छ्पी-अनछपी: बेटे की मांग- नीतीश को सीएम चेहरा बनाए एनडीए, राष्ट्रपति बोलीं- पीएमसीएच धरोहर
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की एंट्री की गतिविधि तेज हो गई है और उन्होंने ताजा बयान दिया है कि एनडीए को उनके पिता को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा कि पीएमसीएच अमूल्य धरोहर है। सीबीएसई अब 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो बार लेगा। आरजेडी के सुनील सिंह की रद्द विधान परिषद सदस्यता सुप्रीम कोर्ट ने बहाल कर दी है।
और, जानिएगा कि नवादा की अदालत ने कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस की कुर्की का नोटिस क्यों दिया।
जागरण ने लिखा है कि सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। मंगलवार को उन्होंने कहा कि एनडीए और जदयू को भी चाहिए कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि यह भी बताएं कि न सिर्फ नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव होगा बल्कि उनके नेतृत्व में ही अगली सरकार बनेगी। निशांत ने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू की सीटें कुछ कम हो गई थीं। केवल 43 सीटें मिली थीं। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने राज्य के विकास के लिए काम किया।
पीएमसीएच अमूल्य धरोहर: राष्ट्रपति
हिन्दुस्तान के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि बिहार की अमूल्य धरोहर में पटना का मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) भी है। बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए अनेक बेहतर प्रयास किए हैं। पीएमसीएच के पुनर्विकास की योजना भी इनमें से एक है। पुनर्विकिसित पीएमसीएच आधुनिक सुविधाओं और तकनीकी से युक्त होगा। ऐसे अनेक बड़े स्वास्थ्य संस्थानों (स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट केंद्र) की बिहार में आवश्यकता है। राष्ट्रपति मंगलवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र के बापू सभागार में पीएमसीएच शताब्दी समारोह को संबोधित कर रही थीं।
सीबीएसई: दसवीं की बोर्ड परीक्षा दो बार
प्रभात खबर के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026 से 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार लेने से जुड़े मसौदा नियमों को मंगलवार को मंजूरी दे दी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा का पहला चरण 17 फरवरी से 6 मार्च 2026 तक आयोजित होगा जबकि दूसरा चरण 5 में से 20 में 2026 तक आयोजित होगा। दोनों परीक्षाओं में पूरा पाठ्यक्रम शामिल होगा और छात्रों को दोनों चरणों के लिए एक ही परीक्षा केंद्र आवंटित होगा। अधिकारियों ने बताया कि मसौदा नियमों को सार्वजनिक मंच पर डाला जाएगा और हित धारक 9 मार्च तक राय दे सकते हैं जिसके बाद नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुनील सिंह की विधान परिषद सदस्यता बहाल
भास्कर के अनुसार राजद एमएलसी सुनील सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिंह की विधान परिषद सदस्यता को फिर से बहाल करने का आदेश दे दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अशोभनीय टिप्पणी करने के मामले में उनकी सदस्यता विधान परिषद से रद्द कर दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ सुनील सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। बीती 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था जिसे मंगलवार को सुनाया गया। सुनील सिंह की सदस्यता रद्द करने के बाद इस सीट पर उपचुनाव करा लिया गया था और अगर सुप्रीम कोर्ट ने रिजल्ट घोषित करने पर रोक नहीं लगाई होती तो जदयू के ललन प्रसाद विधान परिषद के सदस्य बन जाते।
लालू, तेजस्वी समेत 77 को समन
जागरण के अनुसार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों समेत 77 लोगों को तलब किया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव, दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव और अन्य को तलब किया है। आरोपितों को 11 मार्च को अदालत में पेश होना है।
नवादा कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस की कुर्की का आदेश
हिन्दुस्तान के अनुसार नवादा कोर्ट ने कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस की कुर्की का नोटिस दिया है। इसके तहत दोनों जगहों पर कुर्की इश्तेहार चिपकाया गया। अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किये जाने पर अदालत ने यह सख्त कदम उठाया। व्यवहार न्यायालय नवादा के प्रथम अवर न्यायाधीश आशीष रंजन के आदेश पर इश्तेहार चिपकाया गया। मामला रजौली प्रखंड में फुलवरिया जलाशय के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा राशि भू-धारकों को प्रदान नहीं किए जाने से जुड़ा है। भू-धारक पक्ष के अधिवक्ता रंजीत पटेल ने बताया कि 1981-82 में रजौली में फुलवरिया जलाशय के निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इस मामले में भू धारकों ने उचित मुआवजा नहीं मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।अदालत ने पाया कि भू धारकों को दी गई मुआवजा राशि कम है। तब अदालत ने 10 लाख 27 हजार 3 सौ 88 रुपये 27 पैसे का भुगतान करने का आदेश दिया। भूमि अधिग्रहण करने की तिथि से वर्ष 2015 में 15 फीसदी सूद के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। किंतु जिला प्रशासन ने उक्त राशि का भुगतान नहीं किया।
कुछ और सुर्खियां:
- मटिहानी के जदयू विधायक राजकुमार सिंह पर हाईकोर्ट ने ₹50000 का जुर्माना लगाया
- कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को सिख दंगों के एक और मामले में उम्र कैद
- बिहार में 139 शहरों को कचरा निपटान के लिए 100 करोड रुपए मिले
- बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा समाप्त, 58 परीक्षार्थी फर्जी मिले, 51 नकलची निष्कासित
- दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 21 विधायक तीन दिन के लिए सस्पेंड
अनछपी: यह कितना दुखद इत्तेफाक है कि जिस दिन पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की सौवीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमें सुखद एहसास दिला रहे थे, उसी दिन ट्रेन से गिरकर घायल एक युवक को नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एडमिट नहीं किया गया और गेट पर ही तड़प तड़प कर उसकी जान चली गई। सरकार और नेताओं के दावे और प्रचार और आम आदमी के जीवन की हकीकत यही है। कायदे से इस खबर को सभी अखबारों के पहले पन्ने पर होना चाहिए लेकिन जितनी भी खबर छपी वह गनीमत मानी जाएगी। खबरों में बताया गया कि पटना सिटी के गुलजरबाग रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से गिरकर गिरकर जख्मी हुए युवक को लेकर रेल पुलिस मंगलवार की शाम करीब चार बजे नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची थी। इस युवक के पास मिले कागज से पता चला कि वह जमुई के सिकंदरा का 20 साल का विक्रम कुमार था। जब रेल पुलिस उसे लेकर इमरजेंसी गेट पर पहुंची तो उसकी सांस चल रही थी, वह जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा था और भीड़ जुट गई थी। रेल पुलिस का यह मानवीय रूप बहुत सराहनीय है कि उसके एक सिपाही ने दूसरे लोगों के साथ मिलकर डॉक्टर से लेकर अस्पताल कर्मी तक से युवक का इलाज करने की मिन्नतें कीं लेकिन अस्पताल की व्यवस्था ने इंसानियत का गला घोंट दिया। उस तड़पते युवक के लिए ना तो कोई स्ट्रेचर आया, ना कोई ट्रॉली आई कोई वार्ड बॉय आया। व्यवस्था ने उसके इलाज से पहले आधा घंटा कागजी कार्रवाई पूरा करने में ले लिया। और इलाज भी क्या हुआ कि जब लोग गुस्से में आ गए तो एक डॉक्टर ने एंबुलेंस पर तड़प रहे युवक को आला सटाया और गंभीर बताकर पीएमसीएच रेफर कर दिया। कुछ ही देर बाद युवक की मौत हो गई। सवाल यह है कि हर दिन मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा और हर तरह की सुविधा होने के दावे के बीच उस युवक को इतना इलाज भी नहीं दिया गया कि वह पीएमसीएच तक पहुंच सके। अफसोस की बात है कि हमारे समाज और मीडिया में ऐसे मुद्दों पर कोई अभियान नहीं चलता। हालांकि एनएमसीएच के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ने यह माना है कि यह मामला गंभीर है और उसकी जांच होगी लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे व्यवस्था सुधरेगी? क्या हमारा मीडिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से यह सवाल करेगा कि एक निर्दोष युवक की इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर अस्पताल के गेट पर मौत हो गई और आप इतने बड़े-बड़े दावे करते हैं?
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