छ्पी-अनछपी: वक़्फ़ बिल के खिलाफ 232 वोट-फिर भी पास, ट्रंप ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विवादास्पद वक़्फ़ संशोधन बिल बुध को लोकसभा से पास हो गया हालांकि इसके खिलाफ 232 वोट पड़े लेकिन नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी की मदद की तो इसके पक्ष में 288 वोट पड़े। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया।
और, जानिएगा कि टैरिफ वॉर से कैसे भारत में अमेरिका से आने वाला सेब और पिस्ता सस्ता होगा।
जागरण के अनुसार सरकार और विपक्ष के बीच गरमा गरम बहस के बाद वक़्फ़ संशोधन बिल बुधवार को लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक के समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। विधेयक पारित करने के लिए सदन आधी रात के बाद भी बैठा रहा। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून को मुसलमानों पर हमला बताते हुए विधेयक की प्रति फाड़ दी। विपक्ष द्वारा विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताए जाने सहित सरकार ने एक एक आपत्तियों का जवाब दिया। सरकार ने मुसलमानों को आश्वस्त किया कि यह बिल उनकी मस्जिद और दरगाह और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं है बल्कि संपत्तियों के नियमन और प्रबंधन के लिए लाया गया है। वक़्फ़ संशोधन विधेयक को असंवैधानिक बताने के लिए विपक्षी दलों को की आलोचना करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक़्फ़ संपत्ति से संबंधित कानून दशकों से अस्तित्व में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब यह चोरी नहीं चलेगी। संशोधित वक़्फ़ कानून को नहीं मानने का ऐलान करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह देश की संसद द्वारा बनाया कानून है। इसे सभी को मानना पड़ेगा।
मुसलमानों के धार्मिक मामले में हस्तक्षेप: गोगोई
वक़्फ़ संशोधन बिल को नया नाम उम्मीद देने पर विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया और कहा कि यह सीधे-सीधे संविधान पर आक्रमण है। इंडिया गठबंधन की ओर से सबसे पहले हमले का मोर्चा खोलते हुए विपक्षी दल कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह संविधान को कमजोर करने, अल्पसंख्यकों को बदनाम करने और उनके अधिकारों से वंचित करने के उद्देश्य से यह बिल लेकर आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह वक़्फ़ विधेयक विभाजनकारी एजेंट का हिस्सा है जो भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार मुसलमान को धार्मिक प्रमाण पत्र देगी तो क्या अन्य धर्म से भी प्रमाण पत्र मांगे जाएंगे? उन्होंने जेपीसी में व्यापक चर्चा के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू के दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों के सुझावों को नजरअंदाज किया गया और ऐसे लोग भी चर्चा के लिए आए जिन्हें वक़्फ़ की कोई जानकारी नहीं थी।
और किसने क्या कहा:
- सरकार बेनकाब हुई, वक़्फ़ बिल के खिलाफ कानूनी संघर्ष शुरू करेंगे: मौलाना अरशद मदनी
- मुसलमान की जमीन कब्जाने की मंशा: हरसिमरन कौर, शिरोमणि अकाली दल सांसद
- केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों पर दबाव बना रही: विजय कुमार हांसदा, जेएमएम सांसद
- वक़्फ़ संशोधन बिल मुसलमानों के मानव अधिकारों का उल्लंघन का ज़रिया साबित होगा: राजद सांसद सुधाकर सिंह
- जेडीयू, हिंदुस्तानी वाम मोर्चा, लोजपा (रामविलास) ने मुसलमानों को धोखा दिया: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार
- केंद्र की मोदी सरकार वक़्फ़ संशोधन विधेयक के नाम पर ध्रुवीकरण का प्रयास कर रही है: मुकेश सहनी
- वक़्फ़ बिल पर भ्रम फैला रहा विपक्ष: चिराग पासवान
- वक़्फ़ बिल संविधान की आत्मा के ख़िलाफ़: जन सुराज पार्टी
मुस्लिम संगठनों का कई जगह प्रदर्शन
वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ मुस्लिम संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से देशव्यापी आंदोलन पटना से शुरू हुआ। जयपुर समेत देश के कई शहरों में संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। जमाते इस्लामी हिंद संगठन ने भी प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने बुधवार को कहा कि वह वक्फ (संशोधन) विधेयक को अदालत में चुनौती देगा। बोर्ड ने इसे एक ‘काला कानून’ करार दिया और इसे समुदाय के अधिकारों को खतरे में डालने वाला बताया।
इस बिल से कैसे कमजोर हुआ वक़्फ़
- इस्तेमाल से वक़्फ़ की इजाजत खत्म, केवल वसीयत या दान को ही माना जाएगा। वक़्फ़ करने के लिए 5 से अधिक वर्षों से मुसलमान होने की शर्त लगाई गई।
- वक़्फ़ संपत्ति तय करने का अधिकार वक़्फ़ बोर्ड के पास था, यह खत्म किया गया
- सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल में सभी सदस्य मुसलमान होने की शर्त भी हटाई गई
- राज्य वक़्फ़ बोर्ड में पहले निर्वाचित सांसद, विधायक बार काउंसिल के अधिकारी सदस्य होते थे, अब राज सरकार नॉमिनेट करेगी और दो गैर मुस्लिम का होना जरूरी
- ट्रिब्यूनल में मुस्लिम कानून विशेषज्ञ का होना जरूरी था, इसे खत्म किया गया
ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत पर 26 प्रतिशत और जापान पर 24 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। साथ ही ऑटो सेक्टर में 25 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का ऐलान किया। ट्रंप द्वारा टैरिफ़ लागू किए जाने के बाद यूरो के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि ट्रंप की घोषणा से पहले अमेरिकी शेयर मार्केट वॉल स्ट्रीट में उछाल देखने को मिला। इसी तरह अमेरीकी राष्ट्रपति ने वियतनाम पर 46 प्रतिशत, स्विटजरलैंड पर 31 प्रतिशत, कंबोडिया पर 49 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत, ब्राजील और सिंगापुर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया।
अमेरिकी पिस्ता बादाम और से हो सकता है सस्ता
जागरण के अनुसार भारतीय व्यापार में सबसे संवेदनशील माने जाने वाले कृषि और डेयरी सेक्टर में दूसरे देश की पेट को रोकने के लिए भारत ने इनसे जुड़े उत्पादों पर 100% का शुल्क लगा रखा है। हालांकि अमेरिका के पारस्परिक शुल्क की मार से व्यापार को बचाने के लिए अमेरिका से आने वाले कुछ कृषि आइटम के शुल्क में कटौती की जा सकती है लेकिन अमेरिका के देरी आइटम को भारत इजाजत नहीं देगा क्योंकि अमेरिका के पशु चारा में मांस का प्रयोग किया जाता है। भारत सरकार सेब, क्रैनबेरी, पिस्ता, बादाम इथाइल अल्कोहल जैसे आइटम पर शुल्क में कटौती कर सकती है। अभी अमेरिकी सेब, पिस्ता और बादाम पर 50% का शुल्क लिया जाता है। इससे कटौती पर यह सामान सस्ते हो जाएंगे।
कुछ और सुर्खियां:
- राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की तबीयत बिगड़ी इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराए गए, बीपी कम और शुगर बढ़ने से हुई थी परेशानी
- मारुति आठ अप्रैल से कारों के दाम 62,000 रुपये तक बढ़ाएगी
- पटना हाईकोर्ट में 14 मई से होगी बिहार में पुल गिरने के मामले की सुनवाई
- वायुसेना के जगुआर गुजरात के जामनगर में क्रैश, एक पायलट की मौत, दूसरा जख्मी
अनछपी: नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन के साथ भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पारित करवा लिया जिस पर किसी को ताज्जुब नहीं होना चाहिए। थोड़ी देर के लिए इस बात पर जरूर ताज्जुब हुआ कि नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के मुंगेर से लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह नीतीश कुमार को अपना नेता मानते हैं या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को। ललन सिंह ने लोकसभा में यह झूठा दावा किया कि वक़्फ़ धार्मिक बात नहीं है। उन्हें यह बात कौन बताए कि वक़्फ़ किया ही जाता है धर्म की वजह से। इसके अलावा उन्होंने कई ऐसी बातें कीं जो भारतीय जनता पार्टी के सांसद से तो उम्मीद की जाती है, जनता दल यूनाइटेड के सांसद से नहीं। ललन सिंह ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी के झूठे दावों को ही दोहराया। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि वक़्फ़ बोर्ड किसी भी संपत्ति को हड़पने वाला बोर्ड है। क्या उन्हें नहीं मालूम कि वक़्फ़ बोर्ड सरकार द्वारा नियंत्रित बोर्ड है और इस समय बिहार में शिया और सुन्नी दोनों वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन जनता दल यूनाइटेड से जुड़े हुए लोग हैं। ललन सिंह ने वक़्फ़ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी का वही रवैया अपनाया जो सीएए के समय में जनता दल यूनाइटेड के तत्कालीन सांसद आरपी सिंह ने अपनाया था। इससे एक बार यह बात फिर साबित हुई कि नीतीश कुमार की पार्टी कहती तो है कि वह भारतीय जनता पार्टी की कई नीतियों से अलग राय रखती है लेकिन जब वोट देने का समय आता है तो वह उन्हीं मुद्दों पर उसके साथ हो जाती है। सीएए के अलावा ट्रिपल तलाक़ और अनुच्छेद 370 पर भी नीतीश कुमार की पार्टी भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा पर चली जबकि उसका दावा था कि वह इन मुद्दों पर अलग राय रखती है। इसके साथ ही अब यह बहस भी जोर पड़ चुकी है कि नीतीश कुमार को एक सेक्यूलर नेता मानना अब सही नहीं है। कुछ लोग नीतीश कुमार के लिए यह दलील दे सकते हैं कि शायद उनकी सेहत ऐसी नहीं है कि वह इन मुद्दों पर अलग राय रखें और उन्होंने जिन लोगों को अपना करीबी बनाया है वह दरअसल भारतीय जनता पार्टी के करीबी हैं। ऐसे में नीतीश कुमार पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के दबाव में हैं। लोकसभा में बहस के दौरान सरकारी दलों के नेताओं द्वारा कई बार झूठ भी परोसा गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ी शातिराना अंदाज में यह दावा किया कि लालू प्रसाद ने जो मांग की थी उसे मान लिया गया है। इस वक़्त लालू एम्स में भर्ती हैं और उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आ सकता लेकिन इतना तय है कि उनकी बातों को उल्टा अर्थ देकर पेश किया गया। लालू ने तो वक़्फ़ की ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़े को खत्म करने के लिए कानून की मांग की थी लेकिन अब जो कानून बना है उससे वक़्फ़ संपत्ति को लूटने वाले बहुत खुश होंगे और सरकार भी वक़्फ़ की संपत्ति हड़प कर सकती है। कुल मिलाकर इस वक़्फ़ बिल पर सरकारी नेताओं की अधिकतर बातें झूठ का पुलिंदा हैं।
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