बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पटना के एडीएम सप्लाई रवींद्र कुमार दिवकार और दानापुर में तैनात उनकी सब रजिस्ट्रार पत्नी कुमारी स्वीटी के चार ठिकानों पर छापेमारी में लगभग 80 लाख रुपए कैश मिलने के अलावा और भी संपत्ति का पता चला है। एसआईआर में धांधली के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया गया है। बिहार के 17 जिलों में बाढ़ की वजह से अलर्ट जारी किया गया।
और, भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार आय से अधिक संपत्ति मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सोमवार को पटना के अफसर दंपती एडीएम (आपूर्ति) रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी दानापुर (पटना) की जिला सब-रजिस्ट्रार कुमारी स्वीटी के चार ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। पटना के रूपसपुर इलाके में कश्यप ग्रीन अपार्टमेंट के किराये के फ्लैट से 70 लाख से अधिक, जबकि बेगूसराय के आवास से करीब नौ लाख की नकदी बरामद की गई। सभी नोट 500-500 के बंडल में रखे गए थे। निगरानी ब्यूरो ने पटना और बेगूसराय के चार ठिकानों पर छापेमारी की, जो देर शाम तक जारी रही। इस दौरान अफसर दंपती के पास दो करोड़ 92 लाख रुपये के सात भूखंड और फ्लैट खरीद के दस्तावेज मिले हैं। निगरानी ने दंपती के विरुद्ध एक करोड़ छह लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। हालांकि, छापेमारी में मिली चल-अचल संपत्ति के बाद आय से अधिक संपत्ति की राशि में बड़ी वृद्धि होने की संभावना है।
ज्ञानेश के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन
हिन्दुस्तान के अनुसार मतदाता सूची में एसआईआर के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान कांग्रेस प्रमुख गोविंद डोटासरा समेत पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। लखनऊ में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हमारा विरोध देशव्यापी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित घर के बाहर सोमवार सुबह प्रदर्शन किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को काम से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी
भास्कर की खबर है कि निर्वाचन आयोग के फैसलों से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि अंतिम सुनवाई तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के तौर पर काम करने से रोका जाए। साथ ही घोषित किया जाए कि निर्वाचन आयोग से जुड़े फैसले उसके अध्यक्ष अकेले नहीं ले सकते। याचिका में रिपोटों के हवाले से कहा है कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने 10 माह में में करीब 14 फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। याचिका में मांग है कि सीईसी से पूछा जाए वह आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का निजी तौर पर इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।
17 जिलों में बाढ़ की वजह से अलर्ट
भास्कर के अनुसार राज्य के 17 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। बगहा के निकट गंडक नदी का जलस्तर अब तक के उच्चतम फ्लड लेवल 90.90 मीटर को पार कर गया है। यह करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इसके दबाव से पश्चिमी चंपारण के बगहा-1 प्रखंड के खैरटवा गांव में चंपारण तटबंध 10 मीटर लंबाई में अचानक टूट गया। पानी खेतों में फैल रहा है। अगस्तिया, खैरटवा और चंद्रपुर के निचले इलाकों में भी पानी फैलने और संपर्कता प्रभावित होने की आशंका है। तटबंध टूटने की सूचना के बाद जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम तटबंध की मरम्मती का प्रयास कर रही है। जिला प्रशासन पश्चिम चंपारण भी आवश्यक कार्रवाई कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 727 करीब तीन किलोमीटर दूर है। गंडक नदी में प्रवाह तेजी से घट रहा है। इसलिए हाईवे के बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की आशंका नहीं है।
उज्जैन की शाही मस्जिद का एक हिस्सा तोड़ने का विरोध, हंगामा
हिन्दुस्तान के अनुसार मध्य प्रदेश के उज्जैन में सोमवार सुबह शाही मस्जिद के एक हिस्से को तोड़ने के दौरान पुलिस और लोगों के बीच झड़प हुई। लोगों ने चक्काजाम करते हुए पुलिस पर पत्थर फेंके। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, 15 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। तनाव को देखते हुए क्षेत्र में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए कंथल क्रॉसिंग से गोपाल मंदिर तक की सड़क को चौड़ा करके 15 मीटर का किया जा रहा है। इसके लिए शाही मस्जिद के करीब नौ फीट लंबे और चार फुट चौड़े हिस्से को तोड़ा जाना है। इसके लिए रविवार रात मस्जिद समिति ने समहति दे दी थी। बता दें, नौ सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें शाही मस्जिद के हिस्से को तोड़ने को चुनौती दी गई थी।
आधार में नाम सुधार के लिए अब गजट प्रकाशन जरूरी
हिन्दुस्तान के अनुसार आधार कार्ड में अब नाम बदलने, जुड़वाने आदि के लिए गजट में प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसको लेकर यूआईडीएआई ने एसओपी जारी किया है। यह गजट भारत सरकार के साथ बिहार सरकार का भी हो सकता है। लेकिन बिना गजट में प्रकाशित कराए नाम में सुधार नहीं हो सकता है। अभी तक आधार में नाम बदलना, सरनेम जुड़वाने के लिए केवल आवासीय प्रमाण पत्र देना होता था। इस प्रक्रिया में अब बदलाव किया गया है। हालांकि नाम के अक्षर (स्पेलिंग) में बदलाव के लिए आवासीय प्रमाण पत्र ही देना होगा। बाकी नाम में किसी भी तरह के बदलाव के लिए गजट में प्रकाशित करवाना जरूरी होगा।
भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर
जागरण के अनुसार कच्चे तेल के दाम में तेजी, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर वैश्विक रुख से स्थानीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट आई और तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत लुढ़क कर 72,771.72 अंक पर बंद हुआ। यह 30 मार्च, 2026 के बाद इसका सबसे निचला बंद स्तर है। नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब छह महीने के निचले स्तर 22,780.25 अंक पर बंद हुआ।
कुछ और सुर्खिया:
- पटना स्नातक विधान परिषद सीट से जदयू के विधायक अनंत सिंह जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन करेंगे
- विधान परिषद के सभापति भाजपा के अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा जदयू के रामवचन राय ने संभाला प्रभार
- मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी को न्यू कासल यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबिलिटी का प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस बनाया गया
अनछपी: यह सोचकर अजीब लगता है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-चालान का 45000 करोड़ रुपया बाकी है जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वजह से काटा गया था। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक चालान के पैसे जमा नहीं करने के रवैए को देखते हुए गाड़ियों के लिए जरूरी दूसरे दस्तावेजों के सहारे इस समस्या का हल निकालने की कोशिश की गई है लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ। उदाहरण के लिए यह व्यवस्था की गई थी कि जिस गाड़ी का चालान कटा हो और इसके पैसे जमा नहीं किये जा रहे हों, उसे प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी प्रमाण पत्र न दिया जाए। इस तरकीब से यह उम्मीद की जा रही थी कि जिन लोगों की गाड़ी पकड़ी जाए और जांच में पॉल्यूशन सर्टिफिकेट ना मिले उनसे पिछला बकाया चालान भी वसूला जाए और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट ना होने के फाइन भी लगाया जाए। लेकिन यह तरीका कारगर साबित नहीं हुआ तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर की गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि अगर ई चालान के पैसे आसानी से जमा नहीं हो रहे हैं तो क्यों ना इसे बिजली बिल के साथ जोड़ा जाए और पैसे जमा न करने की हालत में बिजली कनेक्शन ही काट दिया जाए। लेकिन यह सवाल पैदा होगा कि क्या एक तरह के अपराध के लिए दूसरे मामले में सजा दी जा सकती है? बिजली आज के लिए एक जरूरी चीज है और ट्रैफिक नियम के उल्लंघन में बिजली का कनेक्शन काट कर सजा देने का तरीका सही होगा या नहीं इस पर विचार जरूर किया जाना चाहिए?
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