छ्पी-अनछपी: बाढ़ के पानी में डूबने से 20 की मौत, ईरान बोला- अमेरिकी सेना बच्चों की हत्यारी 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के अलग-अलग जिलों में बाढ़ के पानी में डूबने से 20 लोगों की मौत हो गयी। ईरान ने अमेरिकी सेना को बच्चों की हत्यारी बताया है। दिल्ली की एक इमारत ढहने से पांच लोगों की मौत हो गई।

और, जानिएगा कि पंजाब की सरकार ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का विरोध क्यों किया। 

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार बिहार में गंगा का उफान जारी है, तो कोसी और गंडक का जल स्तर भी बढ़ रहा है. इससे वैशाली, बेगूसराय, सारण, बक्सर, भोजपुर, भागलपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, लखीसराय समेत कई जिले बाढ़ का कहर झेल रहे हैं. इस दौरान अलग-अलग जिलों में बाढ़ के पानी में डूबने से 20 लोगों की मौत हो गयी. मृतकों में सारण के पांच, पटना के चार, भोजपुर के तीन, वैशाली व भागलपुर के दो और बेगूसराय, पूर्णिया, लखीसराय व जमुई जिले का एक-एक व्यक्ति शामिल है. पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में एक मासूम बच्ची समेत तीन लोगों और मनेर में एक की मौत हो गयी.

गंगा में रिकॉर्ड पानी

हिन्दुस्तान की खबर है कि गंगा, पुनपुन, घाघरा, सोन और कोसी में आई बाढ़ ने नए इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। गंगा नदी ने पटना और इसके आसपास चार जगहों पर उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड बनाया है और अब इसका पानी मोकामा से कहलगांव तक तेजी से बढ़ रहा है। इससे तटबंधों पर भारी दबाव बना हुआ है। राहत की बात यह है कि रविवार की शाम से पटना में गंगा का जलस्तर करीब 20 सेंटीमीटर कम हुआ। उधर, सारण जिले के दरियापुर प्रखंड के सेमरहिया-मोहन कोठियां के समीप रविवार सुबह मही नदी का बांध टूट जाने से करीब 11 पंचायतों में तेजी से पानी फैल रहा है। वहीं, भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड क्षेत्र के ममलखा गांव के समीप ग्रामीण बांध भी शनिवार की देर रात कट गया। बेगूसराय जिले के मधुरापुर में कई स्थानों पर बांध में रिसाव से दहशत है।

सोन और पुनपुन में अब भी उफान

जागरण के अनुसार पुनपुन व सोन के उफान ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। गंगा का जलस्तर रविवार को बाढ़ के उच्चतम से थोड़ा नीचे आया तो पुनपुन ने तबाही का मोर्चा खोल दिया। बाढ़ के दबाव में रविवार दोपहर बिहटा-सरमेरा एसएच-78 अकौना पंचायत के नीमा गांव के पास करीब चार फीट चौड़ाई में छह फीट अंदर तक धंस गया। उधर, पुनपुन के श्रीपालपुर में जलस्तर 5345 मीटर पहुंच गया है। यह खतरे के निशान 50.60 मीटर से 2.85 मीटर ऊपर और उच्चतम बाढ़ स्तर 53.91 मीटर से 46 सेंटीमीटर नीचे है। रविवार को इंद्रपुरी बराज से सोन नद में 2 लाख 40 हजार 733 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बेटा में सोन नदी के बाढ़ से कई गांव में पानी फैल गया है। नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा का असर गंडक नदी के जलस्तर पर दिख रहा है। 

  • पटना गया रेल डिवीजन में 10 मेमू ट्रेनें आज भी रद्द रहेंगी, 10 दूसरी ट्रेनें बदले हुए रूट से चलेंगी
  • खगड़िया के आठ अस्पताल बाढ़ के पानी की चपेट में है
  • पूर्णिया में बकरा नदी पर बना पुल टूटा, पुल से गुजर रहा ट्रक पानी में गिरा
  • भागलपुर से सुल्तानगंज जाने वाले न 80 पर 1 फीट पानी भरा

अमेरिकी सेना को बच्चों की हत्यारी: ईरान

प्रभात खबर ने लिखा है कि ईरान ने रविवार को दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर रहे एक मानवरहित अमेरिकी पोत को निशाना बनाया. हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को ‘पूरी तरह झूठ’ बताया. इससे पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन तेल टैंकरों और तीन अमेरिका से जुड़े पोतों पर हमले का दावा किया था. ईरान ने कहा कि ये टैंकर होर्मुज से ‘अनधिकृत’ मार्ग से गुजर रहे थे. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ ने चेतावनी दी कि ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब ‘तेज, भारी और अधिक दर्दनाक’ होगा. आइआरजीसी ने अमेरिकी सेना को ‘बच्चों की हत्यारी’ बताते हुए अमेरिका से क्षेत्र छोड़ने को कहा. शनिवार को अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था. उसके मुताबिक, यह कार्रवाई दो अमेरिकी नौसैनिक पोतों पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में की गयी. अमेरिका ने कहा कि उसके दोनों पोत सुरक्षित रहे और कोई अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ.

दिल्ली में इमारत ढहने से पांच लोगों की मौत 

नई दिल्ली से हिन्दुस्तान की ख़बर है कि डीयू के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार की दोपहर एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई जबकि सात घायल हैं। देर रात तक जारी राहत एवं बचाव अभियान में 10 लोगों को मलबे से निकाला जा चुका था। मलबे में कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम पर प्राथमिकी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोप है कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। 

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का विरोध क्यों किया?

हिन्दुस्तान के अनुसार पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध बताया है। मान कैबिनेट ने रविवार को कैबिनेट बैठक बुलाकर जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को अधिसूचित करने के केंद्र ‘बयान जारी कर कहा गया कि पंजाब सरकार की सहमति तक जस्टिस मिश्रा सरकार के कदम के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। बैठक के बाद एक को शपथ न दिलाई जाए। मान सरकार ने इसको लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल से भी अपील की है। बता दें, उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश के करीब एक माह बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की घोषणा की थी। जागरण के अनुसार पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने रविवार को जालंधर में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। किसी भी हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री की राय और सहमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान से कोई सलाह नहीं ली गई। चीमा ने कहा कि यह केवल एक जज का मामला नहीं, बल्कि तीन करोड़ पंजाबियों और उनके द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री का अपमान है। यह बाबा साहब आंबेडकर के बनाए गए संविधान और संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। केंद्र की भाजपा सरकार हमेशा से पंजाब विरोधी फैसले लेती रही है।

कुछ और सुर्खियां:

  • अलीपुरद्वार से दिल्ली जा रही महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच आरा में पटरी से उतर गए
  • इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से राजधानी जकार्ता के एयरपोर्ट को बंद किया

अनछपी: भारत में लंबे समय से यह बात कही जाती रही है कि बेरोजगारी दूर करने के लिए पढ़ाई जरूरी है लेकिन पढ़ने के बावजूद जिस तरह पिछले कई वर्षों से बेरोजगारी फैली हुई है, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि इस सोच में बदलाव लाया जाए। पढ़ाई के पीछे भागने का एक नतीजा यह हुआ है कि छात्रों को बुरे से बुरे हाल में रहना पड़ रहा है और इससे उनकी जान पर हमेशा खतरा बना रहता है लेकिन सरकारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी के इंसानों की तैयारी के लिए फिर से पढ़ाई करनी पड़ती है। ऐसे में निम्न वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के छात्र अच्छी शिक्षा हासिल करने के लिए बड़े-बड़े शहरों में जाते हैं और वहां बाद से बदतर हालत में जीने को मजबूर होते हैं। दूसरी तरफ उच्च मध्य वर्ग और उच्च वर्ग के छात्रों को इस तरह की कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि या तो अब वह शान शौकत वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं या बेहतरीन फ्लैट्स लेकर जिंदगी गुजार रहे हैं। नतीजा यह है कि निम्न और निम्न मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए कोई आवाज उठाने वाला नहीं है। इस बात की चर्चा दरअसल दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों की हालत के मद्देनजर की जा रही है जहां के साउथ कैंपस के नजदीक की एक इमारत के ठहरने से 5-6 लोगों की मौत हो गई। काफी मेहनत मशक्कत के बाद बहुत से छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी पहुंचते हैं तो उन्हें हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती और वह जर्जर हालत वाले लॉज या पीजी में रहने को मजबूर होते हैं। अगर हम पटना की बात करें तो यहां भी बहुत से ऐसे लॉज मिल जाएंगे जो बेहद जर्जर हालत में हैं, जहां गंदगी रहती है पीने का साफ पानी नहीं मिलता और खाने की सही व्यवस्था नहीं रहती है। सवाल यह है कि सरकार आखिर हर जरूरतमंद छात्र को हॉस्टल में जगह क्यों नहीं देती? छात्रों को चाहिए कि वह इस मामले में भी सरकार की जवाबदेही तय करें।

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