बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुरक्षा घटाने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, लालू प्रसाद और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को अपनी सुरक्षा वापस कर दी है। चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर अदालत में सरेंडर नहीं करेंगे। लोजपा (रामविलास) ने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अशरफ अंसारी को बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए का उम्मीदवार घोषित किया है।
और, कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर सवा दो करोड़ फ़ॉलोअर्स लेकिन जंतर मंतर पर प्रदर्शन में पहुंचे दो हज़ार।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार आवास खाली करने का नोटिस और सुरक्षा घटाने के मामले में सत्ता पक्ष और राजद में तनातनी बढ़ गई है। सुरक्षा घटाने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, लालू प्रसाद और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को अपनी सुरक्षा वापस कर दी है। राबड़ी देवी ने 10, सर्कुलर रोड आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस कर दिया है। तेजस्वी अभी दिल्ली में हैं। माता-पिता की सुरक्षा घटाने के विरोध में उन्होंने अपनी वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा वापस कर दी है। उसके बाद राजद कार्यकर्ता राबड़ी आवास की सुरक्षा में तैनात हो गए हैं। शिफ्ट में कार्यकर्ता पहरा दे रहे हैं। तीनों शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा हटाने के निर्णय की सूचना मिलते ही शनिवार को राजद कार्यकर्ता 10 सर्कुलर रोड आवास के बाहर जमा होने लगे। भाई अरुण सहित कई कार्यकर्ता लाठी लेकर आवास की सुरक्षा को पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, भोला यादव, पूर्व मंत्री चंद्रशेखर, शिवचंद्र राम, कुमार सर्वजीत, शक्ति सिंह यादव, प्रवक्ता एजाज अहमद, आईआईपी के आईपी गुप्ता आदि आवास के बाहर डटे रहे।
‘खान सर’ अदालत में सरेंडर नहीं करेंगे, बेल के लिए ऑनलाइन अर्ज़ी
जागरण के अनुसार कदमकुआं थाने में दर्ज आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास के मामले में नामजद आरोपी बनाये गये चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर अदालत में सरेंडर नहीं करेंगे. उनके वकील ने शनिवार को ऑनलाइन माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी है. इससे पहले शनिवार को पटना सिविल कोर्ट में उनके सरेंडर करने की चर्चाएं बेहद गर्म थीं, लेकिन दोपहर एक बजे तक कोर्ट बंद होने के बाद भी वे अदालत नहीं पहुंचे. कोर्ट पहुंचे खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार मऊआर ने स्पष्ट किया कि खान सर सरेंडर नहीं करेंगे. दूसरी ओर, कहा जा रहा है कि पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए खान सर पटना से बाहर निकल गये हैं और उनका ऑफिशियल मोबाइल नंबर भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा है. पुलिस उनकी तलाश में जुटी है और उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है.
अमेरिका-ईरान में फिर जंग भड़की
हिन्दुस्तान ने लिखा है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग की आग फिर भड़क गई है। अमेरिका ने शुक्रवार-शनिवार को ईरान के कई ड्रोन गिराने के साथ कुछ रडार तबाह कर दिए। इससे बौखलाए ईरान ने कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दागीं। उधर इसरायल ने भी लेबनान पर ताबड़तोड़ बम बरसाए। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर दबाव बढ़ाने के बीच इस कार्रवाई से संघर्ष विराम पर खतरा और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने दावा किया ईरान ने होर्मुज में चार ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ (ऐसे मानवरहित हवाई वाहन जो लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करने के लिए बनाए जाते हैं) भेजे थे, जिन्हें वक्त रहते मार गिराया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरानी ड्रोन से होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया था इसलिए गोरुक और केशम द्वीपों पर स्थित ईरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत पर बैलिस्टिक मिसाइल दागीं। ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत स्थित अलीब अल सलेम एयरबेस और बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवे बेड़े के मुख्यालय को निशाना बनाया। वहीं, अमेरिका ने किसी भी नुकसान से इनकार किया है।
भाजपा विधायक ग़ैर इरादतन मर्डर में दोषी
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष 2018 में हर्ष फायरिंग में महिला की मौत के मामले में बिहार के साहिबगंज से भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री डा. राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराया है। जागरण के अनुसार विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी करार देने के बाद तुरंत राजू सिंह को हिरासत में लेने का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस ने शाम को उन्हें हिरासत में ले लिया। सजा के बिंदु पर नौ जून को सुनवाई होगी। कोर्ट ने विधायक की पत्नी रेणु सिंह, राणा राजेश सिंह, और रमेंद्र सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है। रेणु सिंह वर्ष 2009 में पूर्वी चंपारण में स्थानीय निकाय से एमएलसी रह चुकी हैं। राजू पर 10 अन्य आपराधिक मामले चल रहे हैं।
चिराग की पार्टी ने अशरफ़ अंसारी को बनाया विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार
लोजपा (रामविलास) ने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अशरफ अंसारी को बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए का उम्मीदवार घोषित किया है। हिन्दुस्तान के अनुसार एनडीए की ओर से विप चुनाव में लोजपा आर को मिली एक सीट पर उम्मीदवारी से उनकी जीत तय है। पार्टी की केंद्रीय संसदीय समिति ने अंसारी के नाम पर स्वीकृति प्रदान की। राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के निर्देश पर यह घोषणा की गई। भभुआ निवासी अशरफ काशी विद्यापीठ से विधि स्नातक हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी: इंस्टाग्राम पर सवा दो करोड़, जंतर मंतर पर दो हज़ार
जागरण के अनुसार इंटरनेट मीडिया से चर्चा में आए अभिजीत दीपके द्वारा गठित काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जंतर-मंतर पर नीट समेत दूसरी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले में विरोध प्रदर्शन किया। इंस्टाग्राम पर ही सवा दो करोड़ से अधिक फालोअर्स वाली काकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन में करीब दो हजार लोग ही पहुंचे। प्रदर्शन को वाम संगठनों आइसा व एसएफआइ के अलावा आप का भी समर्थन मिला। इसमें सुबह 11 से पांच बजे तक की पुलिस ने अनुमति दी थी, लेकिन गर्मी अधिक होने के कारण सवा तीन बजे ही अभिजीत दीपके समेत उनके साथी मंच से चले गए।
कुछ और सुर्खियां:
- घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में ₹29 का इजाफा, पटना में अब 1040 रुपए में मिलेगा
- वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बने
- शेखपुरा जिले में ककराड़ गांव के पास चार बदमाशों ने गन पॉइंट पर स्वर्ण व्यवसाय से 18 लाख के जेवर लूटे
- केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक 8 जून को दिल्ली में
- पटना में फायर ऑडिट में लापरवाह मिले पांच अस्पताल और तीन होटल सील किए जाएंगे
अनछपी: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तारी के मामले में यह कहा है कि पुलिस अपने राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के लिए काम करती है और उसकी वफादारी संविधान से नहीं बल्कि उस पार्टी से होती है जो सरकार चल रही होती है। जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने गाजियाबाद के रहने वाले राजेंद्र त्यागी और दो दूसरे लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में सरकार के कार्रवाई को रद्द कर दिया। आज के दौर में किसी जज के जरिए कही गई ऐसी बात को हिम्मत की बात माना जाएगा और यह देखना दिलचस्प होगा कि जस्टिस दिवाकर अब कितने दिनों तक यहां टिक पाते हैं और यह भी कि क्या उनका ट्रांसफर तो नहीं कर दिया जाएगा। जस्टिस दिवाकर ने वैसे तो यह टिप्पणी पुलिस पर की है लेकिन यह असली सवाल सरकार चला रहे नेताओं के बारे में है क्योंकि पुलिस अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकती। पुलिस तो वही करती है जो सरकार उसे करवाना चाहती है। अगर सरकार ही अपने अधिकारियों की वफादारी संविधान के बदले अपनी पार्टी के प्रति रखना चाहती है तो यह शायद लोकतंत्र के लिए सबसे गंभीर मामला है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि फील्ड के अफसर ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग इकोनामी’ ध्यान में रखकर आचरण तय करते हैं और ‘राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के लिए काम करते हैं। जज ने कहा कि यह कड़वा सच है कि कई सरकारों में राज्य की प्रशासनिक मशीनरी राजनीतिक घुसपैठ का शिकार रही है। ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन मेरिट के आधार पर न होकर राजनीतिक सरपरस्ती के औजार बन गए हैं। वफादार अफसरों को मलाईदार जिले इनाम में मिलते हैं, जबकि स्वतंत्रता से काम करने वाले अफसरों को महत्वहीन जगहों पर भेज दिया जाता है। कोर्ट ने लक्ष्य साध कर की गई कार्रवाई पर भी चिंता जताई। मुठभेड़, चुनिंदा क्रैकडाउन और ‘असुविधाजनक’ माने जाने वाले लोगों के खिलाफ यूपी गैंग्सटर एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट 1986 के दुरुपयोग पर टिप्पणी की।
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