छपी-अनछपी: सूद ने ले ली छह जान, धर्म परिवर्तन पर रिज़र्वेशन छीनने वाली सरकार

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना।

प्रभात खबर कर्ज में दबे कारोबारी ने पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे के साथ जहर खाया, सभी की मौत।
हिन्दुस्तान: क़र्ज़ के ज़हर से एक ही परिवार के छह की मौत। जागरण की सुर्खी है सूदखोरी की प्रताड़ना पर परिवार के छह सदस्यों ने जहर खा दी जान। भास्कर की सुर्खी है: फल दुकानदार पर 12 लाख क़र्ज़ था, दोगुने से अधिक लौटाया पर खत्म नहीं हुआ… वसूली से तंग आ नवादा में एक ही परिवार के 6 ने की आत्महत्या।
हिन्दुस्तान के अनुसार नवादा में सूदखोर महाजनों (ब्याज पर रुपये देने वाले) के कर्ज से परेशान फल व्यवसायी केदार लाल गुप्ता ने परिवार के पांच सदस्यों के साथ जहर खा लिया। इससे परिवार के मुखिया व उनकी पत्नी समेत सभी छह लोगों की एक-एक कर मौत हो गयी। घटना बुधवार देर रात शोभिया कृषि फार्म से दक्षिण एक मजार के समीप सुनसान इलाके में हुई। मृतकों में स्व. लखन लाल गुप्ता के पुत्र फल व्यवसायी केदार लाल गुप्ता (60), उनकी पत्नी अनिता देवी (52), बेटा प्रिंस कुमार (22), बेटी गुड़िया कुमारी (25), शबनम कुमारी (23) व साक्षी कुमारी (17) शामिल हैं। वहीं व्यवसायी के बेटे के मोबाइल से दो पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें सभी की मौत का जिम्मेदार 6 सूदखोरों को बताया गया है।

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: एआईजी की काली कमाई: पटना से उत्तराखंड तक प्रॉपर्टी व निवेश। हिन्दूस्तान ने लिखा है: काला धन का कुबेर निकले निबंधन आईजी प्रशांत। जागरण की सुर्खी है: एआईजी निबंधन के यहां एसयूवी के छापे जमीन मकान में 1.86 करोड़ का निवेश। प्रभात खबर; एआईजी निबंधन के पास मिले 1.50 करोड़ के प्लॉट, ₹66 लाख के जेवर। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) प्रशांत कुमार के यहां आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई छापेमारी में करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। खुद और परिजनों के नाम पर उन्होंने पटना, गुरुग्राम, उत्तराखंड और सीवान में कई जमीन, फ्लैट और दुकान खरीद रखी है। 66 लाख के जेवरात के अलावा बैंकों और वित्तीय संस्थानों में एक करोड़ के निवेश का भी पता चला है। एसवीयू के एआईजी मुताबिक प्रशांत कुमार ने सरकारी सेवा में रहते हुए पद का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति अर्जित की है। सत्यापन में नाजायज ढंग से 2 करोड़ 6 लाख 80 हजार 785 रुपये की अर्जित की गई संपत्ति का आकलन किया गया।

भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: गुजरात में भाजपा ने 38 विधायक घर बैठाए, सर्वाधिक 49 टिकट ओबीसी को।

आधार कार्ड को अब हर 10 वर्ष में अपडेट करना होगा। यह खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है। इसके लिए पहचान और निवास प्रमाणपत्र दिखाना होगा। केंद्र सरकार ने आधार नियमों में संशोधन कर इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
हिंदुस्तान में खबर दी है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में भी मकान का नक्शा पास करवाना होगा।

पीएफआई के 3 खाताधारकों पर यूएपीए के तहत कार्रवाई होगी। भागलपुर से हिन्दुस्तान ने अपनी एक्सक्लूसिव खबर में बताया है कि जिनपर यह कार्रवाई होगी उनमें एहसान परवेज (स्टेट सेक्रेटरी इस्लामटोला, जोकीहाट, अररिया) नुरुद्दीन जंगी (लीगल हेड) और महबूब आलम (जिलाध्यक्ष घरवारा, सीतामढ़ी) शामिल हैं।

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: मतांतरित ईसाई-मुस्लिमों को नहीं मिलना चाहिए आरक्षण। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में यह बात करी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा है कि इसका कोई आकलन नहीं है कि मतांतरण करने वाले दलितों के लिए वहां भी उसी स्तर पर पिछड़ापन है।

अनछपी: केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार धार्मिक भेदभाव करने के नए-नए उदाहरण पेश करती रहती है। इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून- सीएए से उसने विशेष तौर पर मुसलमानों को बाहर रखा है। अब धर्मांतरण में उसने ईसाईयों को भी आरक्षण के लाभ से वंचित करने की बात सुप्रीम कोर्ट में कही है। ध्यान रहे कि धर्म बदलने पर बौद्ध और सिख बनने वालों को अनुसूचित जाति का आरक्षण संबंधी लाभ मिलता रहता है और इस सरकार ने भी इस व्यवस्था को जारी रखा है। केंद्र सरकार ने यह हलफनामा एक गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की याचिका पर दिया है। एनजीओ ने मुस्लिम और ईसाई धर्म अपनाने वाले दलित समूहों को आरक्षण एवं अन्य सुविधाएं देने की मांग की है। कई संगठनों का कहना है कि ऐसे लोग धर्म बदलकर छुआछूत और उत्पीड़न के दायरे से बाहर निकल गए हैं। ऐसे में उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि आंकड़ों से पता चलता है कि इन धर्मों में जातीय आधार पर भेदभाव नहीं है, न ही उन धर्मों में में उत्पीड़न होता है ऐसे में मत आंतरिक मुस्लिम और इसाई उन लाभों का दावा नहीं कर सकते जिनकी अनुसूचित जातियां हकदार हैं। सरकार के इस हलफनामे के पीछे वास्तव में वह डर शामिल है कि अनुसूचित जाति के लोग हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे धर्म विशेषकर इस्लाम और ईसाइयत को भूल कर रहे हैं। यह कहना कि उनके धर्मों में उत्पीड़न नहीं है अच्छी बात है लेकिन जो उत्पीड़न उन्होंने अब तक झेला है उसके आधार पर उन्हें आरक्षण कल आप देना ही न्यायोचित है। सरकार की चिंता धर्म परिवर्तन नहीं न्याय होनी चाहिए और न्याय यही है कि जैसे सिखों और बौद्धों को धर्म परिवर्तन के बावजूद अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ मिलता है वैसे ही मुसलमानों और ईसाइयों को मिलना चाहिए।

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