छ्पी-अनछ्पी: क्या NEET मामले की सीबीआई जांच होगी? अब अरुंधति पर UAPA

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दी गई है कि मेडिकल दाखिला इम्तिहान नीट की सीबीआई जांच हो। सुप्रीम कोर्ट ने अभी सीबीआई जांच की मांग से इनकार किया लेकिन इस मामले में सरकार और एनटीए को नोटिस जारी किया है। इस खबर को सभी अखबारों ने प्रमुखता दी है। स्वतंत्र विचारों के लिए प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय पर गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा चलेगा। इस खबर को अधिक तवज्जो नहीं मिल सकी है। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता में इजाफा किया है।

जागरण की सबसे बड़ी खबर है कि मेडिकल के स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश की राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट यूजी में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक की सीबीआई जांच करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, सीबीआई, केंद्र व बिहार सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि इस संदर्भ में एकतरफा फैसला नहीं किया जा सकता। इसके अलावा कोर्ट ने नीट के संबंध में विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित कर एक साथ सुनवाई करने की मांग वाली एनटीए की याचिका पर भी नोटिस जारी किया है। इधर कांग्रेस ने मांग की है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निगरानी में की जाए।

ईओयू ने नौ परीक्षार्थियों को दिया नोटिस

बिहार में नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराधी इकाई (ईओयू) ने नौ परीक्षार्थियों को नोटिस भेजा है। यह सभी नीट परीक्षार्थी बिहार के अलग-अलग जिलों के हैं। सभी को अभिभावकों के साथ पूछताछ के लिए ईओयू कार्यालय बुलाया गया है। डीजीपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि एनटीए से मिली जानकारी के आधार पर नीट के 9 परीक्षार्थियों को नोटिस भेजा गया है। सॉल्वर गिरोह के पास इन सभी के रोल कोड मिले थे। इस मामले मैं भास्कर ने सवाल उठाया है कि 1000 किलोमीटर दूर मनचाहा सेंटर कैसे दिया गया और लीक पेपर से मिलने के लिए मूल पर्चा क्यों नहीं दे रही एनटीए।

अरुंधति पर यूएपीए

हिन्दुस्तान में एक छोटी सी खबर है कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अरुंधति रॉय और कश्मीर के केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी है। 29 नवंबर 2010 को दिल्ली पुलिस ने इस घटना को लेकर अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज की थी।

अरुंधति रॉय और डॉ. शेख शौकत हुसैन ने 21 अक्तूबर 2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम में ‘आजादी-द ओनली वे’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर उत्तेजक और भारत विरोधी भाषण दिए थे।

मकान किराया भत्ता बढ़ा

हिन्दुस्तान, जागरण और प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर बिहार कैबिनेट के फैसले की है। राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता में चार फ़ीसद तक वृद्धि करने पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। नए मकान किराया भत्ता के अनुसार पटना शहर में रहने वाले कर्मियों को मूल वेतन का 20% जबकि अन्य शहरों में रहने वाले कर्मियों को मूल वेतन का 10% मकान किराया भत्ता मिलेगा। अवर्गीकृत शहरों के कर्मियों को 7.5 प्रतिशत तो ग्रामीण क्षेत्र के कर्मियों को 5% की दर से मकान किराया भत्ता मिलेगा। कैबिनेट की बैठक में टोला सेवक और तालीमी मरकज के मानदेय के लिए 774 करोड़ रुपए जारी किए गए।

आरएसएस-भाजपा में ‘मतभेद’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने साफ किया है कि लोकसभा चुनावों एवं अन्य किसी मुद्दे पर उसके और भाजपा के बीच कोई मतभेद नहीं है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संघ के तृतीय वर्ष के शिक्षा वर्ग के समापन पर स्वयंसेवकों को सेवा कार्य में अहंकार से बचने का आह्वान किया था, न कि किसी दल या राजनेता के लिए। इसके साथ ही संघ ने अपने वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के बयान को भी निजी करार दिया है। हालांकि संघ ने माना है कि इस बार के चुनाव में कटुता बढ़ी है।

कुछ और सुर्खियां

  • अमेरिका टी 20 वर्ल्ड कप के सुपर 8 में, बारिश से आयरलैंड के साथ मैच रद्द होने के बाद पाकिस्तान बाहर
  • जन सुराज के प्रमुख पीके का बयान- सीएम बने रहने के लिए नीतीश ने मोदी के पैर छुए
  • रुपौली उपचुनाव में जेडीयू के कलाधर मंडल बने एनडीए के उम्मीदवार
  • रुपौली उपचुनाव चुनाव के लिए राजद और सीआईआई में रार
  • मनरेगा में जॉब नहीं तो 100 दिन तक सरकार देगी बेरोजगारी भत्ता
  • सांसद चुने जाने के बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया
  • बिहार में न्याय मित्र, कचहरी सचिव के 3630 पदों पर दो माह में बहाली
  • गया की खनिज विकास पदाधिकारी निधि भारती को सस्पेंड किया गया

अनछपी: प्रसिद्ध लेखिका और अपने स्वतंत्र विचारों के लिए मशहूर अरुंधति राय पर जब यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की खबर आई तो कई लोगों ने यह प्रतिक्रिया दी कि कम सीटें आने के कारण भाजपा की नई सरकार में बदलाव आएगा, ऐसा सोचना गलतफहमी है। इस बारे में किसी के मन में भी यह सवाल पैदा हो सकता है कि आखिर सरकार ने 14 साल के बाद अरुंधति राय और एक पूर्व प्रोफ़ेसर पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने का फैसला क्यों लिया? भारत में बहुत से आम लोगों को यह बात समझ में नहीं आती कि यूएपीए के तहत मुकदमा चलाना इतना खतरनाक क्यों माना जाता है। इसके तहत मुकदमा चलाने का मतलब है कि दो साल और उससे भी ज्यादा समय तक बिना सुनवाई के पकड़े गए व्यक्ति को जेल में रखा जा सकता है। अफसोस की बात है कि यह कानून तो गैर कानूनी गतिविधियों के तहत आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था लेकिन यह उन लोगों पर भी लागू किया जाता है जो सरकार के खिलाफ अपने विचारों को सरेआम प्रकट करते हैं। इस कानून ने इस भेद को मिटा दिया है कि कौन सा बयान सरकार के खिलाफ है और कौन सा बयान देश के खिलाफ है। अभी की सरकार के बारे में यह शिकायत है कि जब इसकी आलोचना होती है तो वह उसे देश की आलोचना बनाकर आलोचना करने वाले को जेल में डाल देती है। कश्मीर का मामला भारत के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है और अरुंधति राय इस बारे में ऐसे विचार रखती हैं जो सरकार को सिरे से ना पसंद है। मगर क्या किसी को ऐसी राय के लिए किसी आतंकवादी पर लागू होने वाले कानून के तहत जेल में डाला जा सकता है? यह बात बहुत विचित्र मालूम होती है कि सरकार ने अरुंधति राय पर इटानसाल बाद क्यों यूएपीए लगाने का फैसला किया? बहुत से लोग मानते हैं कि अरुंधति राय दरअसल इस सरकार की प्रखर आलोचक रही हैं, और उन्हें चुप कराने व उनसे बदला लेने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। बेहतर होता कि सरकार इतने समय बाद यूएपीए लागू करने की वजह भी बताती। वास्तव में यूएपीए कानून मानव अधिकार उल्लंघन के लिए एक हथियार बन चुका है और सरकार इसका मनमानी तरीके से इस्तेमाल कर रही है। कई लोगों को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट को इस कानून को संविधान में दिए गए मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाला घोषित कर देना चाहिए।

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