छपी-अनछपी: बैंक अफसर के पास 40 लाख कैश, जनगणना पर खर्च होंगे 11,718 करोड़

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पाटलिपुत्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के विकास पदाधिकारी (डीओ) भवेश कुमार सिंह के छह ठिकानों पर छापेमारी में 40 लाख कैश के साथ बड़ी जायदाद के कागजात मिले हैं। अगली जनगणना ऐप से कराई जाएगी और इसके लिए 11 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का बजट रखा गया है। भारत में बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है।

और, जानिएगा कि गलत ई चालान कट जाए तो कैसे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

पहली ख़बर

भास्कर की खबर है कि आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पाटलिपुत्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के विकास पदाधिकारी (डीओ) भवेश कुमार सिंह के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति के मामले में शुरुआती जांच के बाद कार्रवाई शुरू की गई। छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। 11 साल की नौकरी में भवेश ने 40 करोड़ की संपत्ति बनाई। ईओयू को छापेमारी में 40 लाख कैश, ज्वेलरी, पेट्रोल पंप और जमीन से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं। ईओयू की टीम शुक्रवार सुबह 9 बजे पटना और गोपालगंज में अलग-अलग ठिकानों पर पहुंची। टीम को बेड के अंदर रखे बैगों से कैश मिला। अलमारी से महंगी घड़ियां, सोने के गहने और जमीन से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। पाटलिपुत्र सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, एसपी वर्मा रोड से भवेश के करीबी रिश्तेदार के नाम से एक खाता मिला। खाता आरएम इंटरप्राइजेज के नाम से है। इसमें 15 करोड़ का लेनदेन है। बिहटा राइस मिल से 40 लाख कैश, गोपालगंज में पेट्रोल पंप की जानकारी मिली।

रोहतास में वेतन निर्धारण के लिए घूस मांगने वाला डेटा ऑपरेटर गिरफ्तार

हिन्दुस्तान के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने रोहतास के अकोढ़ी गोला स्थित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय के डाटा इंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार शर्मा को 14 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त द्वारा विशिष्ट शिक्षकों का वेतन निर्धारण करने के एवज में घूस की मांग की गई थी। इस संबंध में अकोढ़ीगोला के जतन बिगहा निवासी स्व. रामजी सिंह के पुत्र सुनील कुमार सिंह द्वारा निगरानी अन्वषेण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

ऐप से होगी जनगणना

जागरण के अनुसार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल, ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जनगणना-2027 के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। प्रस्ताव के अनुसार 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराई जाएगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया दो चरणों की है। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर, 2026 तक घरों की सूची बनाकर आवासों की गणना कराई जाएगी, जबकि फरवरी, 2027 में जनगणना होगी। दूसरे चरण में ही जातियों का इलेक्ट्रानिक डाटा भी शामिल किया जाएगा। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख एवं जम्मू-कश्मीर के बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों सहित हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में दूसरे चरण में जनगणना सितंबर, 2026 में होगी।

भारत में बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी

हिन्दुस्तान के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को भारतीय बीमा कंपनियों में 100 फीसदी विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने वाले बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2025 को मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि इससे बीमा सेक्टर में बड़े विदेशी निवेश आएंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। यह बिल मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। यह उन 13 विधेयकों में शामिल है, जिन पर इस सत्र में चर्चा होनी है।

माइनॉरिटी स्कूलों में आरटीई लागू करने की मांग ख़ारिज

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू करने की याचिका शुक्रवार को फिर खारिज कर दी। अल्पसंख्यक शैक्षणिक को आरटीई के प्रविधानों से छूट देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व में दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, न्यायपालिका को ऐसे मामलों से कमजोर न करें। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि यह अन्य लोगों के लिए एक संदेश होना चाहिए। आर महादेवन की पीठ ने

गाड़ी का गलत चालान कट गया तो करें ऑनलाइन शिकायत

प्रभात खबर के अनुसार राज्य भर में किसी वाहन चालक का गलत चालान कट गया है, तो उसे निरस्त करने या संशोधन के लिए दफ्तर में जाने की आवश्यकता नहीं होगी. ऑनलाइन माध्यम से भी त्रुटिपूर्ण इ-चालान को निरस्त करने और संशोधन के लिए आवेदन दे सकते हैं. इस संबंध में परिवहन विभाग ने ऑनलाइन सेवा उपलब्ध कराने के लिए एनआइसी को निर्देश दिया है. विभाग ने echallan.parivahan.gov.in पर ऑनलाइन सेवा शुरू की है. नयी व्यवस्था के तहत आवेदक घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से गलत ई-चालान की शिकायत दर्ज कर सकेंगे. वाहन रजिस्ट्रेशन, वाहन का फोटो, चालान की कॉपी सीधे पोर्टल पर अपलोड किये जा सकेंगे और आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख पायेंगे. वहीं, आवेदक उक्त दस्तावेजों के साथ आवेदन दे सकते हैं या फिर ऑनलाइन वेबसाइट पर टेक्स्ट में मैसेज लिख सकते हैं.

कुछ और सुर्खिया:

  • मगध यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पर नीतिगत निर्णय लेने पर रोक लगाई गई
  • केंद्रीय मखाना विकास योजना के लिए 476 करोड रुपए की मंजूरी
  • बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने 11389 स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी किया
  • कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का 90 साल की उम्र में निधन
  • मनरेगा का नाम बदल गया अब इसे पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना कहा जाएगा, 125 दिन मिलेगा काम

अनछपी: आपको नोएडा के बिसवाड़ा गांव में बीफ रखने के आरोप में मार दिए गए अखलाक की कहानी शायद याद होगी। 28 सितंबर 2015 की रात बीफ रखने के आरोप में अखलाक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। अदालत और लोकतंत्र पर चलने वाले भारत में अब तक इस मामले में सजा हो जानी चाहिए थी लेकिन इसके उलट उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस मामले में जो लोग मुलजिम थे उन्हें बरी करने के लिए पूरे केस को ही वापस ले लिया। भारतीय जनता पार्टी के नेता अक्सर यह दावा करते हैं कि उनके शासनकाल में कोई दंगा नहीं होता लेकिन असल बात यह है कि दंगा करने वाले छूट जाते हैं और यहां तक की मॉब लिंचिंग के मुलजिमों को भी छुड़ाने के लिए सरकार ही आगे आ जाती है। यानी मर्डर करने वाले अगर भारतीय जनता पार्टी के चहेते हों तो उसके खिलाफ दर्ज केस को सरकार ही वापस ले लेती है। 2014 के बाद के भारत का इतिहास जब भी लिखा जाएगा तो नाइंसाफी के अध्याय में इस मामले को प्रमुखता से जगह दी जाएगी। और यह केवल सरकार नहीं बल्कि अदालत और जजों की भूमिका पर भी सवाल के तौर पर याद किया जाएगा। खबर यह आई कि 12 दिसंबर को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की अदालत ने वकीलों की दलील सुने बिना ही मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख लगा दी और अब इस पर 18 दिसंबर को सुनवाई होगी। 2014 के बाद के भारत और खासकर उत्तर प्रदेश की सरकार को इस बात के लिए याद किया जाएगा कि बीजेपी की सरकार इंसाफ दिलाने के बदले इंसाफ नहीं दिलाने के लिए कोशिश कर रही थी।

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