छ्पी-अनछपी: एसआईआर पर बैकफुट पर आया आयोग, 17 ज़िलों में भारी बारिश का अलर्ट, 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एसआईआर की कई शर्तों पर चुनौती मिलने के बाद चुनाव आयोग ने अपने फैसले वापस लेने का ऐलान किया है। बिहार के 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

और, बिहार के डीजीपी को नियमों में छूट देकर 24 घंटे के अंदर मिला वीआरएस। 

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार निर्वाचन आयोग के कामकाज के तरीकों, दो निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच मतभेदों तथा एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार को आयोग की बैठक हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए. बैठक में चुनाव आयोग ने कई मुद्दों पर अपना पक्ष साफ किया है और एसआईआर को लेकर कई फैसले भी लिये. बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि जिन लोगों के नाम कट गये हैं, वे नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं. अधिकारी घर-घर जाकर उनके दस्तावेज संकलित करेंगे और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे. इन पर तय समय के भीतर क्षेत्रीय निर्वाचन अधिकारी फैसला लेगा. आयोग ने एक बयान जारी कर सफाई दी है कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किये गये थे. मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 में किये गये बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.

चुनाव आयोग के ख़ास फ़ैसले

  1. अनमैप्ड और तार्किक विसंगति के मामलों में नोटिस पाने वालों को सुनवाई के लिए इआरओ और एइआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं
  2. ऐसे लोगों के घर जाकर बीएलओ दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें इसीआइनेट पर अपलोड करेंगे
  3. संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी दस्तावेजों के आधार पर करेंगे फैसला प्राथमिकता के आधार पर होगी ऑनलाइन सुनवाई
  4. सुनवाई में मतदाता परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य कर सकता है अधिकृत
  5. ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं होगी और मजबूत
  6. जिला निर्वाचन अधिकारी पर्याप संख्या में बनायेंगे हेल्प डेस्क
  7. इन सुविधाओं का लाभ रैन बसेरों में रहने वालों, मजदूरों, गरीबों, बेघर और अन्य जरूरतमंदों को मिलेगा

नदियों में उफान के मद्देनजर 17 जिलों में अलर्ट

जागरण के अनुसार भारी बारिश के पूर्वानुमान और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के मद्देनजर बिहार में अलर्ट जारी किया गया है। संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर सीमावर्ती व गंडक, बागमती तथा कोसी नदी से जुड़े संवेदनशील 17 जिलों में प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने तथा सभी आवश्यक तैयारियां हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए शनिवार को इस बाबत संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ निर्देश दिए हैं। बैठक कर उन्हें सतर्क रहने के बारिश की स्थिति को देखते हुए सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया तथा बेगूसराय सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

वर्षा से कई राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त उत्तर प्रदेश में 49 की मौत

जागरण के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण लगातार हो रही वर्षा ने कई राज्यों में तबाही मचा दी है। बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरुवार शाम से लगातार हो रही वर्षा और तेज हवाओं के कारण हुए हादसों में उत्तर प्रदेश में 49 लोगों की मौत हो चुकी है। एहतियातन प्रशासन ने प्रभावित जिलों में स्कूल-कालेज बंद कर दिए हैं। वर्षा के कारण खेतों में पककर तैयार धान की फसल पर बुरा असर पड़ा है। कई जगह तेज हवाएं चलने के कारण धान, मक्का, गन्ना व सब्जी की फसल को नुकसान हुआ है।

भारत-नेपाल सीमा पर बने अनरजिस्टर्ड धार्मिक स्थलों पर कसा जाएगा शिकंजा

जागरण के अनुसार सरकार भारत-नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमा सुरक्षा एवं प्रबंधन व्यवस्था को लगातार सुदृढ़ करने में जुटी है। इस क्रम में अब भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से बनी गैर-पंजीकृत धार्मिक स्थलों पर नकेल कसने की रणनीति की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में सीमा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय एवं उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी सम्मिलित हुए। बैठक में सीमा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था तथा अवैध गतिविधियों की रोकथाम से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण अधिकारियों ने दिया।

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने पटना में कहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार

प्रभात खबर के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने शनिवार को चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) में कानून के छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया. इस दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, कॉलेजियम की कार्यप्रणाली, पहली पीढ़ी के वकीलों की आर्थिक परेशानियों, बढ़ती फीस और छात्रवृत्ति समेत कई मुद्दों पर सवाल पूछे. सीजेआइ सूर्यकांत ने छात्रों के सभी सवालों का जवाब दिया. उन्होंने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर चर्चा की. भास्कर के अनुसार अशोक सीएनएलयू के ऑडिटोरियम में सीजेआई ने विधि छात्रों से संवाद किया। छात्रों ने प्रदर्शन, फीस, छात्रवृत्ति, वकीलों की तंगी व कॉलेजियम पर सवाल पूछे। सीजेआई ने फीस व छात्रवृत्ति पर कार्रवाई का भरोसा दिया। कुलपति’ प्रो. डॉ. फैजान मुस्तफा ने 5 वर्षीय लॉ कोर्स को 4 साल पढ़ाई व 1 साल कोर्ट अप्रेंटिसशिप में बदलने का सुझाव दिया, जिसे सीजेआई ने स्वागत योग्य बताया। 

बिहार के डीजीपी को नियमों में छूट देकर 24 घंटे के अंदर मिला वीआरएस

भास्कर के अनुसार बिहार सरकार ने 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी और डीजीपी विनय कुमार को राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया है। सरकार ने उनके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) आवेदन को महज 24 घंटे में मंजूरी दे दी। इसके लिए अखिल भारतीय सेवा नियमावली के तहत तीन महीने पूर्व नोटिस देने की अनिवार्य शर्त को शिथिल किया गया। गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने शनिवार देर रात इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। विनय कुमार ने 25 सितंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया था। राज्य सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम-16 (2) के तहत तुरंत राहत देते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त कर दिया। वीआरएस की मंजूरी मिलते ही सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें पदभार ग्रहण करने की तिथि से मुख्य सूचना आयुक्त बनाने का आदेश जारी कर दिया। इस नई व्यवस्था के तहत विधि विभाग के पूर्व सचिव और न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अंजनी कुमार सिंह को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • जापान में हो रहे एशियन गेम्स में कबड्डी प्रतियोगिता में भारत को दोनों वर्गों में गोल्ड मेडल
  • खराब मौसम के कारण पटना एयरपोर्ट पर दो फ्लाइट रद्द, चार डाइवर्ट 21 लेट
  • अररिया जिले के भरगामा में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, मलबे में मिला मानव अंग
  • फुलवारी शरीफ की सकरैया पंचायत की मुसहरी में सो रहे परिवार को सांप ने डंसा, दो छोटे भाइयों की मौत

अनछपी: चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच गंभीर असहमतियों की खबर आने के बाद विपक्ष ने जो आक्रमक तेवर अपनाया उसका नतीजा है कि चुनाव आयोग को अपनी कुछ मनमानी शर्तों को वापस लेने का ऐलान करना पड़ा है लेकिन इससे मामला पूरी तरह हल नहीं होगा। सबसे जरूरी बात विपक्ष के इस आरोप को समझने की है कि दरअसल ज्ञानेश कुमार के जरिए एसआईआर के नाम पर ऐसा काम करवाया गया जिससे उन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को भारी मदद मिली जहां वह अपनी सरकार हर हाल में बनवाना चाहती थी। इस सिलसिले में यह समझना जरूरी है कि एसआईआर से केवल यह नहीं हुआ कि जो वाटर भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देने वाले थे उनका नाम काटा गया बल्कि बहुत सारे ऐसे फर्जी वोटरों का नाम जोड़ा गया जिनका कोई अता-पता नहीं था लेकिन उनका इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने में हुआ। इसलिए अगर भारतीय मतदाताओं के साथ इंसाफ की बात की जाए तो उसका तकाजा यह है कि न केवल मुख्य निर्वाचन आयोग ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाए और उन पर जो भी संभव कानूनी कार्रवाई है वह हो, बल्कि इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया को रद्द किया जाए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रवैया पर अफसोस जताया जा सकता है लेकिन इंसाफ पाने के लिए इसके अलावा और क्या रास्ता है? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हों, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों या बिहार में कांग्रेस और तेजस्वी यादव हों, अगर उन्हें लगता है कि एसआईआर के जरिए उन्हें गलत तरीके से हटाया गया है तो वह अदालत की लड़ाई के साथ-साथ आम जनता की अदालत में भी जाएं और वहां से इंसाफ पाने की कोशिश करें।

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