छ्पी-अनछपी: बिहार पुलिस का क्रैकडाउन, नीट पेपर लीक 2024 में क्लीन चिट

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार पुलिस ने नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर क्रैकडाउन शुरू किया है और पुलिस फायरिंग भी हुई है। नीट पेपर लीक मामले में हम मुलजिम संजीव मुखिया को सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक पर और सख्त कानून लाने का वादा किया है। न सड़क, न नदी लेकिन मोतिहारी और अररिया में बन गए तीन करोड़ के पुल।

और, बिहार सरकार के 4th ग्रेड एंप्लॉय के पास एक करोड़ से ज्यादा की काली कमाई। 

पहली ख़बर

नीट पेपर लीक के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन करने करने वाले पटना विवि छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु कुमार समेत 57 को गिरफ्तार किया गया। इन्हें पुलिस उपद्रवी बता रही है। हिंदुस्तान के अनुसार ‘उपद्रवियों’ की 177 तस्वीर जारी की गई है। कोतवाली, सचिवालय, गांधी मैदान और शास्त्री नगर थाने में कुल 21 एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें 268 नामजद व तीन हजार अज्ञात हैं। आधा दर्जन से अधिक हिरासत में लिए गए छात्रों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। कोतवाली थाने में छह, गांधी मैदान थाने में तीन, शास्त्रीनगर में एक और सचिवालय थाने में एक एफआईआर हुई है। 11 केस पुलिस और 10 केस मजिस्ट्रेट के बयान पर दर्ज किए गए हैं। आम लोगों ने भी गाड़ी में तोड़फोड़ और मारपीट इत्यादि की 10 एफआईआर दर्ज कराई है। पटना के अलावा कई जिलों की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को उपद्रवी बताते हुए उनकी तस्वीर जारी की है और उनकी गिरफ्तारी में आम लोगों की मदद मांगी है। 

जहानाबाद में फायरिंग

प्रभात ख़बर के अनुसार जहानाबाद में प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया. इससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गये. इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 30 राउंड फायरिंग की. (हालांकि कुछ समाचार माध्यमों को कहना है कि 50 से 100 राउंड तक फायरिंग की है) प्रदर्शनकारी डीएम आवास के समीप पटना-गया रेलवे ट्रैक पर पहुंच गये और प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों तथा जिलाधिकारी आवास पर पथराव कर दिया और डीएम आवास के बाहर लगा नेम प्लेट आदि को क्षतिग्रस्त कर दिया.

नीट पेपर लीक 2024 में क्लीन चिट

प्रभात ख़बर के अनुसार सीबीआइ ने 2024 के नीट यूजी परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में जेल में बंद संजीव मुखिया उर्फ लुटन मुखिया को बड़ी राहत दे दी है. सीबीआइ ने पटना की विशेष अदालत में गुरुवार को 45 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है. इसमें कहा गया है कि उसे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2024 का प्रश्नपत्र चोरी होने या उसके वितरण में संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया की भूमिका साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है. सीबीआइ ने अपने बयान में कहा कि 2024 में बिहार पुलिस ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र की चोरी का पता लगाया और मामला दर्ज किया. सीबीआइ के अनुसार संजीव मुखिया उस दौरान फरार था. बाद में बिहार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. चूंकि वह प्राथमिकी में नामजद आरोपी था, इसलिए सीबीआई ने नीट-यूजी 2024 मामले में पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लिया. जाँच के दौरान इस मामले में उसकी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए सीबीआइ ने संजीव मुखिया के खिलाफ कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किया और उसे नीट-यूजी 2024 मामले में जमानत मिल गयी. 

पेपर लीक पर और सख्त कानून लाने का वादा

भास्कर के अनुसार नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात 9 बजे से लेकर करीब 1 बजे तक बड़े घटनाक्रम हुए। पहले शिक्षा मंत्रालय के दो बड़े अधिकारी बदले गए। फिर रात करीब 12 बजे पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया। इसमें कहा, ‘मैंने आज (23 जुलाई को) अधिकारियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रावधान वाला विधेयक तैयार करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने देर रात उसका मसौदा मुझे सौंप दिया। शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रयास रहेगा कि इस विधेयक को जल्द से जल्द सदन से पारित कराया जाए।’ इसके बाद, केंद्रीय मंत्री मेदांता पहुंचे और वांगचुक का अनशन तुड़वाया। वांगचुक ने कहा, यह फैसला विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए लिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी का आज देश भर में प्रदर्शन

हिन्दुस्तान के अनुसार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में शुक्रवार को छात्रों, युवाओं और अभिभावकों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। पार्टी की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। पार्टी के अनुसार, शुक्रवार को देशभर में ‘हर जिला, एक दिन, एक मांग’ के नारे के साथ सभाओं और विरोध-प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं में शामिल होने वाले लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों-युवाओं की मांगों को पढ़ेंगे और पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों, अभिभावकों के समर्थन में एकजुटता दिखाएंगे। 

न सड़क, न नदी लेकिन मोतिहारी और अररिया में बन गए तीन करोड़ के पुल

ग्रामीण कार्य विभाग ने बिना सड़क या नदी के ही पूर्वी चंपारण के बेतौना और अररिया के थापकोल गांव में पुल बना दिया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक परीक्षक की ओर से गुरुवार को बिहार विधानसभा में पेश रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। इन दोनों पुलों पर सरकारी खजाने के 3 करोड़ 30 लाख रुपये बर्बाद हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चंपारण के बेतौना गांव की नोनिया टोली में श्याम जी महतो के घर के नजदीक पुल का निर्माण किया गया। इसके दोनों ओर 125 मीटर और 120 मीटर लंबाई वाली संपर्क सड़क का निर्माण होना था। 

4th ग्रेड एंप्लॉय के पास एक करोड़ से ज्यादा की काली कमाई

भास्कर के अनुसार भोजपुर के गड़हनी वेटनरी अस्पताल का एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी करोड़पति निकला है। अस्पताल में तैनात कर्मी शिवानंद कुमार सिंह के पास आय से अधिक संपत्ति मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। निगरानी टीम ने गुरुवार को शिवानंद के कार्यालय और आवास समेत तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में करोड़ों की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, शिवानंद पर अपनी आय से 253.8 फीसदी अधिक चल-अचल संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। उस पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 62 हजार 777 रुपए के डीए का केस दर्ज है। एक साधारण वेतन पाने वाले चतुर्थ वर्गीय कर्मी के पास इतनी संपत्ति देखकर जांच टीम भी हैरान रह गई। शिवानंद भोजपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अलीपुर गांव का रहने वाला है। निगरानी की टीम को छापेमारी के दौरान शिवानंद और उसकी पत्नी चांदनी सिंह के नाम पर जमीन खरीदने और बेचने के 34 डीड (दस्तावेज) मिले हैं। इन जमीनों की सरकारी कीमत करीब 1 करोड़ 11 लाख 76 हजार 250 रुपए है। इसके अलावा उसके ठिकाने से एक महिंद्रा थार गाड़ी और दो बाइक के कागजात भी मिले हैं, जिनकी कीमत 17.24 लाख आंकी गई है। 

कुछ और सुर्खियां:

  • छात्रों के आंदोलन के मद्देनजर बिहार में सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां आज से रद्द रहेंगी
  • भोजपुर मुठभेड़ के मामले में पटना हाई कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डाटा सुरक्षित रखने का आदेश दिया
  • पटना यूनिवर्सिटी ऐक्ट में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में शिक्षकों और कर्मचारियों व छात्रों का मार्च

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आधी रात एक सेल्फी मोड का वीडियो जारी कर यह बताया कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए और गुनहगारों को सजा देने के लिए और कड़े कानून बनाने जा रही है। सबसे पहला सवाल यह है कि अगर सरकार वाकई इस मामले में इतनी गंभीर थी तो उसने देश में इतने बड़े आंदोलन और उससे पहले दो दर्जन छात्र-छात्राओं की आत्महत्या का इंतजार क्यों किया? यह बात आसानी से समझ में आने वाली है कि सरकार पेपर लीक रोकने के प्रति गंभीर नहीं थी बल्कि इसकी वजह से हो रहे आंदोलन से सरकार की छवि को जो नुकसान हुआ है यह उसकी भरपाई की कोशिश है। यह कोशिश कितनी कामयाब होगी यह तो समय आने पर पता चलेगा लेकिन शायद प्रधानमंत्री इस बात को अहमियत नहीं दे रहे हैं कि जो पीड़ित छात्र समुदाय है उसके लिए इस समय सबसे बड़ी मांग यह है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। जहां तक नए कानून बनाने का सवाल है तो शायद कानून बनाने से ज्यादा जरूरी यह बात थी कि जो कानून बना हुआ है उसे सही से लागू किया जाए। मैं कानून बनाने की बात इसलिए मजाक साबित हुई क्योंकि प्रधानमंत्री के ऐलान से कुछ ही घंटा पहले देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने उसे संजीव मुखिया को नीट पेपर लीक 2024 के मामले में बेकसूर बता दिया जिसके लिए बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने काफी सबूत जुटाए थे और बाद में केंद्र सरकार ने इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया था। बिहार में संजीव मुखिया का नाम कई दूसरे पेपर लीक में शामिल है और अगर सीबीआई ने यह कहा है कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है तो यह एक गंभीर सवाल है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सीबीआई निकम्मी है या सीबीआई के राजनीतिक आका यह चाहते हैं कि संजीव मुखिया को बेकसूर साबित कर दरअसल नीट पेपर लीक के मामले को ही रफा दफा कर दिया जाए। इसीलिए यह बात दोहराई जानी चाहिए कि भारत को अपराध रोकने के लिए आमतौर पर और पेपर लीक को रोकने के लिए खास तौर पर किसी नए कानून से ज्यादा जरूरी यह बात है कि जो कानून है उसे सही से लागू किया जाए। 

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