छपी-अनछपी: ईरान जंग से हटने को ट्रंप की छटपटाहट, सभी धार्मिक स्थलों की होगी सुरक्षा ऑडिट

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान पर अमेरिका और इसरायल के हमले का कोई नतीजा नहीं देखा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस जंग से निकलने के लिए छटपटा रहे हैं। बिहार के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा आडिट कराने का निर्णय लिया गया है।

और, जानिएगा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसे सबसे बड़ा मुकदमेबाज़ कहा है।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार ईरान के विरुद्ध युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिका प्रारंभ से ही भ्रमित दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान भी लगातार बदल रहे हैं। कभी वह कहते हैं कि लक्ष्य पूरे होने तक अमेरिका युद्ध से नहीं हटेगा और कभी कहते हैं कि युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। अब ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना दो दो से तीन सप्ताह में ईरान के विरुद्ध अपना अभियान खत्म कर सकती है और अमेरिका बिना डील किए ही इस युद्ध से निकल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी उन देशों की है जो तेल और नौवहन के लिए इस पर निर्भर हैं। होर्मुज को सुरक्षित करने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर उन्होंने नाटो को डरपोक करार दिया और नाटो छोड़ने के साथ-साथ यूक्रेन को हथियार देना बंद करने की धमकी दी। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज को अवरुद्ध करना बंद करें अन्यथा अमेरिका बमबारी करके उसे वापस पाषाण युग में भेज देगा।

ब्रिटेन बोला- ईरान युद्ध हमारा नहीं

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने बुधवार को कहा कि ईरान युद्ध ब्रिटेन का नहीं है और ब्रिटेन इसमें शामिल नहीं होगा क्योंकि यह राष्ट्र‌हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान में चल रहा संघर्ष देश के भविष्य पर असर डालेगा और उनका देश इसके आर्थिक नतीजों को झेलने के लिए तैयार है।

अमेज़न दफ्तर पर ईरान का हमला

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी के ठीक एक दिन बाद ईरान ने बुधवार को अमेजन पर हमला किया। बहरीन में कंपनी के क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर पर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जिसके बाद भीषण आग लग गई। यह इस क्षेत्र में कंपनी का पहला सेंटर था। ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में चार बड़े हमलों का दावा किया जिसमें फारस की खाड़ी में जहाजों को निशाना बनाने के साथ अमेरिकी मरीन के ठिकाने पर ड्रोन दागे गए। कुवैत में जाबेर अल-अहमद नाम के अमेरिकी ठिकाने पर स्थित दो त्वरित चेतावनी रडार पर ईरान ने ड्रोन हमले का दावा किया। इससे पहले मंगलवार देर रात इसरायली सेना ने ईरान सरकार को फेंटालिन की आपूर्ति करने वाली फैक्टरी पर हमला किया था। ईरान ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कंपनी सिर्फ अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवा की आपूर्ति करती थी।

जंग का असर: केला किसानों को घाटा

भास्कर के अनुसार महाराष्ट्र का जलगांव भारत का दूसरा सबसे ज्यादा केला पैदा करने वाला राज्य है। यहां से रोज औसतन 2 से 3 हजार टन जीआई टैग वाला प्रीमियम क्वालिटी का केला खाड़ी देश और यूरोप में निर्यात होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने 90% निर्यात ठप कर दिया है। करीब 800 टन कंटेनर किसी न किसी बंदरगाह पर फंसे हैं। एक कंटेनर में लगभग 20 टन केला आता है। इस हिसाब से करीब 16 हजार टन केला खराब हो रहा है। इस वजह से केले पर निर्भर जिले के करीब 2 लाख किसान मुश्किल में हैं। उन्हें केला घरेलू मंडियों में डंप करना पड़ रहा है। इस वजह से केले के दाम जमीन पर आ गए हैं। दो महीने पहले तक 1600 रु. प्रति क्विंटल बिकने वाला केला अब 400 से 500 रु. में बिक रहा है। किसान जानवरों को केला खिला रहे हैं।

सभी धार्मिक स्थलों की होगी सुरक्षा ऑडिट

जागरण के अनुसार बिहारशरीफ के शीतला मंदिर में दम घुटने से हुई आठ लोगों की मौत के बाद राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा आडिट कराने का निर्णय लिया गया है। डीजीपी विनय कुमार ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय मैं सभी क्षेत्रीय आइजी, डीआइजी, एसएसपी और एसपी के साथ की गई वीडियो कान्फ्रेंसिंग में इससे जुड़ा दिशा-निर्देश दिया है। डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने जिलों में मंदिर समेत सभी धार्मिक स्थलों को चिह्नित करें जहां अधिक भीड़ होती है। इसके बाद इन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का आडिट किया जाए। इसमें यह आकलन किया जाएगा कि धार्मिक स्थल पर कितनी भीड़ जुटती है, उसके अनुसार प्रवेश एवं निकास द्वार की व्यवस्था है या नहीं। आगजनी, भगदड़ या अन्य आपात स्थिति से निबटने के क्या इंतजाम हैं। श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध कर दर्शन कराने और विशेष अक्सरों पर उमड़ने वाली भीड़ के लिए होल्डिंग एरिया की व्यवस्था की गई है या नहीं।

मंदिर हादसा: पंडा कमेटी के चार सदस्यों को गिरफ्तार

प्रभात ख़बर के अनुसार नालंदा के मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में पंडा कमेटी के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, दर्ज एफआइआर में 20 नामजद और कई अज्ञात शामिल हैं. जिन पुजारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनमें निरंजन कुमार, अनुज पांडेय, मिथिलेश पंडित और विवेकानंद शामिल हैं. आरोप है कि पुजारी पैसे लेकर लोगों को पीछे के दरवाजे से दर्शन कराने में लगे थे. इसी के चलते भीड़ बढ़ी और यह भयावह हादसा हो गया. इससे पहले लापरवाही के आरोप में दीपनगर थाना अध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था. घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है. एसपी भारत सोनी ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) में 20 नामजद समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गयी है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही है. जांच में तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने किसे सबसे बड़ा मुकदमेबाज़?

हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को सबसे बड़ा मुकदमेबाज कहा। कोर्ट ने कहा कि इन वजह से ही अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ता है। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। केंद्र ने हाईकोर्ट के एक फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक अधिकारी को नौकरी से हटाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया था, 25% बकाया वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया था। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने सरकार की अपील खारिज कर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, हमारी समझ में यह नहीं आ रहा कि केंद्र ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती क्यों दी है।

कुछ और सुर्खियां:

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जेड प्लस कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली
  • 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 217 रुपए बढ़ी
  • 14 अप्रैल को आ सकता है सीबीएसई 10वीं बोर्ड का रिजल्ट
  • नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन 1187 अंक चढ़ा सेंसेक्स

अनछपी: बिहार में सड़क हादसे और बिजली के झटके से होने वाले मौत की तरह ही धार्मिक स्थलों पर भगदड़ मचने के बाद होने वाली मौतों पर बहुत देर तक चिंता कायम नहीं रहती है। आम आदमी की समझ यह है कि ऐसे मामलों की जांच वगैरह की घोषणा तो कर दी जाती है लेकिन सरकार और अफसरशाही चाहती है कि इसे किसी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए। सरकार के साथ समाज में भी इस बारे में बहुत ज्यादा चर्चा नहीं होती, इसलिए पुलिस-प्रशासन वाले अक्सर अपनी नाकामी और लापरवाही को छिपाने में कामयाब हो जाते हैं। नालंदा जिले के मघड़ा में मंदिर में भगदड़ मछली के बाद कुछ पुलिस वालों को सस्पेंड किया गया है और मंदिर का प्रबंध देखने वालों को गिरफ्तार किया गया है। ऊपरी तौर पर यह अच्छी कार्यवाही लग सकती है लेकिन असली सवाल यह है कि इतनी भीड़ जमा होने के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस ने क्या तैयारी की थी? सरकार और प्रशासन का यह कहना बेतुका है कि इस मामले को केवल मंदिर प्रबंधन देख रहा था। अगर सरकार यह कहती है कि उसे इस बात की जानकारी थी कि वहां भीड़ जमा होगी तो उसने भीड़ प्रबंधन और नियंत्रण के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? और अगर सरकार का यह कहना है कि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था तो फिर वह प्रशासन चलाने लायक नहीं। इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है उसकी बिल्कुल चर्चा नहीं हो रही है और वह हैं बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी। वैसे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भी जब गिरी विभाग था तब भी ऐसी समस्याएं होती रही हैं लेकिन नई सरकार में जब गृह विभाग सम्राट चौधरी को दिया गया है तो उसके बाद ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनसे यह लगता है कि शासन प्रशासन ने उसे रोकने की कोई तैयारी नहीं की थी। यह बात भी जिक्र करने लायक है कि जिस दिन मगरा की घटना हुई उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोग्राम पास ही में नालंदा यूनिवर्सिटी में था। होना तो यह चाहिए था कि इस दौरे के मध्य नजर सतर्कता और बढ़ाई जाती लेकिन लोगों का कहना है कि पुलिस वालों का पूरा ध्यान केवल उस दौरे पर था और मघड़ा पहुंची महिलाओं को बेमौत मरने के लिए छोड़ दिया गया था। इससे बस यही एक बात साबित होती है कि बिहार की आम जनता के जीवन की कोई कीमत नहीं है।

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