छ्पी-अनछपी: रसोई गैस मिलना मुश्किल, पुतिन-ट्रंप के बातचीत के बीच ईरान जंग जारी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में रसोई गैस मिलना मुश्किल हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत की है लेकिन ईरान पर हमले जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत की है। 

पहली ख़बर

भास्कर के अनुसार बिहार में गैस आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दी गई है। इससे जहां होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, वहीं घरेलू उपभोक्ता डिजिटल सिस्टम और वेंडरों की लूट के दोहरे जाल में फंस गए हैं। आलम यह है कि बुकिंग के बावजूद डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) नहीं आने से लोग गैस एजेंसी के दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां कर्मचारी उपभोक्ताओं को समझाने में जुटे हैं। हालांकि इंडियन ऑयल कॉपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने कहा है कि राज्य में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। आईओसीएल ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं के घर गैस पहुंचाएं।

30 फ़ीसद सप्लाई घटी

अमेरिका-ईरान में जंग का भारत में महंगाई पर बड़ा असर दिखने लगा है। एक ओर जहां एलपीजी के लिए संघर्ष चल रहा है, वहीं एअर इंडिया ने गुरुवार से हवाई किराया बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, मंगलवार को क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर बैरल के आसपास आ गईं, जो सोमवार को 118 डॉलर तक उछल गई थीं। मगर युद्ध की वजह से भारत की 30% गैस आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी 19.1 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की गैस खपत का करीब आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है। होर्मुज जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही ठप होने से मध्य पूर्व से आने वाली करीब 6 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस कारण पेट्रोलियम मंत्रालय ने मंगलवार को गैस आवंटन की प्राथमिकताएं तय कर दीं। एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस के लिए मांग का 100% देंगे यानी कोई कटौती नहीं। वहीं, कमर्शियल उपयोगकर्ताओं की मांग का 80% और उर्वरक इकाइयों की जरूरत का 70% आवंटन तय किया गया है। पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर इसकी मात्रा तय की जाएगी। सरकारी गैस कंपनी गेल को गैस आपूर्ति प्रबंधन का जिम्मा दिया गया।

पुतिन-ट्रंप में बातचीत

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन कर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच ये बातचीत ऐसे समय हुई जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लगभग बंद होने की स्थिति में है। क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे फोन पर बात की। इस दौरान अमेरिका-ईरान संघर्ष और रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर चर्चा हुई। उशाकोव ने कहा कि बातचीत का मुख्य फोकस ईरान का संघर्ष और मॉस्को, वॉशिंगटन और कीव के बीच होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता थी जिसका उद्देश्य यूक्रेन संघर्ष का समाधान ढूंढना है।

ईरान पर बमबारी जारी रही

अमेरिका और इसरायल की ईरान पर बमबारी जारी है। ईरान भी ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग रहा है। भीषण होती जंग के साथ सुलह और शांति की आवाजें भी उठ रही हैं। हालांकि दोनों पक्षों के तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। ईरान ने कहा कि वह अब ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल करेगा जिनका वजन एक हजार किलो होगा। वहीं ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान पर बीस गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा।

यूएई के पेट्रोकेमिकल पर हमले से भीषण आग लगी 

ईरान ने बहरीन को निशाना बनाकर तीन मिसाइलें दागीं। यूएई के तट पर फारस की खाड़ी में एक पोत पर हमले की आशंका जताई जा रही है। ये केंद्र ब्रिटेन की सेना संचालित करती है। वहीं, यूएई ने मध्यपूर्व की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी का संचालन बंद कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने यूएई के पेट्रोकेमिकल प्लांट का ठिकाना कहे जाने वाले औद्योगिक शहर रुवैस पर ड्रोन हमला किया। इस हमले से वहां भीषण आग लगी है। ईरान ने मंगलवार को सऊदी अरब और कुवैत के तेल भंडार केंद्रों पर ड्रोन से हमला किया। हालांकि, सभी हमले नाकाम रहे। 

इसराइल में तेल और गैस रिफाइनरी पर ईरान का हमला

प्रभात खबर के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का 11वां दिन पूरा हो गया है. यह संघर्ष अब दिन-प्रतिदिन और भयावह रूप लेता जा रहा है. अमेरिका और इसराइल के भीषण हमलों से दहक रहा ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है. नेतन्याहू की आक्रामक सैन्य रणनीति के चलते इसराइली और अमेरिकी सेनाओं ने ईरान में अब तक 5,000 से अधिक ठिकानों को तबाह कर दिया है. वहीं, ईरान की सेनाओं ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने इसराइल के हाइफा शहर में तेल और गैस रिफाइनरी तथा ईंधन टैंकों के खिलाफ ड्रोन/मिसाइल हमला किया. हालांकि इसराइल की तरफ से स्पष्ट जानकारी नहीं आयी है कि हमला सफल रहा या कोई बड़ा नुक्सान हुआ.

सुप्रीम कोर्ट ने- यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समय आ गया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने का समय आ गया है, लेकिन इस पर फैसला विधायिका को करना चाहिए। कोर्ट 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट के उन प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्हें मुस्लिम महिलाओं के लिए भेदभावपूर्ण बताया गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा- अगर शरियत का विरासत कानून रद्द कर दिया गया तो कानूनी खालीपन पैदा हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम विरासत को नियंत्रित करने वाला अलग वैधानिक कानून नहीं है। जस्टिस बागची ने कहा कि भेदभाव का मुद्दा मजबूत है, लेकिन यूसीसी बनाना संसद का अधिकार है और न्यायपालिका को विधायी शक्ति पर भरोसा करना चाहिए। अगली सुनवाई 4 हफ्ते के बाद तय की।

सभी 537 अंचलों में दाखिल खारिज समेत कई काम ठप

प्रभात खबर के अनुसार बिहार राजस्व सेवा के पदाधिकारियों में शामिल अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारियों सहित राजस्व कर्मचारी संघ की हड़ताल से 537 अंचलों में राजस्व सेवा के मुख्य 20 काम प्रभावित हैं. दाख़िल खारिज, ज़मीन नापी के अलावा आय, निवास और जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनने का काम रुकने से छात्र-छात्राओं सहित नयी नौकरी ज्वाइन करने वालों की परेशानी बढ़ी है. राजस्व कर्मचारी संघ 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है. इधर, उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने काम पर लौटने की चेतावनी दी है. 

कुछ और सुर्खियां:

  • पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के टिकट पर 399 का फ्यूल सरचार्ज 
  • टी 20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के लिए रिकॉर्ड 131 करोड़ रुपए का बंपर बोनस
  • 16 मार्च से श्रीनगर में खुलेगा एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन 18 लाख फूलों से महकेगी कश्मीर घाटी
  • बिहार में दो दिनों तक बादल छाए रहने और बूंदाबांदी के आसार

अनछपी: देश के दूसरे हिस्सों की तरह बिहार में भी घरेलू रसोई गैस के लिए जिस तरह अफरातफरी मची है, उससे ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के असर का तो पता चलता ही है, यह बात भी साफ होती है कि भारत सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की। शायद एक अहम तैयारी यह होती कि अपने उपभोक्ताओं को भारत सरकार या पेट्रोलियम कंपनी साफ संदेश देती कि उन्हें क्या करना है और उन्हें गैस सप्लाई के लिए किस तरह के नियम का पालन करना होगा। पेट्रोलियम कंपनी तो वही करेगी जैसा भारत सरकार की ओर से आदेश आएगा। सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी अक्सर इस बात में ज्यादा दिलचस्पी लेती है कि वह यह बताए कि पहले घरेलू रसोई गैस मिलना कितना मुश्किल था और अब कैसी आसानी है। अगर हम इस बहस में ना भी पड़ें तो भी सरकार की जिम्मेदारी यही मालूम होती है कि वह देश के लोगों के सामने स्थिति स्पष्ट करे। ईरान पर अमेरिकी और इसराइली हमले को अभी दो हफ्ते भी नहीं हुए हैं कि भारत में घरेलू गैस सप्लाई की स्थिति इस तरह चमरई गई। हमारा मीडिया तो इस बात से ज्यादा खुश था कि पड़ोस में क्या परेशानी है और अपनी परेशानी को दबाने में लगा था। उपभोक्ताओं को सीधे कोई जानकारी नहीं दी गई लेकिन चुपके से सप्लाई पर या तो रोक लगा दी गई है या इसमें देरी की जा रही है। चूंकि आजकल गैस की बुकिंग ऑनलाइन होती है इसलिए उपभोक्ताओं के पास यह चारा भी नहीं है कि वह एजेंसी के पास जाकर गुहार लगाएं। भारत सरकार के पास अब भी मौका है कि वह घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को साफ तौर पर बताए कि अब सप्लाई किस तरह होगी और उन्हें क्यों घबराना नहीं चाहिए। 

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