छपी-अनछ्पी: गुजरात और हरियाणा में भी ‘नीट’ में हुआ खेला, बिहार में लगेंगी 88 नई इंडस्ट्री

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मेडिकल दाखिला इम्तिहान नीट पर सवालों का दौर जारी है और इसमें हरियाणा और गुजरात में भी खेल होने की बात सामने आई है। बिहार में 88 नई इंडस्ट्री लगाने की मंजूरी दी गई है। इंडिया गठबंधन ने मांग की है कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद उसे दिया जाए।

जागरण की सबसे बड़ी सुर्खी है: पटना व गोधरा की घटनाओं से एनडीए पर सवाल। बिहार, गुजरात और हरियाणा में नीट से जुड़ी कुछ घटनाओं ने एनटीए पर सवाल खड़ा कर दिया है। इनमें नीट के दौरान पेपर लीक सहित छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचाने की घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर चुप्पी से संदेह बढ़ता जा रहा है। गुजरात के गोधरा में एक केंद्र पर पैसा लेकर छात्रों को नीट में पास कराने की घटना सामने आई है। हालांकि स्थानीय प्रशासन को परीक्षा से ठीक पहले ही इसकी जानकारी मिल गई और कोचिंग संचालक स्कूल के प्रिंसिपल आदि को पकड़ लिया गया। हरियाणा के झज्जर से एक परीक्षा केंद्र पर नीट के दौरान गलत पेपर खुलने और छात्रों के समय का नुकसान होने की जानकारी एनटीए की ओर से दी जा रही है। इसकी भरपाई में ग्रेस मार्क्स दिए गए। हालांकि छात्रों के विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में एक और केस

प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर है कि शनिवार को नीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई। 20 छात्रों द्वारा दायर इस याचिका में पूरी नीट यूजी 2024 को रद्द करने, अनियमितताओं की जांच सीबीआई या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने तथा 620 से अधिक अंक पाने वाले छात्रों की अकादमिक और फोरेंसिक जांच कराने के आदेश देने की मांग की गई है।

बिहार में 916 करोड़ से लगेगी इंडस्ट्री

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है कि राज्य में 88 नई औद्योगिक इकाइयां लगेंगी। इससे 916 करोड़ रुपये का निवेश होगा। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद की बैठक में इन इकाइयों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इन इकाइयों के लगने से करीब छह हजार कामगारों को रोजगार मिलने का अनुमान है। जिन इकाइयों को मंजूरी मिली है उसमें दो करोड़ रुपये से कम लागत वाली 37 और दो करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 51 इकाइयां हैं। 37 इकाइयों में 36 करोड़ 22 लाख रुपये का पूंजी निवेश होगा। वहीं, 51 इकाइयों में 880 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा। विकास आयुक्त चैतन्य प्रसाद की अध्यक्षता में 7 जून को राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद की बैठक हुई। बैठक में वित्तीय प्रोत्साहन क्लियरेंस के लिए आए 65 अन्य प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है।

विपक्ष मांग रहा डिप्टी स्पीकर का पद

लोकसभा में संख्याबल बढ़ने से उत्साहित विपक्ष इस बार डिप्टी स्पीकर पद की मांग करेगा। अगर विपक्ष की मांग पर सत्ता पक्ष राजी नहीं होता है तो लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए भी विपक्ष उम्मीदवार उतार सकता है। विपक्ष से जुड़े सूत्रों ने यह संकेत दिए हैं। विपक्ष चाहता है कि इस बार संसदीय परंपरा का सम्मान करते हुए सरकार डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दे।

अग्निवीर में 50% हो सकते हैं परमानेंट

भास्कर के अनुसार सैनिकों की सीधी भर्ती की जगह अग्निपथ योजना से फौजी लेने की व्यवस्था लागू होने के 2 साल बाद अब इसमें बदलाव का एजेंडा बन रहा है। सैन्य मामलों के विभाग ने 24 महीने के अनुभव पर तीनों सेनाओं में सर्वे कराया है। इसके आधार पर बदलाव के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है। सबसे अहम प्रस्ताव अग्निवीरों को स्थाई सेवा में लेने का कोटा बढ़ाने का है। फिलहाल 25% अग्निवीर 4 साल की सेवा के बाद फौज में शामिल हो सकते हैं। इसे बढ़ाकर 50% तक किया जा सकता है और टेक्निकल सेवाओं में यह 75% तक हो सकता है।

एक्सिस बैंक से 19 लाख की लूट

हिन्दुस्तान के अनुसार पटना ज़िले के बिहटा के देवकुली स्थित एक्सिस बैंक में शनिवार को दिनदहाड़े चार नकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने छह ग्राहकों समेत 15 बैंककर्मियों को बंधक बनाकर 19.36 लाख रुपये लूट लिए। छह मिनट में घटना को अंजाम देकर बदमाश हथियार लहराते हुये फरार हो गये। सिटी एसपी अभिनव धीमान के मुताबिक पुलिस लुटेरों की तलाश में छापेमारी कर रही है। घटना शनिवार सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर हुई। दो बाइक पर सवार होकर पहुंचे बदमाश सीधे एक्सिस बैंक में दाखिल हुए और हथियार का भय दिखाकर सभी को एक तरफ कर दिया। उस वक्त वहां गार्ड भी था। लेकिन अपराधियों ने उसपर भी पिस्टल तान दी।

कुछ और सुर्खियां

  • बिहार में गर्मी से 13 लोगों की मौत, मानसून 20 जून तक पहुंचने का अनुमान
  • उत्तराखंड में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर अलकनंदा नदी में गिरा टेंपो ट्रैवलर, 14 लोगों की मौत
  • पश्चिम चंपारण के गौनाहा में बालू तस्करों ने दारोगा की दो अंगुली काटी
  • बिहार के डॉक्टर नारायण और रिंकी झा को साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मेदांता अस्पताल में रूटीन जांच कराई, हड्डी के दर्द की परेशानी
  • पूर्व विधायक शंकर सिंह ने लोजपा (आर) से इस्तीफा दिया, रुपौली से निर्दलीय लड़ेंगे
  • पूरे बिहार में रेरा करेगा बिल्डर और परियोजनाओं की रैंकिंग

अनछ्पी: बहुत दिनों के बाद बिहार से एक अच्छी खबर यह आई है कि 28 जिलों में 916 करोड़ रुपए की लागत से 88 नई इंडस्ट्री लगाई जाएगी। पैसे के लिहाज से देखा जाए तो यह कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है लेकिन जहां इंडस्ट्री में कुछ भी होने की खबर ना आती हो वहां से ऐसी खबर भी आती है तो खुशी होती है। इन 28 औद्योगिक इकाइयों में 37 ऐसी हैं जहां 2 करोड़  रुपए से कम की लागत है और 51 ऐसी औद्योगिक इकाइयां हैं जहां 2 करोड़ से अधिक की लागत है। जिन क्षेत्रों की इंडस्ट्री लगाई जा रही है उनमें फूड प्रोसेसिंग, कंस्ट्रक्शन, प्लास्टिक और रबर, चमड़ा और वस्त्र उद्योग, आईटी इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और स्वास्थ्य वगैरह शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि इससे 6000 लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अब देखने की बात यह होगी कि जिन लोगों ने निवेश का वादा किया है क्या वह अपनी इंडस्ट्री लगते हैं या यह सिर्फ कागजी बात रह जाती है। सरकार अगर ऐसे मौक़ों पर यह भी बताए कि इस समय बिहार में कौन-कौन सी बड़ी इंडस्ट्री काम कर रही है और पिछले कुछ वर्षों में जिन लोगों ने उद्योग लगाने का वादा किया था उनका क्या हुआ, तो बेहतर होगा। इंडस्ट्री के लिहाज से गुजरात और अन्य राज्यों की तुलना में बिहार अभी बहुत पीछे चल रहा है और 916 करोड़ के लिए कुल 88 इंडस्ट्री की बात सोचकर यह समझ में आता है कि अभी बड़े उद्योग यहां नहीं लग रहे। कई लोग कह सकते हैं कि 916 करोड़ की रकम तो एक ही इंडस्ट्री के लिए काफी होती है। इसलिए बिहार में उद्योग लगाने और निवेश बढ़ाने की कोशिशों को और तेज करने की जरूरत है। पहले यह कहा जाता था कि बिहार में कानून व्यवस्था अच्छी नहीं है इसलिए लोग उद्योग नहीं लगाना चाहते लेकिन इसके बारे में भी विचार होना चाहिए कि कानून व्यवस्था अच्छी होने के बावजूद इतनी कम संख्या में और इतने छोटे पैमाने पर इंडस्ट्री क्यों लग रही है। फिलहाल जो छोटे उद्योग लग रहे हैं सरकार की कोशिश यह होने चाहिए कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत ना हो और उनके लिए जो सुविधाएं दी जा सकती हों वह जरूर दी जाएं। इत्तेफाक की बात है कि इस समय केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी बने हैं। वह चाहें तो बिहार में छोटे और मझोले साइज के उद्योगों के बढ़ावा देने के लिए जोरदार काम कर सकते हैं। कोशिश होनी चाहिए कि बिहार में छोटे और मझोले उद्योग तो फले-फूलें ही, साथ ही साथ ही बड़े उद्योग लगाने का माहौल भी तैयार हो।

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