बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका ने बुधवार को ओमान के तट पर जिस पोत पर हमला किया था उसमें लापता तीन भारतीयों की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फ़ॉर यू-टर्न लेते हुए ईरान पर बड़े हमले को टाल दिया है। चपरासी से अकाउंटेंट बने एक अधिकारी के पास आय से 200 फीसद अधिक संपत्ति होने के मामले में छापेमारी की गयी है।
और, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- घर संभालने वाली महिलाओं को हाउसमेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता कहा जाना चाहिए।
पहली ख़बर
ओमान तट के निकट गुरुवार को फिर एक वाणिज्यिक पोत ‘एमटी जलवीर’ पर अमेरिका ने हमला किया। इस पोत पर 20 भारतीय चालक दल सदस्य सवार थे। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। सभी 20 भारतीयों को सकुशल बचा लिया है। पिछले चार दिनों में भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक पोतों पर हमला हमला हो चुका है। इस बीच, विदेश मंत्रालय ने कहा कि बुधवार को जिस पोत पर हमला हुआ था, उसमें लापता तीन भारतीयों की मौत हो गई है। उनके शव भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ओमाट तट के निकट सोमवार से गुरुवार तक के चार दिनों में भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक पोतों पर हमला हो चुका है। ये तीनों टैंकर थे, लेकिन ये भारतीय झंडे वाले पोत नहीं हैं यानि ये दूसरे देशों के हैं। पर तीनों में ज्यादातर चालक दल के सदस्य भारतीय थे। बुधवार को सेटेबेलो पोत पर हुए हमले के बाद भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध भी दर्ज कराया था, लेकिन अगले ही दिन फिर एक पोत पर हमला हुआ।
ईरान पर तगड़ा हमला करने की धमकी देकर पलटे ट्रंप
जागरण के अनुसार फारस की खाड़ी और पूरे पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हुए हमलों ने क्षेत्र को व्यापक युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि गुरुवार रात अमेरिकी सेना ईरान पर बहुत घातक हमले करेगी और उसके तेल उद्योग की रीढ़ ‘खार्ग द्वीप’ पर कब्जा कर लेगा। हालांकि, कुछ घंटों बाद ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए हमले की योजना रद कर दी। ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम रेजाई ने कहा कि अमेरिका को “पहले से कहीं अधिक कड़े और दर्दनाक जवाब” का सामना करना पड़ेगा।
कमाई 50 लाख, संपत्ति 2 करोड़ की कहां से आई
प्रभात ख़बर के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने हाजीपुर नगर परिषद कार्यालय के लेखापाल (अकाउंटेंट) मनीष कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. मनीष कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले. जांच में उनके पास कुल 2 करोड़ 2 लाख 31 हजार 500 रुपये की ऐसी संपत्ति मिलने का दावा किया गया है, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में 208.57% अधिक है. जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने 10 जून को मामला दर्ज किया और विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट लिया. इसके बाद गुरुवार सुबह मनीष कुमार के हाजीपुर स्थित बागमली आवासीय परिसर में स्थित आवास और हाजीपुर नगर परिषद कार्यालय में उनके कार्यालय कक्ष समेत कुल दो स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया गया. मनीष कुमार नगर परिषद कार्यालय, हाजीपुर में सहायक के पद पर वर्ष 20 में नियुक्त हुये. उसके बाद उसी कार्यात में प्रोन्नति के बाद लेखापाल के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें वर्ष 2011 में सरकारी सेवा में आने के बाद लगभग 50 लाख रुप वेतन मद में मिले हैं. इस प्रकार इनके अर्जित संपत्ति इनके ज्ञात व वैध स्रोत आय से काफी अधिक है.
विधान परिषद के सभी दस प्रत्याशी विजयी
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार विधानपरिषद चुनाव में सभी दस उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। गुरुवार को तीन बजे नाम वापसी की अवधि खत्म होते ही सभी उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया। इनमें जदयू और भाजपा के चार-चार जबकि लोजपा (रा) और राजद के एक-एक उम्मीदवार शामिल हैं। निर्वाचित होने वालों में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद के अलावा भाजपा से संजय प्रकाश मयूख, पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित जबकि लोजपा के अशरफ अंसारी और राजद के सुनील सिंह शामिल हैं। जदयू के ललन ने उपचुनाव जबकि शेष सभी ने द्विवार्षिक चुनाव के तहत सोमवार को नामांकन दर्ज किया था।
एनडीए के 19 उम्मीदवार राज्यसभा के लिए चुने गए
राज्यसभा के लिए गुरुवार को हुए चुनाव में 24 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हैं। राज्यसभा की 27 सीटों में से तीन को छोड़कर बाकी सीटों पर फैसला हो गया। एनडीए के 19 और कांग्रेस के पांच प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। राजस्थान से भाजपा के सतीश पूनिया, अलका गुर्जर, कांग्रेस के नीरज डांगी को निर्विरोध चुना गया। दूसरी ओर, कर्नाटक से कांग्रेस के मंसूर अली खान, पवन खेड़ा और भाजपा के एम. नागराज राज्यसभा पहुंचे।
हाउस मेकर नहीं- राष्ट्र निर्माता- 30 हज़ार मासिक का काम: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने घर संभालने वाली महिलाओं यानी गृहिणियों के बारे में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने गृहिणियों के योगदान को मान्यता देते हुए कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को हाउसमेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता कहा जाना चाहिए। अगर सड़क दुर्घटना में किसी गृहिणी की मौत का मामला होगा, जहां महिला की कोई आय नहीं है, तो मुआवजा तय करते समय घरेलू देखभाल के नुकसान का मद अलग से जोड़ा जाएगा। महिला के घरेलू देखभाल करने के काम की कीमत 30 हजार रुपये मासिक मानी जाएगी और उसी आधार पर मुआवजा तय किया जाएगा।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर जो गंभीर आरोप लगते रहे हैं उनमें यह आरोप भी प्रमुख हैं कि उनकी सरकार ने विपक्ष के नेताओं के साथ-साथ प्रेस को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का बेहद गलत इस्तेमाल किया जिसमें ईडी और सीबीआई प्रमुख हैं। ताजा मामला न्यूज क्लिक के संपादक का है जिन्हें विदेशी फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और इसकी वजह से न्यूज क्लिक के पत्रकारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। याद रहे कि विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा न्यूजक्लिक वेबसाइट और इसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ एफआईआर और ईडी ने भी कार्रवाई की थी। इन दोनों कार्रवाइयों को रद्द करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाया है। पुरकायस्थ पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने यहां तक कहा कि ईडी ने स्वतंत्र पत्रकारिता के विरुद्ध अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। जो बात दिल्ली हाईकोर्ट ने कही है वही बात नागरिक संगठन भी वर्षों से कहते आ रहे हैं। मोदी सरकार पर प्रेस को दबाने के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप प्रमुख रहा है लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को भी खारिज कर दिया। सरकारी एजेंसियां इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट से क्या फैसला आता है लेकिन फिलहाल सवाल यह है कि इतने दिनों तक न्यूजक्लिक और उसके संपादकों और संवाददाताओं के साथ जो कुछ अन्य हुआ उसकी भरपाई कैसे होगी? अफसोस की बात यह है कि केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं बल्कि बहुत से मीडिया चैनलों ने भी न्यूजक्लिक के बारे में यह अफवाह फैलाई के वह चीन से पैसे लेकर पत्रकारिता करता है। भारत की जनता को यह सोचना होगा कि आखिर ऐसे अन्ययाओं के खिलाफ अगर वह खड़े नहीं होते हैं तो देश में पत्रकारिता का भविष्य क्या होगा।
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