बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान ने बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट पार कर रहे दो पोत को कब्जे में ले लिया। इसमें से एक पोत भारत आ रहा था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालेगांव सीरियल बम ब्लास्ट के सभी चार आरोपितों को बरी कर दिया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। बिहार के 11 शहरों में नई टाउनशिप बनेगी।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम बढ़ाए जाने के कुछ देर बाद ही ईरान ने बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर रहे दो पोत को कब्जे में ले लिया। इसमें से एक पोत भारत आ रहा था। इनके अलावा एक अन्य पोत पर गोलीबारी की। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान द्वारा किसी पोत की यह पहली जब्ती है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसकी नौसेना ने नियमों के उल्लंघन पर दोनों पोत को पकड़ा है। आरोप लगाया कि ये पोत बिना अनुमति के संचालित किए जा रहे थे और अपने नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की थी। जब्त पोत की पहचान पनामा के ध्वज वाले एमएससी फ्रांसेस्का और लाइबेरिया के ध्वज वाले एपामिनोडास के रूप में हुई है। 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक मध्य पूर्व में विभिन्न पोत पर 30 से अधिक हमले हो चुके हैं।
मालेगांव सीरियल ब्लास्ट के चारों आरोपित बरी
जागरण के अनुसार लगभग दो दशक के लंबे इंतजार के बाद बांबे हाई कोर्ट ने मालेगांव सिलसिलेवार बम विस्फोट में फैसला सुनाते हुए सभी चार आरोपितों को बरी कर दिया है। जागरण के अनुसार मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांडक की पीठ ने मामले के अंतिम चार आरोपितों लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। चारों पर हत्या और आपराधिक साजिश के साथ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए थे। आठ सितंबर, 2006 को शब-ए-बारात के दिन नासिक जिले के मालेगांव में हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के पास सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 37 लोग मारे गए थे और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। अदालत ने इन आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने के विशेष एनआईए अदालत के 2025 के आदेश को रद्द कर दिया।
बंगाल और तमिलनाडु में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की लंबी प्रक्रिया के बाद हो के विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर अभूतपूर्व सुरक्षा में वोट पढ़ेंगे। इसके साथ ही तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा। जागरण संवाददाता के अनुसार, बंगाल में पहले चरण में उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से दी गई जानकारी के मुताबिक पहले चरण के लिए केंद्रीय बलों की कुल 2,407 कंपनियों की तैनाती की गई है। पूर्व मेदिनीपुर जिले में सबसे अधिक 273 कंपनियां मुस्तैद रहेंगी। मतदान केंद्रों को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है।
11 नए बनने वाले शहरों में जमीन की खरीद बिक्री पर रोक
भास्कर के अनुसार बिहार में 11 नए आधुनिक शहर बसेंगे। राज्य मंत्रिपरिषद ने बुधवार को इन सेटेलाइट टाउनशिप के विकास को मंजूरी दी। इन 11 स्थानों पर जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, भागलपुर और छपरा के पास यह रोक 30 जून 2027 तक लागू रहेगी। वहीं, पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर के पास यह पाबंदी 31 मार्च 2027 तक रहेगी। कैबिनेट की यह बैठक सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी। इन सेटेलाइट टाउन का नामकरण प्राचीन सांस्कृतिक नामों पर होगा। पटना के पास ‘पाटलिपुत्र’ और सोनपुर के पास ‘हरिहरनाथपुर’ टाउनशिप विकसित होगी। इस बीच नगर विकास विभाग इन स्थानों का मास्टर प्लान तैयार कर लेगा। इन मास्टर प्लान में कोर एरिया और स्पेशल एरिया तय किए जाएंगे। इसके बाद लैंडयूज और निर्माण की प्लानिंग इसी मास्टर प्लान के मुताबिक होगी।
बिहार के 30 जिलों में खुलेंगे आधार केंद्र
नया आधार बनवाने या इसे अपडेट कराने की सुविधा शीघ्र ही बिहार के कई अन्य जिलों में भी उपलब्ध होगी। इसके लिए राज्य के 30 जिलों में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का आधार सेवा केंद्र खुलेगा। इससे लोग अपने जिला मुख्यालयों में आधार अपडेट या सुधार करा सकेंगे। वर्तमान में पटना, भागलपुर, पूर्णिया और मुजफ्फरपुर में यूआईडीएआई का आधार सेवा केंद्र है। नए केंद्र दो से तीन माह में चालू हो जायेंगे। इनमें चार से आठ काउंटर होंगे। ऑनलाइन स्टॉल बुकिंग और ऑफलाइन टोकन की सुविधा भी होगी।
स्कूल में मांस मिलने के आरोप के बाद हड़कंप
जागरण के अनुसार रोहतास जिले के राजपुर प्रखंड स्थित रामुडील उर्दू मध्य विद्यालय में बुधवार सुबह 20 किलो मांस मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। सुबह करीब साढ़े छह बजे स्कूल खुलने पर परिसर में चार बड़े पालिथीन में रखा मांस मिला, जिस पर सबसे पहले रसोइया की नजर पड़ी। रसोइया ने इसकी जानकारी बच्चों को दी और मांस भी दिखाया, जिसके बाद यह खबर पूरे गांव में फैल गई। हालात बिगड़ते देख मांस को आलमारी में छिपाने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक ग्रामीण पहुंच चुके थे और उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में प्रतिबंधित मांस लाया गया है। इसके बाद विद्यालय परिसर में जमकर हंगामा शुरू हो गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस तरह की घटना पहले भी दो-तीन बार हो चुकी है।
कुछ और सुर्खियां:
- उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में चार गाड़ियों की टक्कर में 11 लोगों की मौत
- भागलपुर में सेप्टिक टैंक की शटरिंग खोलने के दौरान 3 मजदूरों की मौत
- सीयूईटी पीजी का रिजल्ट 24 अप्रैल को शाम पांच बजे आएगा
- पटना हाई कोर्ट ने दांगी और कुशवाहा को अलग-अलग जाति बताया, कुशवाहा ओबीसी जबकि दांगी ईबीसी
- राजगीर के वीरायतन की संस्थापिका पद्मश्री 90 वर्षीय या चंदना जी नहीं रहीं
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चुनाव आयोग का नोटिस
- नेपाल में हाल ही में बनी सरकार के गृह मंत्री सुधन गुरंग ने भ्रष्टाचार के आरोपी के बाद इस्तीफा दिया
- बिहार में राशन कार्डधारियों को हर महीने 100 किलो कोयला जन वितरण प्रणाली के डीलर से मिलेगा
अनछपी: पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान हो रहा है और जीत या हार चाहे जिसकी हो, इस चुनाव को हम इसलिए याद रखेंगे कि 27 लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से इसके बावजूद हटा दिया गया कि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज थे। उनके पास बस एक चीज नहीं थी और वह था चुनाव आयोग के जरिए गढ़े गए लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी का जवाब। यानी किसी के नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी पाई गई और किसी की उम्र को चुनाव आयोग ने अपनी मर्जी के मुताबिक नहीं पाया। इस चुनाव को इसलिए भी याद रखा जाएगा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट से भी इतनी बड़ी तादाद में लोगों को इंसाफ नहीं मिल सका और उसने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी की कथित मिलीभगत को नजरअंदाज किया। यह सब हुआ है वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के नाम पर। इसके बारे में बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में पहले 7.6 करोड़ वोटर थे जो अब घटकर 6.8 करोड़ रह गए। इनमें से बहुत से वोटर तो वाकई वैसे होंगे जो जीवित न होंगे या कहीं और चले गए होंगे लेकिन कम से कम 27 से 34 लाख लोग ऐसे हैं जो मौजूद हैं और जिनके पास कागजात हैं फिर भी वह इस इंतजार में वोट डालने से रह गए क्योंकि इसके लिए बनाए गए ट्रिब्युनल्स ने उनके बारे में कोई फैसला नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट का वह बयान भी याद रखा जाएगा कि अगर लोग इस बार वोट नहीं डाल पा रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वह कभी वोट नहीं डाल पाएंगे। अपने इस बयान से सुप्रीम कोर्ट ने दरअसल लोगों के वोट डालने के अधिकार को छीनने को क़ानूनी शक्ल दे दी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर है कि ट्रिब्युनल्स के पास 34 लाख मामले हैं लेकिन वह अब तक केवल 139 वोटरों- सिर्फ 139- को इंसाफ दे सका। यह भारत के चुनावी लोकतंत्र का शायद सबसे काला दिन है।
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