बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। फरवरी में शुरू होने वाली जनगणना में जाति सहित कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इतिहास विभाग के पीजी थर्ड सेमेस्टर के पाठ्यक्रम से दिल्ली सल्तनत समेत कई महत्वपूर्ण विषयों को फिलहाल हटा दिया है। बिहार के 30000 जरूरतमंद भूमिहीन परिवार को आज जमीन का हक मिलेगा। गया में कुएं में उतरे पिता पुत्र समेत चार लोगों की दम घुटने से मौत।
और, खगड़िया के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास 4 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, हो रही काली कमाई की जांच।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार अगले साल फरवरी में होने वाली जनगणना में जाति सहित कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। धर्म के तत्काल बाद 10वां सवाल जाति का होगा। वैसे गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन मुसलमानों से भी धर्म के साथ-साथ उनकी जाति पूछी जाएगी। इसके अलावा व्यक्ति को अपने माता-पिता का पूर्ण विवरण, स्थायी निवास, पूर्व निवास और स्थान परिवर्तन का कारण बताते हुए अपने जन्म स्थान की भी जानकारी देनी होगी। पहले जनगणना में जन्म स्थान की अलग से जानकारी नहीं ली जाती थी। दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना के तहत पहली बार सारी जानकारी डिजिटल रिकार्ड की जाएगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास कोर्स से दिल्ली सल्तनत हटाई गई
हिन्दुस्तान के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने इतिहास विभाग के परास्नातक (पीजी) तीसरे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम से दिल्ली सल्तनत समेत कई महत्वपूर्ण विषयों को फिलहाल हटा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन विषयों को समीक्षा के लिए वापस विभाग को भेजा है। सात अगस्त को जारी अधिसूचना में इन पेपर्स को शामिल नहीं किए जाने पर इतिहास विभाग के शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन प्रमुख विषयों को समीक्षा के लिए भेजा: दिल्ली विश्वविद्यालय ने मध्यकालीन उत्तर भारत में दिल्ली सल्तनतः सत्ता की संरचनाएं (13वीं-14वीं शताब्दी), उत्तर भारत का इतिहास, लगभग 1400-1550 ईस्वी, प्राचीन भारत में राजनीतिक प्रक्रियाएं और राज्य-व्यवस्थाओं की संरचना और प्रारंभिक भारत में लिंग व महिलाएं : 1500 ईसा पूर्व-1000 ईस्वी को फिलहाल समीक्षा के लिए भेजा है। इस पर भी आने वाले दिनों में सार्थक निर्णय लिया जाएगा।
बिहार के 30000 जरूरतमंद भूमिहीन परिवार को आज जमीन का हक मिलेगा
भास्कर के अनुसार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज सरकार गरीबों के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के 30 हजार जरूरतमंद भूमिहीन परिवारों को भूमि बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे। यह वितरण अभियान बसेरा-2 के तहत किया जाएगा। इसके लिए राज्य के सभी जिलों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। 15 अगस्त को सभी जिलों में राजकीय झंडोत्तोलन समारोह के बाद विशेष शिविर लगाकर चयनित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र बांटे जाएंगे। इस अवसर पर जिलों के प्रभारी मंत्री, अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। वे अपने हाथों से गरीबों को जमीन के अधिकार पत्र सौंपेंगे।
मोहम्मद अफसर को मिला गैलंट्री अवॉर्ड
जागरण के अनुसार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बिहार पुलिस को 18 पदक दिए गए हैं। बेउर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मोहम्मद अफसर हुसैन को गैलेंट्री मेडल (वीरता पदक) देने की घोषणा की गई है। वर्तमान में विशेष शाखा में पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) संजय कुमार और मुजफ्फरपुर रेल की पुलिस अधीक्षक (एसपी) बीणा कुमारी को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक के लिए चुना गया है। इसके अलावा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीआइजी राकेश कुमार सिन्हा और एसपी इम्तियाज अहमद समेत 15 पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के लिए सराहनीय पदक की घोषणा की गई है। पिछले साल 2025 में बिहार पुलिस को कुल 15 पदक मिले थे।
गया में कुएं में उतरे पिता पुत्र समेत चार लोगों की दम घुटने से मौत
भास्कर के अनुसार गया जिले के डोभी थाना क्षेत्र की नावाडीह पंचायत के गढ़ करमौनी गांव में शुक्रवार सुबह दर्दनाक हादसे में पिता-पुत्र समेत चार लोगों की मौत हो गई। धान के खेत की पटवन के लिए कुएं में कृषि पंप का सक्शन पाइप डालने उतरे 38 वर्षीय विजय चौधरी का दम घुटने लगा। उन्हें बचाने उतरे 50 वर्षीय दिलचंद मांझी और 60 वर्षीय चमारी मांझी भी कुएं में बेहोश हो गए। इसके बाद पिता को बचाने के लिए कुएं में उतरे विजय के 25 वर्षीय पुत्र आकाश विकास कुमार चौधरी की भी दम घुटने से मौत हो गई। करीब 30 फीट गहरे कुएं में जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी को हाथ से का संभावित कारण माना जा रहा है।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास 4 करोड़ की संपत्ति, हो रही काली कमाई की जांच
प्रभात खबर के अनुसार पथ निर्माण विभाग खगड़िया के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के पटना नालंदा और खगड़िया में तीन ठिकानों पर शुक्रवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति मामले में छापेमारी की. इस दौरान कार्यपालक अभियंता के पास से चार करोड़ 17 लाख 67 हजार रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है. इनमें तीन करोड़ 16 लाख 67 हजार रुपये की जमीन और गहने शामिल हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि अभियंता के पास से फिलहाल एक करोड़ एक लाख एक हजार रुपये आय से अधिक संपत्ति मिली है. ये राशि उनकी वास्तविक आय से 61% अधिक है. उनके आवास से सोने और चांदी के 19 लाख 53 हजार 574 रुपये के गहने मिले हैं. इसके अलावा बिहारशरीफ में एक तीन मंजिला भवन का भी खुलासा हुआ है. 1 लाख 29 हजार रुपये नगद भी बरामद किये गये हैं, संपत्ति का आकलन किया जा रहा है.
कुछ और सुर्खियां:
- 72 वीं बीपीएससी सिविल सेवा की पीटी 25 अक्टूबर को
- बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार की जगह गुरुवार को होगा हाफ डे
- यूजीसी नेट 2026 की प्रोविजनल आंसर की कल जारी होगी
- बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई 4 में अब पॉइंट के बाद मांस भी देना होगा
अनछपी: भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज़ादी के इन आठ दशकों में भारत ने भौतिक स्तर पर काफी विकास किया है। आम लोगों की जिंदगी में तकलीफें काफी हद तक दूर हुई हैं और उन्हें आधुनिक सुविधाएं भी मिली हैं। लोगों की फटेहाली काफी हद तक दूर हुई है। हालांकि भ्रष्टाचार और गैर बराबरी अब भी भारत की बड़ी समस्या बनी हुई है। तो क्या यह कहा जा सकता है कि भारत में अंग्रेजों से लड़कर जो आजादी ली थी उसका मकसद भी पूरा हो गया? इस सवाल पर मंथन किया जाए तो कई ऐसी बातें सामने आती हैं जो भारतीय समाज के लिए चिंता का विषय हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को गुलाम बनाने वाले अंग्रेजों से लड़ने के लिए आज से 80 साल पहले तक जो सामाजिक समरसता, एकता और सद्भाव पाया जाता था क्या वह अब भी बरकरार है? कहा जाता है कि अंग्रेजों ने भारत को गुलाम रखने के लिए बांटो और शासन करो की नीति अपनाई थी। खेद का विषय है कि आज के हमारे शासक भी अपनी सत्ता के लिए उसी बांटो और राज करो की नीति के सहारे चल रहे हैं। अंग्रेजों ने भी भारत को गुलाम रखने के लिए हिंदू और मुसलमान को बांटा था और आज के शासकों के रवैए से भी इस नीति का पता चलता है। हमारे यहां ऐसे शासक हैं जो खुल्लम-खुल्ला 80 और 20 के बंटवारे की बात करते हैं। जो श्मशान और कब्रिस्तान जैसी विभाजनकारी बातें खुल्लम-खुल्ला करते हैं। याद रखने की बात यह है कि आजादी के बाद से भारत के विकास में सभी समुदायों का योगदान रहा है लेकिन अगर अब उनमें से किसी एक समुदाय को विकास की दौड़ से बाहर करने की कोशिश की जाएगी तो यह दरअसल भारत को पीछे ले जाने वाली बात होगी। अफसोस है कि यह कोशिश की जा रही है और हालांकि समाज का एक बड़ा वर्ग अब भी इस विभाजन को रोकने और एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है लेकिन यह एकता फिलहाल सत्ताधारियों की वजह से ही खतरे में है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी यह बात है कि भारत भौतिक विकास के साथ-साथ सामाजिक तौर पर भी उन्नत बना रहे।
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