छ्पी-अनछपी: अमेरिकी बेस पर हमले से कई फौजी ज़ख्मी, सिपाही निकला स्मैक डीलर

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसमें 15 सैनिक घायल हो गए। नालंदा का सिपाही ऋषिकेश कांतिकर स्मैक सिंडिकेट का अहम कड़ी निकला है। नेपाल की नई सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएम- यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया।

और, जानिएगा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक आज़ादी के अधिकार में आम छुट्टी शामिल नहीं है।

पहली ख़बर

मध्य पूर्व में जंग खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। शनिवार को इसरायल ने 50 से अधिक लड़ाकू विमानों से ईरान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसमें 15 सैनिक घायल हो गए। ईरान ने तेल अवीव, कुवैत, ओमान और दुबई पर भी हमले किए। ईरान ने दुबई में अमेरिका के लिए काम कर रहे यूक्रेन के एंटी ड्रोन सिस्टम डिपो को भी उड़ाने का दावा किया। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसमें अमेरिका के 15 सैनिक घायल हो गए, इनमें से पांच की हालत गंभीर है। ईरानी हमले में हवा में ईंधन भरने वाले कई विमानों को नुकसान पहुंचा है। ईरान ने ओमान के बंदरगाह सलालाह के पास अमेरिकी रसद पोत पर भी हमला किया। साथ ही कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगे रडार सिस्टम को भी ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान ने दुबई में अमेरिका के दो गुप्त ठिकानों पर भी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए। यहां पर करीब 500 अमेरिकी सैनिक छिपे हुए थे।

यमन से इसराइल से हमला

भास्कर ने लिखा है कि अमेरिका-ईरान जंग का दायरा और बढ़ गया है। ईरान के समर्थन में शनिवार को पहली बार यमन के हूती विद्रोही भी उतर आए हैं। हूतियों ने लगभग 2 हजार किमी दूरी से इसराइल पर मिसाइलें दागीं। यरूशलम और तेल अवीव में अलर्ट सायरन गूंजते रहे। 6 लोग घायल हो गए। प्रतिष्ठित गल्फ एक्सपर्ट मोहम्मद अलमासिरी ने आशंका जताई है कि होर्मुज के बाद अब स्वेज रूट भी खतरे में है।

सिपाही निकला स्मैक डीलर

25 करोड़ की स्मैक बरामदगी ने ड्रग नेटवर्क का खतरनाक चेहरा उजागर किया है। समस्तीपुर के जितेंद्र कुमार और जहानाबाद के नीतीश कुमार को जेल भेजा गया। जांच में बड़ा खुलासा हुआ। नालंदा का सिपाही ऋषिकेश कांतिकर इस सिंडिकेट का अहम कड़ी निकला। वह गया में पदस्थापित था। 2025 के जुलाई में भागलपुर ट्रांसफर हो गया। पर ज्वाइन नहीं किया। फरार हो गया। पटना के आलमगंज और रामकृष्ण नगर से उसके बैंक दस्तावेज, चेक और सर्विस रिकॉर्ड मिले। इससे अंदरूनी मिलीभगत का शक गहरा हुआ। पुलिस उसे फरार मान रही है। पटना में स्मैक की प्रोसेसिंग और सप्लाई का पूरा सेटअप था। रॉ मटेरियल यूपी के मुगलसराय और गाजीपुर से आता था। ट्रेन, कुरियर और सड़क मार्ग का इस्तेमाल होता था।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरफ्तार

जागरण के अनुसार नेपाल की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएम-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने ओली को भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके से सुबह तड़के गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हास्पिटल ले जाया गया। डाक्टरों के अनुसार, हृदय और गुर्दे संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। ओली के साथ-साथ पूर्व गृह मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक को भी उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों नेताओं पर आरोप है कि पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए ‘जेन-जी’ आंदोलन को कुचलने में इनकी मुख्य भूमिका थी। उस हिंसक कार्रवाई में लगभग दो दर्जन युवाओं सहित कुल 76 लोगों की जान गई थी।

तीन से चार गुना महंगी हो सकती है ज़मीन

बिहार में जमीन की सरकारी कीमतें तीन से चार गुना तक बढ़ सकती हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने जिलों से आई रिपोर्ट के आधार पर एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में बंपर वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, एमवीआर में 300 से 400 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया है। सरकार की सहमति मिलने के बाद एमवीआर की बढ़ी दरें लागू की जाएंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में इस पर निर्णय लिया जा सकता है। दरअसल, राज्य के शहरी क्षेत्र में दस साल और ग्रामीण इलाकों में 13 साल से जमीन का एमवीआर नहीं बढ़ा है।

जंग के असर से निपटने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप

प्रभात ख़बर के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण बने वैश्विक हालात के बीच बिहार सरकार ने राज्य में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम तेज कर दिया हैं. इसी कड़ी में गठित उच्च स्तरीय आपदा प्रबंधन समूह (सीएमजी) की पहली बैठक 30 मार्च को अपराह्न चार बजे मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में होगी. इस बैठक में राज्य की आपूर्ति व्यवस्था, प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और संभावित संकट से निपटने की रणनीति पर विशेष चर्चा की जाएगी.

धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में छुट्टी शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की मांग पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है। सार्वजनिक अवकाश घोषित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने गुरु गोविंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) पर पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश (राजपत्रित अवकाश) घोषित करने की माग खारिज कर दी। गुरु गोविंद सिंह जी के प्रति अगाध सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनका जीवन न्याय और सांसारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए एक अथक संघर्ष था। इस परिप्रेक्ष्य में, उनकी विरासत का सम्मान करने का सबसे उत्तम तरीका शायद यह है कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए, न कि केवल श्रद्धा की मांग करके सम्मान का कोई प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जाए। यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने आल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा की याचिका खारिज करते हुए दिया।

कुछ और सुर्खियां:

  • मधेपुरा में तेज रफ्तार कर बिजली के खंभे से टकराने के बाद नदी में गिरी, तीन दोस्तों की मौत
  • बिहार में 1 अप्रैल से होगी गेहूं की सरकारी खरीदारी, 48 घंटे में भुगतान का वादा
  • रेमंड ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया का 87 साल की उम्र में निधन
  • पटना नगर निगम के लिए वित्तीय वर्ष 2026- 27 का 3043.22 करोड रुपए का बजट मंजूर

अनछपी: अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला तो कर दिया लेकिन एक महीना गुजरने के बाद यह बात उन दोनों हमलावरों को पता चल गई होगी कि सब कुछ उनकी प्लानिंग और स्ट्रेटजी के तहत नहीं चल रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अमेरिका के पास सबसे आधुनिक हथियार के साथ-साथ सबसे बड़े रणनीतिकार भी होंगे लेकिन ईरान ने इनके जवाब में जो रणनीति अपनाई है उससे अमेरिकी नेतृत्व बुरी तरह फंसा हुआ नजर आता है। दरअसल ईरान के लिए यह वजूद की जंग है और वह करो या मरो की नीति पर चल रहा है। अमेरिका ने शायद यह सोच रखा था कि वह ईरान के बड़े नेताओं को मारने के बाद वहां आसानी से अपनी पिट्ठू सरकार बना लेगा लेकिन ईरान की सरकार ने यह साबित किया है कि उसके लोग मरने से नहीं डरते। जहां तक रणनीति की बात है तो ईरान के बारे में यह कहा जा रहा है कि वह अब एनर्जी वॉर की नीति पर चल रहा है। पहले तो ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को एक टोल बूथ और इसे अपनी कमाई का जरिया बना दिया। इससे दुनिया भर में एनर्जी क्राइसिस पैदा हुई और अमेरिका पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ईरान को यह धमकी जरूर दे रहा है कि वह उसके एनर्जी सेंटर्स पर हमला करेगा तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमेरिका की मदद से चलने वाली सरकारों के देश पर हमले कर रहा है जिसमें अमेरिकी बेस भी शामिल हैं। अगर ईरान ने सऊदी अरब, बहरीन और यूएई जैसे देशों के एनर्जी सेंटर्स पर हमले जारी रखे तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और फिर अरब देश के नेता अमेरिका से मदद की गुहार लगाएंगे और दबाव बनाएंगे। ईरान की इस रणनीति की वजह से ही ईरान के  हमले में अमेरिका को यूरोपीय देशों का समर्थन नहीं मिला बल्कि कुछ देशों ने तो उसका विरोध भी किया।

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