छ्पी-अनछपी: वोटर वेरिफिकेशन पर विपक्ष व आयोग आमने-सामने, पीएमसीएच में कई लैब टेस्ट बंद

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में वोटर वेरीफिकेशन के मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में केमिकल नहीं होने की वजह से कई जांच बंद हो गई हैं। लंबे समय तक बिस्कोमान के अध्यक्ष रहे राजद नेता सुनील सिंह को इस बार कामयाबी नहीं मिली और भाजपा नेता विशाल सिंह इसके अध्यक्ष बने हैं। चीन फल और सब्जी की उपज बढ़ाने वाली खाद की सप्लाई रोक रहा है जिससे भारत में बागबानी पर खतरा है।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार बिहार में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की जारी प्रक्रिया के बीच विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने बुधवार की देर शाम चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस फैसले पर फिर से विचार करने की मांग रखी। इस मुलाकात में कांग्रेस, राजद, सीपीआई एमएल, सीपीआई और सीपीएम समेत 11 विपक्षी दलों के 20 प्रतिनिधि शामिल हुए। चुनाव आयोग से 3 घंटे के गहन विमर्श के बाद बाहर आए प्रतिनिधिमंडल में शामिल कांग्रेस नेता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि हमने आयोग के सामने शंकाएं रखी हैं। बिहार में चुनाव में कम समय रह गया है। ऐसे में विशेष गहन पुनरीक्षण पर फिर से विचार करना जरूरी है। अन्य दलों ने भी इसे रोके जाने की मांग की। इस दौरान दीपंकर भट्टाचार्य, राजेश राम, डी राजा, मनोज कुमार झा और अन्य भी मौजूद थे।

विपक्षी दलों के तर्क

विपक्ष का कहना है कि 2003 से बिहार में 4 से 5 चुनाव हो चुके हैं तो क्या सारे चुनाव गलत थे, क्या नियम मुताबिक नहीं थे? चुनाव आयोग को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन करना ही था तो अचानक जून के आखिर में घोषणा क्यों की गई? आयोग को अगर यह करना ही था तो विधानसभा चुनाव के बाद इसे किया जाना था। पौने 8 करोड़ मतदाता की पहचान एक महीने में करना संभव नहीं होगा। विपक्ष का कहना है कि दस्तावेज में आधार को नहीं माना गया है, बर्थ सर्टिफिकेट माता-पिता का मांगा गया है। 2003 के बाद जो वोटर सूची में दर्ज किए गए हैं उनका नाम वंचित हो जाएगा। विपक्ष ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बारे में यह आरोप लगाया कि उनके कई बड़े नेताओं को मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

‘20 फ़ीसद लोगों को हटाने की मंशा’

जागरण के अनुसार विपक्ष का यह भी कहना है कि जो काम राज्य में 22 वर्षों में नहीं किया गया उसे अब अचानक क्यों किया जा रहा है। विपक्षी दलों ने दावा किया कि चुनाव आयोग की मंशा कम से कम 20% लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने की है। इसमें प्रवासी बिहारी कामगार और मजदूर निशाने पर है। विपक्षी दलों ने दो टूक कहा कि गरीबों और वंचितों का वोट छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेंगे।

भाजपा का आयोग बन गया है चुनाव आयोग: तेजस्वी

जागरण के अनुसार आरजेडी का दावा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर वार्ता के लिए निर्वाचन आयोग से उसे कोई आमंत्रण नहीं मिला। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल तो निर्वाचन आयोग पर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच बुधवार को तेजस्वी यादव ने भी एक बार फिर निर्वाचन आयोग पर उंगली उठायी है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में चुनाव होने वाला है वहां विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग से मिलने का समय ही नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि यह लोग लोकतंत्र को समाप्त करने पर तुले हैं और आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग भाजपा का आयोग बन गया है।

चुनाव आयोग की दलील

वोटर वेरीफिकेशन के मामले में विपक्षी दलों के आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने कहा है कि सत्यापन का यह काम संविधान के अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में रहकर ही किया जा रहा है। आयोग का कहना है कि इससे किसी वैध मतदाता का नाम नहीं कटेगा बल्कि विदेशी घुसपैठियों सहित दूसरे जिन लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा रखे हैं, वह बाहर होंगे। चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि भले ही राजनीतिक दलों ने सत्यापन पर सवाल उठाए हैं लेकिन बिहार में बूथों पर तैनात राजनीतिक दलों के डेढ़ लाख बूथ लेवल एजेंट इस मुहिम में पूरी ताकत से जुटे हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि बेबुनियाद आरोप लगाने और भ्रम फैलाने से कुछ हासिल नहीं होगा। आयोग ने दावा किया कि बिहार में 2003 में सत्यापन का काम 31 दिनों में ही पूरा किया गया था।

पीएमसीएच में कई जांच बंद

भास्कर के अनुसार पीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग में री-एजेंट की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण खून जांच तीन माह से नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों को निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ रही है। इसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। एक ओर इसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल बनाने के लिए ऊंचे ऊंचे भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, वहीं मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। री-एजेंट की अनुपलब्धता के कारण सीरम इलेक्ट्रोलाइट, सीआरपी, थायराइड-एबीजी, विटामिन डी, विटामिन बी12, एंटीसीसीपी और पीएसए जैसी महत्वपूर्ण जांच पिछले तीन माह से नहीं हो पा रही है। इस संबंध में अधीक्षक डॉक्टर आईएस ठाकुर के सरकारी फोन पर बात करने की कोशिश कई गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इधर पीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ शिखा का कहना है कि ब्लड जांच के लिए उपयोग होने वाले री-एजेंट की सप्लाई नहीं होने के कारण बहुत सी जांच बंद हैं।

विशाल सिंह बने बिस्कोमॉन के अध्यक्ष

हिन्दुस्तान के अनुसार बिस्कोमान के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए बुधवार को परिणाम घोषित कर दिया गया। भाजपा नेता विशाल सिंह बिस्कोमान के अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने राजद एमएलसी सुनील सिंह की पत्नी वंदना सिंह को पांच मतों से हराया। उपाध्यक्ष पद के लिए गोपालगंज के महेश राय विजयी हुए। दोनों गुरुवार को पदभार ग्रहण करेंगे। इस तरह 21 वर्ष बाद सुनील सिंह का बिस्कोमान अध्यक्ष पद से दबदबा खत्म हुआ। विशाल सिंह अभी एनसीसीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। निदेशक मंडल के 19 सदस्यों में से 12 ने विशाल सिंह जबकि वंदना सिंह को 7 सदस्यों का मत मिला है। इसी प्रकार उपाध्यक्ष पद के लिए महेश राय को 11 और विनय कुमार को 8 मत मिले हैं।

चीन ने रोकी खाद की सप्लाई, बागबानी पर संकट

जागरण के अनुसार दो माह पहले ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा सेक्टर के मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई पर रोक के बाद चीन अब उन खाद की सप्लाई पर भी रोक लगा रहा है जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से फल और सब्जी की उपज बढ़ाने में होता है। पानी में घुलनशील फर्टिलाइजर जैसे मोनो अमोनियम फास्फेट में पोटेशियम और नाइट्रोजन की मात्रा काफी ज्यादा होती है। यह रेड सब्सिडी वाली खाद है जिनका भारतीय किसान सालाना 6 लाख टन तक आयात करते हैं। इसमें चीन की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

कुछ और सुर्खियां:

  • भारतीय स्टेट बैंक अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) के ₹31580 करोड़ के लोन खाता को फ्रॉड घोषित करेगा
  • बिहार में इस साल साढ़े सात लाख घरों में पाइप से गैस सप्लाई का लक्ष्य
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की यात्रा पर घाना पहुंचे
  • मोतिहारी के गांव में ब्राह्मणों से पूजा पर रोक लगाने का बोर्ड लगाने पर यूट्यूबर समय तीन लोगों पर केस
  • बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेज में 5 जुलाई से दाखिला, सीट एलॉटमेंट रिजल्ट आज

अनछपी: बिहार में नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार ने पिछले 20 वर्षों में जिन क्षेत्रों में बिहार को पीछे धकेला है, उनमें उच्च शिक्षा विभाग एक प्रमुख क्षेत्र है। बिहार के बड़े और अच्छे माने जाने वाले कॉलेजों की बदहाली सबके सामने है। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और परीक्षा का देर से होना किसी से छिपी हुई बात नहीं है। और ऐसा तब है जबकि मुख्यमंत्री और यूनिवर्सिटिययों के कुलपति एक ही गठबंधन के रहे हैं। यानी अलग-अलग दलों के होने की वजह से राजभवन और सरकार में जो टक्कर होती थी उसकी भी गुंजाइश नहीं थी। इसके बावजूद हमने पिछले कुछ महीनों में राजभवन और शिक्षा विभाग के बीच तनातनी देखी। यहां तक कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी रोका गया। इसी सिलसिले में कॉलेज में प्रिंसिपल की बहाली भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। बिहार की यूनिवर्सिटियों के नए कुलाधिपति आरिफ खान ने अपने हिसाब से प्रिंसिपल की बहाली में गड़बड़ी रोकने के लिए लॉटरी सिस्टम लाया। लेकिन ऐसा लगता है कि इस लॉटरी सिस्टम को लाने में जिस सावधानी की जरूरत थी उसकी कमी रह गई। इसका नतीजा यह है कि साइंस कॉलेज में आर्ट्स वाले और आर्ट्स कॉलेज में साइंस वालों को प्रिंसिपल बनाया गया है। कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि प्रिंसिपल के काम पर इससे असर नहीं पड़ता लेकिन बहुत से लोगों को यह लगता है कि प्रिंसिपल जिस बैकग्राउंड का हो उसे उसी कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया जाना चाहिए। यानी अगर कोई प्रिंसिपल आर्ट्स फैकल्टी का है तो उसे साइंस कॉलेज का या कोई साइंस फैकल्टी का है तो उसे किसी आर्ट्स कॉलेज का प्रिंसिपल नहीं बनाया जाना चाहिए। इस बहस को आगे बढ़त हुए यह भी पूछा जा सकता है कि क्या किसी एक विभाग का अध्यक्ष दूसरे विभाग के प्रोफेसर को बनाया जा सकता है? अगर विभागाअध्यक्षों की नियुक्ति भी लॉटरी सिस्टम से हो तो इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। देखना है कि राजभवन और कुलाधिपति लॉटरी सिस्टम से बहाली में इस ‘मिसमैच’ के बारे में क्या तर्क देते हैं।

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