छ्पी-अनछपी: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा 3.66 लाख वोटरों का ब्योरा, 21 नदियों में अब भी उफान

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट से हटाए गए 3.66 लाख नाम का ब्योरा देने को कहा। बिहार की 21 नदियों में अक्टूबर में भी उफान जारी है। हिमाचल प्रदेश में एक बस पर पहाड़ी से मलबा गिरने से 18 यात्रियों की मौत हो गई। अफगानिस्तान में विदेशी सैनिक अड्डे का भारत ने भी विरोध किया है।

और, जनिएगा कि क्वांटम मैकेनिक्स पर काम करने वाले तीन वैज्ञानिकों को नोबेल प्राइज मिला।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से कहा कि वह बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद तैयार अंतिम मतदाता सूची से बाहर रखे गए 3.66 लाख मतदाताओं का विवरण पेश करे। आयोग से गुरुवार तक ब्योरा देने को कहा गया है। शीर्ष अदालत ने मौखिक तौर पर कहा कि इस बात को लेकर कुछ भ्रम है कि अंतिम सूची में जोड़े गए मतदाता, उन मतदाताओं की सूची से हैं, जिन्हें पहले ड्राफ्ट सूची से बाहर कर दिया गया था या फिर ये बिल्कुल नए नाम हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा, आंकड़े तुलनात्मक विश्लेषण के साथ पेश किए जाने चाहिए। साथ ही कहा कि अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या देखकर ऐसा लगता है कि मसौदा सूची में संख्या में वृद्धि हुई है। किसी भी भ्रम से बचने के लिए, इसमें जोड़े गए अतिरिक्त मतदाताओं की पहचान उजागर की जानी चाहिए।

चुनावी बुलेटिन:

  • चिराग पासवान 30 सीटों पर अड़े, भाजपा की तरफ से 25 की पेशकश
  • मुकेश सहनी अपनी वीआईपी के लिए 30 से कम सीटों पर राजी नहीं
  • सीपीआई के महासचिव डी राजा तेजस्वी से मिले 24 सीटों की मांग की, झारखंड मुक्ति मोर्चा को चाहिए 12 सीटें
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से ज्यादा सभाओं को संबोधित करेंगे, नीतीश कुमार की एक दिन में चार सभा होगी
  • राहुल गांधी होगी 10 रैलियां प्रियंका गांधी भी कर सकती हैं 5 से 6 जनसभाएं
  • राजद प्रमुख लालू प्रसाद का नारा- एनडीए सरकार 9 2 11 हो जाएगी

बिहार की 21 नदियों में अब भी उफान

नेपाल और पड़ोसी राज्यों में बारिश से 21 नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयी है। ऐसी स्थिति 15 वर्षों के बाद आई है जब राज्य की नदियां अक्तूबर के पहले-दूसरे सप्ताह में इतनी बड़ी संख्या में लाल निशान के पार हुई है। यही नहीं इस दौरान कोसी और बागमती में रिकॉर्ड जलस्राव भी हुआ। कोसी में 15 वर्षों में दूसरी बार इतना पानी आया, जबकि बागमती भी अपने सर्वाधिक जलस्तर के रिकॉर्ड के करीब पहुंची। बागमती ने दूसरा सर्वोच्च जलस्तर का रिकॉर्ड बनाया। इसके पहले वर्ष 2019 में सूबे की नदियों में भारी उफान आया था और अक्तूबर के पहले सप्ताह के अंत में 18 नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयी थीं।

पहाड़ी का मलबा गिरने से 18 बस यात्रियों की मौत

जागरण की खबर है कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के तहत बस्ठीं में भल्लू पुल के समीप मंगलवार शाम लगभग 6:30 बजे एक निजी बस पर पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण 18 यात्रियों की मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि मलबे की चपेट में आने से बस की बाडी उखड़कर खड्ड किनारे जा गिरी। पूरी बस मिट्टी और पत्थरों के नीचे दब गई। जिस जगह पर हादसा हुआ है, वहां बरसात के समय से लगातार भूस्खलन हो रहा था। इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन भी परिचित था, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने पहाड़ी एवं गिर रहे पत्थरों का निदान करने के लिए कुछ नहीं किया। इसी का परिणाम रहा कि मंगलवार को इतनी अधिक संख्या में लोग काल का ग्रास बन गए। निजी लोकल बस में लगभग 25 से 30 यात्री सवार थे।

अफगानिस्तान में विदेशी सैनिक अड्डे पर भारत का विरोध

भारत ने मंगलवार को रूस, चीन और सात अन्य देशों के साथ मिलकर अफगानिस्तान में विदेशी सैन्य ढांचे की तैनाती के प्रयासों का विरोध किया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तालिबान से रणनीतिक बगराम एयरबेस सौंपने के आग्रह के संदर्भ में उठाया गया है। मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट’ वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख राजदूत विनय कुमार ने अफगानिस्तान के स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य का समर्थन किया।

क्वांटम मैकेनिक्स पर काम करने वाले तीन वैज्ञानिकों को नोबेल प्राइज

जागरण के अनुसार साल 2025 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार डिजिटल क्रांति की जनक मानी जानेवाली क्वांटम मेकेनिक्स पर काम करनेवाले तीन विज्ञानियों को दिया गया है। मंगलवार को रायल स्वीडिश एकेडमी फार साइंस की तरफ से प्रोफेसर जान क्लार्क, मिशेल एच डोवोरेट और जान एम मार्टिनिस को नोबेल दिए जाने की घोषणा की गई। तीनों ही विज्ञानी अमेरिका के हैं। विज्ञानियों ने इलेक्ट्रिक सर्किट में बड़े पैमाने पर मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज की थी। जान क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जान मार्टिनिस ने साल 1984 और 1985 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एक खास प्रयोग किया। उन्होंने दो सुपरकंडक्टर से एक बिजली का सर्किट बनाया। इन दोनों सुपरकंडक्टरों के बीच में एक पतली परत थी, जो बिजली को रोकती थी। फिर भी, उन्होंने देखा कि सर्किट में मौजूद सभी चार्ज किए हुए कण एक साथ मिलकर ऐसा व्यवहार करते थे. जैसे वे एक ही कण हों।

कुछ और सुर्खियां:

  • अपहरण व हत्या मामले में भाकपा माले के अगिआंव के पूर्व विधायक मनोज मंजिल समेत 23 आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं
  • बिहार विधानसभा चुनाव में सेंट्रल फोर्सज के 1 लाख जवान तैनात होंगे
  • यूपीआई भुगतान के लिए पिन की जगह चेहरे की पहचान या फिंगरप्रिंट का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा
  • बिहार में दिवाली की सरकारी छुट्टी 20 अक्टूबर को
  • चुनाव आचार संहिता के तहत बिना अनुमति 100 से अधिक लोगों के एक जगह जुटने पर पाबंदी
  • पटना मेट्रो में पहले दिन 6800 लोगों ने सफर किया
  • मध्य प्रदेश में कफ सिरप कोल्ड ड्रिंक से चार और बच्चों की गई जान
  • ऑनलाइन बुक ट्रेन टिकट की तारीख बदलकर कर सकते हैं सफर

अनछपी: पिछले तीन महीनों से चुनाव आयोग बिहार की वोटर लिस्ट के साथ जैसा रवैया अपनाए हुए है उसके लिए हिंदी में एक कहावत है- चोर चोरी से जाए हेराफेरी से न जाए। पता नहीं, इस कहावत को और बेहतर तरीके से कैसे कहा जा सकता है और अंग्रेजी बोलचाल में इसके लिए किस मुहावरे का इस्तेमाल होता है। यह भी सही है कि राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर वोट चोरी का इल्जाम लगाया और वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा भी दिया है लेकिन फिलहाल हम उसकी बात नहीं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के विवादास्पद एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बारे में। पहले यह बात याद दिलानी है कि प्रसिद्ध सामाजिक चिंतक योगेंद्र यादव ने कहा है कि भारत में मतदाता बनाने की जिम्मेदारी पहले चुनाव आयोग की थी, अब यह जिम्मेदारी आम नागरिकों पर डाल दी गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि पहले वोटर सरकार को चुनते थे, अब नई व्यवस्था यह हुई है कि सरकार वोटर चुन रही है। बहरहाल चुनाव आयोग को इस बात पर तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा कि वह आधार कार्ड को भी मतदाता बनाने के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल करे। अब सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग ने जिन ताज़ा 3.66 लाख करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं उसके बारे में कंफ्यूजन है। ध्यान देने की बात यह है कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें से बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्हें तो यह पता भी नहीं होगा कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। इससे पहले भी जब चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों ने वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख लोगों की जानकारी मांगी तो उसने इंकार कर दिया और यह लिस्ट देने के लिए वह तभी राजी हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए आदेश पारित किया। इन सब के बीच होगा यह कि बिहार विधानसभा चुनाव निकल जाएगा, रिजल्ट भी आ जाएंगे और यह हेराफेरी रुकेगी कि नहीं, शायद हम नहीं बता सकते।

 

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