तभी अच्छी मानी जाती है जब आप जीत कर आते हैं। हारने वालों की ऐसी बात पर कोई ध्यान नहीं देता। यह कहा जा सकता है कि तेजस्वी ने विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों से मिले धोखे के बाद उन पर कार्रवाई करवाने के लिए कोई बहुत गंभीर कोशिश नहीं की। इसलिए उन बागी विधायकों की सदस्यता बची रही जबकि उन पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती थी। इस फरियाद को कोई नहीं सुनेगा कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी बात नहीं सुनी बल्कि उन्हें तो इसे अदालत ले जाना चाहिए। फैसला हक में ना आता तब भी कम से कम यह तो कहा जा सकता था कि उन्होंने कोशिश की। बहरहाल तेजस्वी यादव को अपनी राजनीति को और धार देनी चाहिए और छल कपट से निपटने के तरीके भी ढूंढने चाहिए।
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