छ्पी-अनछपी: ईरान समेत खाड़ी देशों में तबाही, सेंसेक्स ने गोता लगाया
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई की हत्या के बाद खाड़ी देशों में भी तबाही मची है और कुवैत में तीन अमेरिकी जहाज़ क्रैश हुए हैं। अमेरिका और इसराइल के हमलों से बाजार में भी दहशत है और शेयर बाजार ने गोता लगाया है। गल्फ के युद्ध में फंसे भारतीयों को वापस लाने की कोशिश तेज़ की गई है।
और, जानिएगा कि एम्स पटना में कैसे जोड़ी गई कुट्टी मशीन से कटकर अलग हुई बच्ची की कलाई
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी बुद्ध सोमवार को और भड़क गया। संघ संघर्ष लेबनान और खाड़ी देशों तक फैल गया। हिजबुल्ला द्वरा इसराइल पर हमलों के बाद इसराइल ने लेबनान में जवाबी हवाई कार्रवाई शुरू की, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र और साइप्रस स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे तक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस बीच, कतर की सीमा में तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान भी गिरे हैं। ईरान ने इन्हें मार गिराने का दावा किया, जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि कतर ने गलती से इन एफ-15ई विमानों को निशाना बनाया। कतर ने भी ईरान के दो सुखोई एसयू 24 लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया। ईरान ने कुवैत में अमेरिकी दूतावास और इसराइल में पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यालय के साथ-साथ सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफायनरी आरामको पर भी हमले किए। हमले में अब तक 555 ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं। अमेरिका ने दावा किया कि ईरान के 130 शहरों पर 1000 से ज्यादा हमले किए गए। वहीं इसराइल में 11 और लेबनान में 31 लोग मारे गए हैं। कुवैत के अमेरिकी बेस पर हुए ईरानी हमले में अब तक चार अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं।
पीएम मोदी ने ईरान को छोड़ कई पश्चिमी देशों के प्रमुखों से बात की
प्रभात ख़बर के अनुसार पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं और भारत संवाद व कूटनीति के माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है. भारत पश्चिम एशिया में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा को देखते हुए लगातार घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. मोदी रविवार से यूएइ के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इस्राइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और बहरीन के शाह हम्माद बिन ईसा अल खलीफा, जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय से फोन पर बात कर चुके हैं.
शेयर बाजार ने लगाया गोता
सेंसेक्स सोमवार को 1,048 अंक गिरकर 80,239 पर आ गया। साथ ही इस साल इसमें 6% गिरावट आ चुकी है। अभी यह छह महीने के निचले स्तर पर है। दूसरी तरफ निफ्टी 500 के 67% शेयर 200 दिन के औसत स्तर से नीचे हैं। यह व्यापक कमजोरी का संकेत है। इस बीच भारतीय शेयर बाजार में डर का पैमाना इंडिया विक्स एक ही दिन में 23% बढ़कर 16.86 पर पहुंच गया। इस घबराहट की मोटे तौर पर एक ही वजह है। ब्रेंट क्रूड 14 महीने की ऊंचाई 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि भारत जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। कारण यह है कि ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बड़े पैमाने पर बाधित होने की आशंका है। लेकिन शेयर मार्केट के एक्सपर्ट्स इस घबराहट भरी बिकवाली को फौरी सेंटीमेंट का नतीजा मान रहे हैं।
जंग के चलते फंसे भारतीयों की आज से वापसी
हिन्दुस्तान ने लिखा है कि ईरान-अमेरिका के बीच जंग के चलते फंसे भारतीयों की मंगलवार से स्वदेश वापसी होगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने विशेष इंतजाम किए हैं। इंडिगो जेद्दा से दस विशेष राहत उड़ानों का संचालन करेगी। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी खाड़ी देशों के लिए मंगलवार से सेवाएं शुरू करेगी। मस्कट से पहली उड़ान तिरुचिरापल्ली के लिए होगी। दिल्ली, कोच्चि, कोझिकोड, तिरुचिरापल्ली, मंगलुरु और मुंबई के लिए निर्धारित सेवाएं शुरू की जाएगी।
भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर की यूरेनियम डील
प्रभात ख़बर के अनुसार भारत और कनाडा ने सोमवार को कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किये. पीएम मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए सहयोग की एक महत्वाकांक्षी रणनीति को अंतिम रूप दिया. इस रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में इस वर्ष के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीइपीए) को संपन्न करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को वर्तमान के 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर के पार ले जाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया गया है. इसके अलावा दोनों देशों ने 2.6 अरब डॉलर (लगभग 236.6 अरब रुपये) के महत्वपूर्ण यूरेनियम समझौते पर भी हस्ताक्षर किये. दोनों देशों के बीच हुई यह वार्ता संबंधों में आये एक लंबे गतिरोध के बाद हो रही है.
कुट्टी मशीन से कटकर अलग हुई बच्ची की कलाई जोड़ी गई
पटना एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा विज्ञान का करिश्मा कर दिखाया है। वैशाली की रहने वाली 6 वर्षीय मासूम लक्ष्मी कुमारी का बायां हाथ जानवरों का चारा काटने वाली मशीन (कुट्टी मशीन) की चपेट में आकर कलाई से पूरी तरह कटकर अलग हो गया था। रविवार रात एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने 6 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद कटे हुए हाथ को न सिर्फ जोड़ दिया, बल्कि उसमें जान भी लौटा दी है। वैशाली में हुए इस हादसे के बाद परिजन रविवार शाम करीब 7:30 बजे कटे हुए हाथ के टुकड़े के साथ एम्स इमरजेंसी पहुंचे थे। बर्न एंड प्लास्टिक विभाग की हेड डॉ. वीणा सिंह ने बताया कि आमतौर पर ऐसे मामलों में 2 से 3 घंटे के भीतर सर्जरी शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन यह बच्ची हादसे के 8 घंटे बाद पहुंची थी, जिससे ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था। रात 8 बजे से शुरू हुआ ऑपरेशन देर रात 2 बजे तक चला।
कुछ और सुर्खियां:
- पश्चिम चंपारण जिले में तैनात बिहार शिक्षा परियोजना के असिस्टेंट इंजीनियर रोशन कुमार को पांच लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया
- आज शाम 5:50 से 6:46 के बीच चंद्र ग्रहण रहेगा
- एआई समिट के दौरान कमीज उतार कर किए गए प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार युवा कांग्रेस के नौ कार्यकर्ताओं को जमानत दी
अनछपी: ईरानी शासन के प्रमुख आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और दूसरे लगभग सभी बड़े नेताओं को मारने और पूरे ईरान पर अंधाधुंध बमबारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्या ईरान में जमीन के रास्ते कब्जा करने की कोशिश करेंगे? अब तक के हमले से उन्हें यह एहसास तो हो चुका होगा और उनकी मिलिट्री ने उन्हें यह बता दिया होगा कि ईरान इराक जैसा नहीं है। इराक युद्ध के समय सद्दाम हुसैन के खिलाफ कुवैत पर कब्जा करने का बड़ा आरोप था और ऐसा कोई मामला ईरान के साथ नहीं है। इसलिए इसके लिए आम राय बनाने में अमेरिका नाकाम रहेगा। दूसरी बात यह है कि अफगानिस्तान से भगाने जाने के बाद क्या अमेरिका की जनता इस बात के लिए राजी होगी कि वह इस तरह की जमीनी कार्रवाई के लिए अपनी सेना को वहां उतारे? अमेरिका ने अब तक केवल चार अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की है जबकि ईरान से खबर है कि वहां 500 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। फिर भी अमेरिका में अपने सैनिकों को खोने की चिंता बढ़ी हुई दिख रही है और राष्ट्रपति ट्रंप ने भी यह कहा है कि अभी और अमेरिकी मारे जा सकते हैं। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संकेत दिया है कि वह इस झगड़े में ईरान के साथ नहीं हैं और उन्होंने इसराइल या अमेरिका के हमले के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा है जिससे लगे कि वह इसकी निंदा करना चाहते हों। अगर ईरान में सत्ता बदलती है तो यह भारत के रुख को सही साबित कर सकती है चाहे नैतिक रूप से इस पर जितने भी सवाल खड़े हों। अगर ईरान की मौजूदा सरकार फिर से खड़ी होती है तो वह इस रवैया पर गंभीरता से गौर करेगी।
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