बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। परिवारवाद के विरोध में भाषण देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार समेत तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों और दूसरे राजनेताओं के रिश्तेदारों समेत 32 लोगों ने बिहार कैबिनेट के मंत्री पद की शपथ ली।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार की एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का पहला विस्तार गुरुवार को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.) सैय्यद अता हसनैन ने ऐतिहासिक गांधी मैदान में 32 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गुरुवार को जदयू कोटे से 13, भाजपा से 15, लोजपा आर से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री ने शपथ ली। नीतीश सरकार में नवम्बर 2025 में शपथ लेने वाले 19 पूर्व मंत्रियों को पुन: जगह मिली है। वहीं,पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत समेत सात नए चेहरे शामिल किए गए हैं। सम्राट मंत्रिमंडल में अनुभव के साथ नई पीढ़ी का बेहतर समन्वय की कोशिश हुई है। छह मंत्री ऐसे हैं जो पहले भी इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। इस विस्तार के साथ ही सरकार में अब मुख्यमंत्री सहित 35 मंत्री हो गए हैं। राज्यपाल ने 32 में से 20 को पांच-पांच के समूह में जबकि 12 को छह-छह के दो समूह में मंत्री पद की शपथ दिलाई। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व सीएम नीतीश कुमार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जीतनराम मांझी सहित एनडीए के अन्य प्रमुख नेता शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बने। समारोह दोपहर 12: 13 बजे आरंभ हुआ और 21 मिनट चला।
नीतीश और उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र किसी सदन के सदस्य नहीं
सरकार में सीएम सहित दोनों उपमुख्यमंत्री विधायक हैं। गुरुवार को जिन 32 मंत्रियों ने शपथ लिया, उसमें 26 विधायक हैं। चार विधान पार्षद डॉ दिलीप कुमार जायसवाल, अशोक चौधरी, डॉ प्रमोद कुमार और डॉ संतोष कुमार सुमन भी मंत्री बने हैं। निशांत और दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इन दोनों को छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद में किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा।
किसे कौन विभाग मिला
सम्राट चौधरी: मुख्यमंत्री : सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, सिविल विमानन, ऐसे विभाग जो किसी को आवंटित नहीं
विजय कुमार चौधरी: उपमुख्यमंत्री : जल संसाधन, संसदीय कार्य
बिजेन्द्र प्रसाद यादव: उपमुख्यमंत्री : वित्त, वाणिज्य कर
श्रवण कुमार: ग्रामीण विकास, सूचना एवं जनसंपर्क
विजय कुमार सिन्हा: कृषि
दिलीप जायसवाल: राजस्व,भूमि सुधार
निशांत: स्वास्थ्य
लेशी सिंह: भवन निर्माण
रामकृपाल यादव: सहकारिता
नीतीश मिश्रा: नगर विकास व आवास, सूचना प्रावैधिकी
दामोदर रावत: परिवहन
संजय सिंह टाइगर: उच्च शिक्षा, विधि
अशोक चौधरी: खाद्य, उपभोक्ता संरक्षण
श्रीभगवान कुशवाहा: योजना-विकास
अरूण शंकर प्रसाद: श्रम संसाधन, युवा रोजगार एवं कौशल,
मदन सहनी: मद्यनिषेध,उत्पाद, निबंधन
संतोष कुमार सुमन: लघु जल संसाधन
रमा निषाद: पिछड़ा, अतिपिछड़ा कल्याण
रत्नेश सादा: आपदा प्रबंधन
कुमार शैलेन्द्र: पथ निर्माण
शीला कुमारी: विज्ञान एवं प्रावैधिकी
केदार प्रसाद गुप्ता: पर्यटन
लखेन्द्र रौशन:एससी-एसटी कल्याण
सुनील कुमार: ग्रामीण कार्य
श्रेयसी सिंह: उद्योग, खेल
जमा खान: अल्पसंख्यक कल्याण
नन्दकिशोर राम: डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन
शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल: ऊर्जा
प्रमोद कुमार: खान,कला संस्कृति
श्वेता गुप्ता: समाज कल्याण
मिथिलेश तिवारी: शिक्षा
रामचंद्र प्रसाद: पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन
संजय सिंह: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण
संजय कुमार: गन्ना उद्योग
दीपक प्रकाश: पंचायती राज
कौन किसका रिश्तेदार
निशांत कुमार वल्द पूर्व सीएम नीतीश कुमार
संतोष मांझी वल्द पूर्व सीएम जीतन मांझी
नीतीश मिश्र वल्द पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र
सीएम सम्राट चौधरी वल्द पूर्व मंत्री शकुनी
दीपक प्रकाश वल्द पूर्व मंत्री उपेंद्र कुशवाहा
रमा निषाद- पति पूर्व सांसद, ससुर- पूर्व मंत्री
शीला मंडल, ससुर पूर्व राज्यपाल
इसी तरह कुल एक दर्जन रिश्तेदारी है।
सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ में सब आरोपित बरी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्ष 2005 के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ केस में सभी 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा है। इस मामले में सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या हो गई थी। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने सोहराबुद्दीन के भाइयों, रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन की अपीलों को खारिज कर दिया। जिन 22 को आरोपमुक्त किया गया है, उनमें गुजरात और राजस्थान पुलिस के जूनियर लेवल के अफसर थे। उन पर आरोप था कि वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने इन तीनों का अपहरण किया और बाद में फर्जी मुठभेड़ में उन्हें मार गिराया। अदालत ने परिवार के प्रति सहानुभूति जताई, पर स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्यों के संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस केस में अमित शाह, आईपीएस डीजी वंजारा, आईएएस राजकुमार पांडियन और दिनेश पहले ही बरी हो चुके हैं।
तमिलनाडु में नई ताजपोशी बहुमत के इंतजार में
हिन्दुस्तान के अनुसार तमिलनाडु के चुनावी समर में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय की विजययात्रा ने विधानसभा की दहलीज तक का सफर तो शानदार तरीके से तय किया, लेकिन सिंहासन पर ताजपाेशी के लिए अब भी बहुमत का ग्रहण लगा है। 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद गुरुवार को राज्यपाल ने विजय को स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं है। ऐसे में जरूरी संख्या बल जुटाने के लिए टीवीके ने वाम दलों, वीसीके और आईयूएमएल से समर्थन का अनुरोध किया है। विजय 24 घंटे के अंदर गुरुवार को दूसरी बार लोकभवन पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल से मिलकर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने का अनुरोध किया। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय से उन विधायकों का ब्योरा देने को कहा जो सरकार बनाने के लिए टीवीके का समर्थन कर रहे हैं। टीवीके नेता सीटीआर निर्मल कुमार ने सीपीआई के प्रदेश सचिव से मुलाकात की और सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, पार्टियों ने हमारे अनुरोध का जवाब देने के लिए समय मांगा है।
गाड़ियों पर जाति वाले स्टिकर लगे मिले तो जुर्माना लगेगा
जागरण ने सलाह दी है कि अगर आपकी गाड़ी पर भी जातिसूचक शब्द लिखे हैं या इससे जुड़ा स्टीकर लगा है, तो उसे हटा लें। ऐसे वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वाहनों के पकड़े जाने पर चालकों से दो हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। परिवहन विभाग ने इससे जुड़ा निर्देश जारी किया है। विभाग ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी वाहन मालिक एक महीने के अंदर अपने वाहनों से जातिसूचक शब्द या स्टीकर हटा लें। विभाग के अनुसार, एक महीने की अवधि समाप्त होने के बाद ट्रैफिक पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाकर इसकी सख्ती से जांच की जाएगी। नियन का उल्लंघन करने वालों पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 177 व 179 के तहत दो हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। विभाग ने सभी वाहन मालिकों से अपील की है कि वे इस दिशा में ध्यान दें और कानूनी परेशानी से बचें।
कुछ और सुर्खियां:
- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर एन रवि ने विधानसभा भंग किया, ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं रहीं
- किशनगंज जिले के पोठिया में सीआईएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा
- नासिक में टीसीएस मामले से चर्चा में आईं आरोपित निदा खान गिरफ्तार
- शेखपुरा में पति की गोली से पत्नी घायल, उग्र भीड़ ने हमलावर पति को मार डाला
अनछपी: परिवारवाद के खिलाफ अपने भाषण में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के साथ-साथ राहुल गांधी को भी निशाना बनाने वाले दो प्रमुख नेताओं नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपनी मौजूदगी में ‘फैमिली कैबिनेट’ बनवाई। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार है, जो खुद को लोहियावादी और समाजवादी बताते हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी की सिद्धांत की राजनीति की बात करते हैं। इस बात पर तो बहस हो सकती है कि नीतीश कुमार की सेहत 1सही है या नहीं लेकिन नरेंद्र मोदी के बारे में तो ऐसा कोई बहाना भी नहीं है। नीतीश कुमार बराबर लालू प्रसाद को यह कहकर निशाना बनाते थे कि उन्होंने कभी अपने परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। यह दावा किया जाता है कि नीतीश कुमार खुद इसके लिए तैयार नहीं थे तो फिर यह मानना जरूरी हो जाएगा कि नीतीश कुमार ने अपने इर्द-गिर्द चाटुकार नेताओं की ऐसी भीड़ जमा कर रखी है जो निशांत कुमार के बहाने अपनी राजनीति चमकाएंगे। वैसे बात केवल उनके अपने पुत्र की नहीं है बल्कि जब वह पूरी तरह स्वस्थ थे तब भी उनके मंत्रिमंडल में रिश्तेदारी वाली राजनीति कम नहीं थी। क्या नीतीश कुमार अब इतने स्वस्थ हैं कि उनसे इस बारे में सवाल किया जा सकता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो ऐसे सवाल कभी लेते नहीं लेकिन शायद उनके समर्थक कोई ना कोई दलील देकर अपनी झेंप मिटाने की कोशिश कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज के अखबारों में इस मुद्दे की कोई चर्चा नहीं है जो पत्रकारिता की बेशर्मी का एक जीता जागता उदाहरण है।
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