बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। गुजरात की सूरत पुलिस ने पटना से ऐसे चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने लगभग 125 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि उनके काम की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल सो नहीं पा रहे हैं। नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया है। मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी।
और, भाजपा ने लोकसभा में बिना चर्चा के पास करवा लिए 11 बिल।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान की खास खबर में बताया गया है कि सूरत में हुई महज पांच लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच से 125 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता चला है। सूरत पुलिस ने जामताड़ा और देवघर से पीछा करते हुए पटना जंक्शन इलाका स्थित एक होटल में छापेमारी कर इसमें शामिल चार साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ भी किया। पकड़े गए शातिरों में जहुरुल अंसारी उर्फ चांद (35) जामताड़ा, राजन कुमार सोनी (19) औरंगाबाद, आदित्य राज उर्फ अमन (19) रोहतास और समीर अंसारी उर्फ शक्तिमान (28) नारायणपुर जामताड़ा शामिल हैं। गिरोह से जुड़े शातिरों ने 336 फर्जी संदिग्ध एपीके फाइलों को 31 हजार 174 मोबाइल में डाउनलोड कराया। इसके बाद पांच हजार 613 लोगों के बैंक खातों से एक लाख छह हजार 643 ट्रांजेक्शन से करीब 125 करोड़ रुपये की निकासी की गई। कोतवाली थानेदार अजय कुमार ने बताया कि गिरफ्तार साइबर ठगों को सूरत साइबर अपराध पुलिस अपने साथ ले गई है। बता दें कि एक व्यक्ति ने करीब पांच लाख रुपये की साइबर ठगी का केस सूरत साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराया था।
राहुल बोले- प्रधानमंत्री मोदी आजकल रात में सो नहीं पाते
प्रभात खबर के अनुसार दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर लोगों को अपनी बात रखने से रोकने का आरोप लगाया. राहुल गांधी ने कहा कि उनका काम बेहद आसान है और उनकी कोशिशें सरकार को परेशान कर सकती हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात में सो नहीं पाते. राहुल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कभी चाणक्य और सरदार पटेल जैसे नामों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वह संसद भवन मैं प्रवेश तक नहीं कर पाये.
नीट पेपर लीक का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
जागरण के अनुसार इस साल मई में आयोजित नीट-यूजी और फिर जून में ली गई री-नीट यूजी में धांधली करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड डा. उज्ज्वल राज और डा. रविशंकर उर्फ सम्राट को बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना से गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों की निशानदेही पर गिरोह के सदस्य एवं डा. रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह परीक्षा में असली अभ्यर्थी की जगह स्कॉलर बैठाकर, बायोमीट्रिक सत्यापन को चकमा देकर और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करा चुका है। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। इओई के अनुसार डा. उज्ज्वल राज को 11 अगस्त, जबकि डा. रविशंकर को 12 अगस्त को पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की पूरक परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया है। दोनों ही नालंदा के पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के एमबीबीएस फाइनल ईयर के विद्यार्थी हैं और थर्ड ईयर की पूरक परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षा देने पहुंचे थे।
मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी
प्रभात खबर के अनुसार बिहार सरकार भोजपुर जिले के बिलौटी में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारे गये भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी. इसके साथ ही परिवार को आर्थिक सहायता भी दी जायेगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को यह जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में कहा कि सरकार शोकाकुल परिवार को आर्थिक सहायता देगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दीगी. इसके पहले भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गयी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया है. दो महीन पहले जून में भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ में तिवारी की मौत के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था. पुलिस द्वारा बल प्रयोग किये जाने को लेकर सवाल उठे थे और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गयी थी. बिहार सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिये थे. न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अगुवाई में न्यायिक जांच आयोग गठित की गयी थी.
भाजपा ने लोकसभा में बिना चर्चा के पास करवा लिए 11 बिल
जागरण के अनुसार संसद का मानसून सत्र पूरी तरह से धुल गया। दोनों सदनों में कुल 12 विधेयक पास हुए, जिनमें लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पास हुए। गृह मंत्री अमित शाह की अंतिम समय में गतिरोध तोड़ने की कोशिश भी सफल नहीं रही। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ गए। संसद में गतिरोध के लिए नेता प्रतिपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी के अहंकार, अनुशासनहीनता और उदंडता ने मानसून सत्र की बलि ले ली। सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संकेत करते हुए कांग्रेस के पवन खेड़ा और अन्य विपक्षी सांसदों का स्टफ्ड मंकी के साथ संसद परिसर में प्रदर्शन और “56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर नारे से संसद की गरिमा में गिरावट का नया अध्याय लिखा गया। विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: मौजूदा केंद्र सरकार के दौर में देश की विभिन्न संस्थाओं में किस तरह की गिरावट आई है इसका एक ताजा उदाहरण बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआई) ने गुरुवार को दिया। बीसीआई ने पहले सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे नालसर यूनिवर्सिटी आफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के किसी भी स्नातक का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण (एनरोलमेंट) न करें, लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद इंटरनेट मीडिया पर चले जबरदस्त विरोध के बाद अपना फैसला पलट दिया। ध्यान रहे की नालसर के इस साल पास होने वाले छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत के रवैया के खिलाफ कन्वोकेशन में उन्हें बुलाने से रोकने के लिए चिट्ठी लिखी थी। इन छात्रों की शिकायत थी कि छात्रों के आंदोलन पर जस्टिस सूर्यकांत का रवैया सही नहीं था। इधर, बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने पहले बयान में कहा था कि वे देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में भागीदारी के खिलाफ चलाए गए अभियान के संबंध में आरोपों की जांच कर रहे हैं और उन्होंने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए एक रिपोर्ट मांगी है। तो इस तरह छात्रों के विरोध को दबाने के लिए बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने तानाशाही भरा फरमान सुना दिया था। इसके बाद उनका भारी विरोध हुआ। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने भी बीसीआई के इस फैसले का विरोध किया। बीसीआई ने बाद में माना कि जांच में सामने आया है कि ज्यादातर छात्र बेकसूर हैं और उनका उद्देश्य देश के मुख्य न्यायाधीश का अपमान करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल होना नहीं था। बहरहाल मनन मिश्रा ने बाद में गलती सुधारने की जो कोशिश की उससे उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि अब उनके इस्तीफ़े की मांग की जा रही है और उनकी गतिविधियों की जांच की भी मांग हो रही है। उनका इस्तीफा और उनके मामलों की जांच दोनों बेहद जरूरी है।
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