बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में 10 नदियों में इस समय बाढ़ की स्थिति है और इससे आठ जिलों पर खतरा बताया गया है। बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ दुष्कर्म के मामले में दोनों शिक्षकों को बर्खास्त किया जाएगा जबकि मामले को छिपाने के आरोप में प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार किया गया है।
और, लॉ स्टूडेंट्स के लिए मनन मिश्रा के आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट ने बार काउन्सिल को बताई उसकी सीमा।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार बिहार में गंगा, गंडक, पुनपुन और दरधा समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी नए इलाकों में प्रवेश कर रहा है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गुरुवार की रात एवं हाथीदह (मोकामा) में शुक्रवार दोपहर तक गंगा नदी के उच्चतम जलस्तर की सीमा पार करने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि एवं उससे उत्पन्न स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय एवं जहानाबाद जिले में नदी के किनारे एवं निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है। पटना में दीघा में गंगा खतरे के निशान से 1.17 मीटर, गांधीघाट में 1.67 मीटर और हाथीदह में 1.32 मीटर ऊपर बह रही थी। पुनपुन श्रीपालपुर में 2.29 मीटर और दरघा कोल्हाचक में 3.07 मीटर ऊपर पहुंच गई है। छोटकी सैदपुर में तेज बहाव में 10 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।
नेपाल और पड़ोसी राज्यों में बारिश से बिहार में स्थित बिगड़ी
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में मानूसन के दौरान 35 फीसदी कम बारिश के बावजूद सभी प्रमुख नदियां उफान पर है। कई जिले बाढ़ के संकट का सामना कर रहे हैं। इसी प्रमुख वजह नेपाल और पड़ोसी राज्यों यूपी, झारखंड सहित उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हो रही लगातार बारिश है। वहां से भारी मात्र में पानी आने से गंगा समेत बिहार की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। लगभग एक दर्जन नदियां खतरे के निशान के पार हैं।
बक्सर रेप के मुजरिम शिक्षक होंगे बर्खास्त, हेडमास्टर गिरफ्तार
बक्सर के डुमरांव प्रखंड के मध्य विद्यालय नथुनी अहिर के डेरा की छात्राओं के साथ दो शिक्षकों द्वारा किये गये दुष्कर्म के मामले में एक पीड़िता की मां के बयान पर कृष्णाब्रह्म थाने में प्रधानाध्यापक और दोनों शिक्षकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इधर, गुरुवार देर शाम पुलिस ने प्रधानाध्यापक इमाम अली अंसारी को गिरफ्तार भी कर लिया. हालांकि दोनों आरोपी शिक्षक विरेन्द्र प्रसाद व अरविंद कुमार फरार हैं. वहीं, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि इस मामले में दोनों आरोपी शिक्षक बर्खास्त किये जायेंगे. उन्होंने बक्सर के एसपी को निर्देश दिया है कि दोनों आरोपित शिक्षकों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (स्पीडी ट्रायल) में हो, ताकि पीड़ित छात्राओं को जल्द न्याय मिल सके, मंत्री ने बक्सर के डीएम को भी निर्देश दिया है कि निलंबित किये गये दोनों शिक्षकों की बर्खास्तगी का प्रस्ताव अविलंब शिक्षा विभाग को भेजा जाए. इधर, पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है.
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ₹100000 रिश्वत लेते गिरफ्तार
प्रभात खबर के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की मुख्यालय टीम ने गुरुवार को बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, पूर्णिया के कार्यपालक अभियंता द्विजेन्द्र कुमार मिश्र को 1,04,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी पटना जू के पास गोल्फ क्लब गेट के बगल से की गयी. निगरानी ब्यूरो के अनुसार, कंकड़बाग (पटना) निवासी ठेकेदार राम सागर शर्मा ने शिकायत दर्ज करायी थी. शर्मा ने कटिहार जिले में सरकारी विद्यालय निर्माण से जुड़ा कार्य कराया था, जिसका 1,54,19,329 रुपये का पहला भुगतान उनके खाते में आ चुका था. इसी भुगतान राशि पर आरोपी कार्यपालक अभियंता ने दो प्रतिशत कमीशन के रूप में तीन लाख रुपए घूस की मांग की थी।
धरतीपकड़ का निधन
जागरण के अनुसार पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक चुनाव लड़कर अलग पहचान बनाने वाले भागलपुर के चर्चित’ नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ का 96 वर्ष की उम्र में गुरुवार को पटना में निधन हो गया। पिछले 10-15 दिनों से बीमार चल रहे नागरमल का पटना स्थित पीएमसीएच में उपचार चल रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउन्सिल को बताई उसकी सीमा
जागरण की खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने विधि छात्रों के अनुशासन और बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) के अधिकार क्षेत्र को लेकर गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। कहा कि बीसीआइ के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि बीसीआइ और राज्य बार काउंसिल के पास कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की वैधानिक शक्ति भी नहीं है। यह अधिकार तब शुरू होता है, जब कोई विधि स्नातक कानून के तहत वकील के रूप में नामांकित हो जाता है। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना संबंधित शैक्षणिक संस्थान का विषय है। संस्थान अपने नियम के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडेमी आफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसर) यूनिवर्सिटी आफ ला से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान दिया। मामला विश्वविद्यालय के दो पूर्व छात्रों की याचिका से संबंधित था। याचिका में बीसीआइ अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा 13 अगस्त को जारी निर्देशों को चुनौती दी गई थी।
कुछ और सुर्खियां:
- गंगा नदी के बढ़ते जल स्तर को देखते हुए पटना की सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद होंगे
- रेलवे में एनटीपीसी यानी ग़ैर तकनीकी लोकप्रिय श्रेणी के 5165 पदों पर भारती की मंजूरी दी गई
- बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर से हटाया
- मधुबनी के जयनगर में भारत नेपाल के रेल यात्रियों के लिए बनेगा इमीग्रेशन पोस्ट
- तमिलनाडु में हाई कोर्ट की मुख्य भाषा तमिल बनाने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित
- मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 417 पॉइंट नीचे
- पटना में श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर इस्कॉन मंदिर में समारोह, बुद्ध मार्ग पर आज नहीं चलेंगी गाड़ियां
अनछपी: भारत में 2014 से भारतीय जनता पार्टी के लगातार चल रहे शासन के दौरान आम लोगों को किस तरह दमन का शिकार बनाया गया उसकी एक और मिसाल इस हफ्ते देखने को मिली हालांकि अखबारों ने इसे बहुत तवज्जो नहीं दी या इसे पूरी तरह दबा दिया। आशीष जोशी केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के पद से रिटायर हुए हैं और उन्हें आम आदमी की तरह आम भी नहीं माना जा सकता लेकिन जैसे किसी बेबस इंसान को पुलिस बिना किसी को कुछ बताए उठा लेती है, उसी तरह आशीष जोशी को भी उठा लिया गया और उन्हें अपने घर वालों को फोन कर यह बताने की भी इजाजत नहीं दी गई। आशीष जोशी पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अपनी कुछ टिप्पणियों के लिए चर्चा में थे। इस तरह की हरकतें पाकिस्तान से तो अक्सर सुनने को मिलती थीं कि कैसे वहां सरकार के विरोधी किसी भी व्यक्ति को सादे लिबास वाले लोग उठा लेते हैं और बाद में तो उनका पता भी नहीं चलता। भारत में आशीष जोशी के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करने वाले लोगों ने जब इस मामले को जोर शोर से उठाया तो उन्हें को छोड़ा गया और यह बताया गया कि उन्हें किस इल्जाम में पकड़ा गया था। दिलचस्प बात यह है कि जब मोदी सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करने का आरोप लगता है तो सरकार और उसके समर्थक इसे साफ इनकार कर जाते हैं। आशीष जोशी के मामले के दौरान ही दिल्ली पुलिस पर दो महिला पत्रकारों ने मारपीट करने का आरोप लगाया क्योंकि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार में चल रही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से कुछ सवाल कर लिए थे जो उन्हें नागवार लगे थे। उन दोनों महिला पत्रकारों ने यह भी कहा कि उन्हें मुस्लिम होने की वजह से प्रताड़ित किया गया और उन्होंने अपने शरीर के जख्म भी दिखाए। राहत की बात यह है कि आशीष जोशी की तरह ही इन दोनों पत्रकारों के अधिकार के लिए भी लोगों ने आवाज उठाई और यह मामला सबके सामने आया। जाहिर है यह कोई इक्का दुक्का मामला नहीं लेकिन ऐसे मामलों का रेकॉर्ड रखना जरूरी है। याद रखने की बात यह भी है कि जब प्रेस फ्रीडम में भारत की रैंकिंग बहुत ही खराब बताई जाती है तो सरकार द्वारा यह इल्जाम लगा दिया जाता है कि रैंकिंग की व्यवस्था ही गलत है लेकिन यहां की घटनाएं बता रही हैं कि सच्चाई किस बात में है।
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