बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। कई नदियों में बाढ़ जारी रहने से बिहार के कई जिलों में हालात बिगड़ रहे हैं। कई विषयों की अलग यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा के बाद अब बिहार में टीचर ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी खोलने का ऐलान किया गया है।
और, जानिएगा कि क्या है करेक्ट द मैप प्रस्ताव और इससे नक्शे में कैसे बदलेगा दुनिया के हर देश का आकार।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार गंगा, सरयू, सोन, पुनपुन और गंडक के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। लाखों की आबादी प्रभावित है। जल संसाधन विभाग ने सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के पास बेतार संवाद (वायरलेस) भेजकर हाई अलर्ट घोषित किया है। वहीं पुनपुन नदी के उफान से पटना-गया रेलखंड पर रेल परिचालन प्रभावित हो गया है। पटना के गांधी घाट पर जलस्तर 50.57 मीटर पहुंचकर उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 50.52 मीटर को पार कर गया। यहां बीते दस वर्ष के उच्चतम जलस्तर का रिकार्ड टूट गया। दीघा में 51.92 और मनेर में 53.77 मीटर पानी दर्ज किया गया। बख्तियारपुर व मोकामा में पानी सड़क तक पहुंच गया है। नदियों में उफान से कई जिलों में स्थिति गंभीर हो गई है। खगड़िया में गंगा के जलस्तर में 24 घंटे में 34 सेमी की वृद्धि हुई है। माधवपुर पंचायत का संपर्क मुख्यालय से कट गया है, जिससे 16 हजार लोग प्रभावित हैं। कटिहार के चार प्रखंडों में बाढ़ से हाहाकार मचा है। यहां कुल 68,477 आबादी व 1,435 पशुधन प्रभावित हैं। बचाव के लिए 28 नावें और चार हेल्थ कैंप सक्रिय हैं। वहीं, मधेपुरा में कौसी की बाढ़ से चौसा प्रखंड में पांच और आलमनगर प्रखंड में तीन पंचायतों में करीब एक लाख की आबादी प्रभावित है और कुल 55 दो प्रखंडों के आधा दर्जन गांव और नावें चलाई जा रही हैं। सहरसा के भी लखीसराय के पिपरिया प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुके हैं। मुंगेर में गंगा का जलस्तर शाम छह बजे 39.68 मीटर है, जो खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर है। जिले में 34 हजार आबादी प्रभावित हैं।
पुनपुन शहर में घुसा पानी
हिन्दुस्तान के अनुसार पटना में नदियों के उफान से लोग सहमे हुए हैं। पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर में पानी घुस गया है। वहीं बख्तियारपुर के शहरी इलाकों के कई वार्ड भी पानी से घिर गए हैं। जबकि मनेर के सुरक्षा बांध पर दबाव बढ़ने लगा है। पुनपुन नदी का 1976 जैसा रौद्र रूप देख कई लोग रतजगा कर अपने गांवों के बचाने में जुट गए हैं। लगातार प्रति घंटे एक सेंटीमीटर पानी बढ़ रहा है।
मनेर में सुरक्षा बांध तक बाढ़ का पानी पहुंचा
गंगा और सोन में उफान से शनिवार देर शाम बाढ़ का पानी मनेर स्थित सोन सुरक्षा बांध तक पहुंच गया, जिससे पूरा मनेर दियारा इलाका जलमग्न हो गया है। सोन और गंगा के जलस्तर बढ़ने से लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। वर्ष 1975 में पटना में आई भीषण बाढ़ के बाद इस सुरक्षा बांध को बनाया गया था।
नेपाल में फिर जमीन खिसकी, गंडक में बाढ़ का अलर्ट
नेपाल के दार्चुला जिले में हुए भूस्खलन के बाद चौलानी नदी पूरी तरह से मलबा से भर गया है। इससे नए सिरे से फ्लैश फ्लड की आशंका जताते हुए गंडक नदी में भी बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, चौलानी नदी का पानी नेपाल की काली गंडक और नारायणी नदी से होते हुए गंडक नदी में आता है। इस खतरे को देखते हुए उत्तर बिहार में गंडक सीमावर्ती इलाकों के लोगों को सावधान रहने की चेतावनी जारी की गई। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों सहित प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट मोड में रहने को गया है। मुख्यालय से मिले निर्देश में कहा गया कि दार्चुला में हुए भूस्खलन के असर से चौलानी नदी में गाद भर गई है, जो कभी भी फ्लैश फ्लड के तौर पर खतरनाक हो सकता है। इससे भी गंडक सहित उत्तर बिहार की अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।
बाढ़ से जुड़ी कुछ और खबरें:
- पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना-गया रेल मार्ग पर आज 15 मेमू ट्रेनें रद्द रहेंगी
- बाढ़ के पानी में बहकर पटना के दियारा पहुंचे जंगली सूअर के हमले से दानापुर में बच्ची की मौत
बिहार में खुलेगी टीचर ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी
हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में शिक्षकों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण देने और क्षमता विकास के लिए शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय खोलने का ऐलान किया है। वह शनिवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में देश के महान शिक्षाविद् और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों के लिए अलग से वेतनमान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। सरकार इसपर गंभीरता से विचार कर रही है। शिक्षा मंत्री के अनुसार इन्हें मासिक मानदेय मिल सके, इसपर भी विचार किया जा रहा है। शिक्षकों को समय पर वेतन की पूरी व्यवस्था होगी। सितंबर में मदरसा एवं संस्कृत बोर्ड के शिक्षकों के लंबित वेतन का भुगतान होगा।
करेक्ट द मैप: नक्शे में कैसे बदलेगा दुनिया के हर देश का आकार
जागरण के अनुसार जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्लीः पिछले साढ़े चार सौ वर्षों से दुनिया जिस मानचित्र को अपनाए हुए है, अब वह बदल जाएगा। इसे बदलने की मुहिम चलाई टोगो ने… अफ्रीका महाद्वीप का एक छोटा सा देश। क्षेत्रफल में यह लगभग हिमाचल प्रदेश जितना है। अपने पड़ोसी घाना की तुलना में चर्चा में भी कम ही रहता है। लेकिन, इसने दुनिया के मानचित्र को बदलने का बीड़ा उठाया और इसे संभव भी कर दिखाया। इस मुहिम में उसे अफ्रीका के अन्य देशों का भरपूर सहयोग मिला। नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र ने अब दुनिया का नया नक्शा अपनाने को मंजूरी दे दी है। इससे हकीकत में कोई देश जितना बड़ा होगा, मानचित्र में उसी अनुपात में दिखेगा। टोगो के विदेश मंत्री राबर्ट डुसे का कहना है कि एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत निष्पक्ष मानचित्र से होती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक मानचित्रों को महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने वाला ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित कर दिया। टोगो की ओर से पेश और अफ्रीकी संघ के समर्थन वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देश रहे। अकेला विरोध अमेरिका का रहा। एस्टोनिया, जार्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान से दूरी बनाई। भारत ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए उसके पक्ष में वोट दिया। मतदान का विरोध करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के काम और मकसद का मजाक उड़ाता है। मोटे तौर पर दुनिया के मानचित्र में अब भारत का नक्शा बड़ा दिखेगा। अफ्रीका व दर्जनों अन्य देशों का नक्शा भी सही तरीके से सामने आएगा।
कुछ और सुर्खियां:
- जी नेटवर्क के मालिक सुभाष चंद्रा पर 980 करोड़ क़र्ज़ के लिए गलत नेटवर्थ दिखाने के आरोप में एफआईआर
- दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस कल्लूरी कामेश्वरी राव पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए
- पटना के मरीन ड्राइव के पास रामलीला मैदान बनाने का ऐलान
- पटना जंक्शन के दोनों एंट्री गेट पर स्कैनर मशीन खराब, यात्रियों के समान कि नहीं होती है जांच
- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एनआईए की अदालत ने झीरम घाटी माओवादी हमले के सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, 29 लोगों की गई थी जान
अनछपी: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 12 साल से भारत के प्रधानमंत्री हैं लेकिन वे अपनी बातों में विपक्षियों का मजाक उड़ाने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं वह भारतीय समाज में सद्भावना के बिल्कुल उलट है। उनकी बातों में अक्सर छिछलापन रहता है और समाज के लिए कोई सकारात्मक संदेश ढूंढना मुश्किल होता है। अफसोस की बात है कि नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री भी हर मंच का इस्तेमाल अपनी वाहवाही, तुकबंदी और राजनीतिक बयानबाजी के लिए करते हैं। यहां तक कि वह यूनिवर्सिटी और कॉलेज में मिले मौकों का इस्तेमाल छात्रों के मार्गदर्शन के बदले विपक्षी लोगों को निशाना बनाने में करते हैं। शनिवार को श्री मोदी दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज आफ कमर्स एसआरआरसी के शताब्दी समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनसे कथित जेन ज़ी की भाषा में संवाद की कोशिश की लेकिन भाषा बदलने के बावजूद उनके मजाक उड़ाने की आदत में कोई तब्दीली नहीं आई और उन्होंने नाराज फूफा और दिमागी नक्सली जैसे बातें फिर से दोहराईं। उनके गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री के काल को याद करना इसलिए जरूरी है कि अबसे 13 साल पहले उन्होंने इसी कॉलेज में अपना भाषण दिया था। एक प्रधानमंत्री के रूप में उनसे छात्र यह उम्मीद कर सकते थे कि वह यह बताएं कि उन्हें जो कैंपस में परेशानी झेलनी पड़ रही है, नौकरी की जो दिक्कत है और छात्रों की दूसरी समस्याएं हैं, उनके हाल के लिए सरकार क्या कर रही है। यह मौका शिक्षक दिवस का था और शिक्षकों के बारे में भी बात की जा सकती थी। बस एक छोटा सा सवाल है कि क्या प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी कभी सिर्फ विषय पर बात करते हुए ऐसे मजाक उड़ाने वाले लहजे से बचते हुए ठोस और सकारात्मक बातें कर सकते हैं?
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