बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले के 100 दिन पूरे हुए लेकिन युद्धविराम के बावजूद हमले जारी हैं। अरवल और औरंगाबाद में दो अलग-अलग सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत हो गई। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत चार दिनों के दौरे पर बिहार पहुंचे हैं जिनकी अगवानी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की।
और, ट्रैफिक पुलिस में 35 की उम्र के पार के सिपाही तैनात नहीं होंगे।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष के रविवार को सौ दिन पूरे हो गए। दिनभर राजनीतिक बयानबाजी से जहां माहौल गरमाया रहा, वहीं देर रात ईरान ने इसराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दीं। अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए युद्धविराम के बाद से यह इस तरह का पहला हमला है, जिससे युद्ध समाप्त करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास और जटिल हो गए हैं। इसराइल के शहरों में सायरन की आवाजें सुनी जा रही हैं। लेबनान की राजधानी पर हमला नहीं करने के वाशिंगटन के अनुरोध को नजरअंदाज करते हुए इसराइल ने रविवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला किया, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। दोनों देशों के बीच मामला बिगड़ते देख इस हमले की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दे दी गई है।
ट्रंप और नेतन्याहू में तल्खी बढ़ी
अमेरिका और इसराइल के बीच दशकों पुराने रिश्तों में इन दिनों एक अजीब सी खामोशी और अविश्वास की बर्फ जमती दिख रही है। वाशिंगटन से आई एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने इसराइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताएं इस हद तक बढ़ा दी हैं कि उसने आंतरिक रूप से इसराइल के काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को बढाकर ‘क्रिटिकल’ (गंभीर स्तर तक) कर दिया है। यह अमेरिकी रक्षा विभाग का सबसे ऊंचा चेतावनी स्तर है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी संघर्ष और पश्चिम एशिया की नीति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेद खुलकर सतह पर आ गए हैं।
कार नहर में गिरी, 4 लोगों की मौत
भास्कर के अनुसार अरवल-पटना नहर रोड पर गांधी मैदान के पास रविवार रात 11 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। अरवल विधायक से मिलने आए पटना के चार युवकों की कार नहर में गिरने से मौत हो गई। कार में सवार ड्राइवर रोहित तैरकर बाहर निकल गया। सभी मृतक पटना जिले के रहने वाले थे। इनमें से तीन की पहचान बिहटा के रिशांक, मनोज और कंकड़बाग के अमन के रूप में हुई है। चौथे की पहचान की कोशिश जारी है। ड्राइवर ने बताया कि कार की रफ्तार करीब 100 किमी/घंटा थी। रात में अचानक सामने आए मोड़ पर वह नियंत्रण खो बैठा और टाटा सफारी सीधे गहरे पानी में जा गिरी।
औरंगाबाद में ट्रैक्टर से कार भिड़ी, 3 की मौत
औरंगाबाद जिले के गोह थाना क्षेत्र के गया-दाउदनगर एनएच-120 पर दधपी मोड़ के समीप रविवार को एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ, जब मेला घूमकर लौट रहे परिवार की कार बालू लदे ट्रैक्टर से पीछे से जा टकराई। टक्कर से कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। घायलों का इलाज चल रहा है। इनमें दो की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
कब्रिस्तानों की घेराबंदी को मिले 6.60 करोड़ रुपये
बिहार सरकार ने 2026-27 में कब्रिस्तानों की घेराबंदी को लेकर 6.60 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दी है। हिन्दुस्तान के अनुसार गृह विभाग (विशेष शाखा) के मुताबिक यह राशि स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के विभिन्न कार्य प्रमंडलों को दी गयी है। इसमें औरंगाबाद को 71 लाख, अररिया को 50 लाख, पटना, भागलपुर, बेगूसराय को 35-35 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। स्वीकृत राशि योजना एवं विकास विभाग के माध्यम से संबंधित जिलाधिकारियों को भेजी जायेगी।
आरएसएस प्रमुख बिहार के दौरे पर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत रविवार को अपने चार दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे, जहां हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा-आरएसएस के नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे कड़ी सुरक्षा के बीच सीधे मुंगेर के पुरानीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर पहुंचे, जहां वे ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ में शामिल होकर शिक्षार्थियों को संबोधित करेंगे। तीन दिनों के प्रवास के बाद 10 जून को वापस लौटेंगे। दक्षिण बिहार के आरएसएस प्रांत प्रचार प्रमुख अभिषेक कुमार ने बताया कि सरसंघचालक सुबह पटना पहुंचे और यहां से वे सीधे मुंगेर रवाना हो गए। आरएसएस का कार्यकर्ता विकास वर्ग मुंगेर में 24 मई से चल रहा है। इस वर्ग में उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के 128 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस में 35 की उम्र के पार के सिपाही तैनात नहीं होंगे
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार के यातायात थानों में अब 35 से अधिक उम्र के सिपाही तैनात नहीं किये जायेंगे। साथ ही हर जिले के ट्रैफिक बल का न्यूनतम एक तिहाई भाग महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों में स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था का मानक तय करते हुए पुलिस अधीक्षकों को सख्ती से इसके अनुपालन का निर्देश दिया है। शहरों में यातायात प्रबंधन के बढ़ते दबाव की चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है। बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा तय किये गये मानकों के मुताबिक, ट्रैफिक थानों में तैनात सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक का कार्यकाल न्यूनतम तीन वर्षों का होगा। हालांकि, एक जिले में किसी भी परिस्थिति में उनका कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक विस्तारित नहीं होगा। ट्रैफिक थानों में हर पद के लिए अधिकतम मानक उम्र तय कर दिया गया है। तैनाती के दौरान यह देखा जायेगा कि दारोगा की 40 वर्ष, एएसआई व हवलदार की 55 वर्ष तथा इंस्पेक्टर की 50 वर्ष से अधिक उम्र न हो।
कुछ और सुर्खियां:
- मधुबनी के ठाहर गांव में मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के काफिले पर ग्रामीणों ने धावा बोला
- फायर ब्रिगेड ने खान कोचिंग और अस्पताल को फायर सेफ्टी के मामले में नोटिस भेजा
- पटना के पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया के एशियन हॉस्पिटल की छठी मंजिल से कूद कर इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस के दारोगा विजय सिंह ने जान दी
- भागलपुर के विक्रमशिला पुल पर बेली ब्रिज से छोटी गाड़ियों की आवाजाही शुरू हुई
अनछपी: कागज पर लिखा कानून और जमीन पर उसके अमल में कितना फर्क होता है इसका एक अंदाजा अभी लगाया जा सकता है जब होटल और अस्पताल में आग लगने के बाद पटना और बिहार के दूसरे इलाकों में सेफ्टी ऑडिट की बात की जा रही है और धड़ाधड़ नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसी कड़ी में खान कोचिंग सेंटर और इसके संचालक द्वारा स्थापित अस्पताल को भी फायर सेफ्टी का नोटिस भेजा गया है और 15 दिनों में जवाब मांगा गया है। एक तरह से उन्हें मौका दिया गया है कि 15 दिनों के अंदर फायर एनओसी के लिए जरूरी इंतजाम कर ले वरना उनके कोचिंग और अस्पताल दोनों को बंद कर दिया जाएगा। यह बहुत अच्छी बात है कि ऐसा नोटिस दिया गया है लेकिन इसके साथ एक और अच्छी बात यह होती कि इस तरह के एनओसी के बिना बिहार में और खासकर पटना में कितने अस्पताल और होटल चल रहे हैं, इसकी भी एक लिस्ट जारी कर दी जाती। अगर यह भी बताया जाता कि इससे पहले पिछले 10 सालों में कब-कब कहां-कहां आग लगी है और उसके बाद फायर ब्रिगेड वालों ने क्या कार्रवाई की है तो बिहार की जनता पर बड़ा एहसान होता। और सबसे जरूरी कार्रवाई यह है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों से यह पूछा जाता कि जब सभी अस्पतालों, होटलों और दूसरी जगहों के लिए फायर का एनएससी देना है तो उन्होंने क्यों लापरवाही बरती और कैसे बिना एनओसी के इतने सारे होटल और अस्पताल चल रहे हैं? जब तक सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी ऐसे तमाम मामलों में लीपापोती के अलावा कुछ हासिल होने वाला नहीं है।
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