बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आरा में कस्टम डिपार्टमेंट के एक रिटायर्ड अफसर को गोलियों से भून डाला गया वहीं नालंदा ज़िले में शराब तस्करों की फायरिंग में सिपाही की मौत हो गई। चुनौती आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की घोषणा की है।
और, बिहार में पहली बार ट्रिपल तलाक़ कानून के तहत सज़ा और जुर्माने का कोर्ट ऑर्डर।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार आरा में क्षत्रिय कल्याण संघ के अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त कस्टम अफसर रामकुमार सिंह की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। टहलने निकले रामकुमार सिंह को घर के सामने ही जैन कॉलेज गेट के समीप सुबह करीब छह बजे सात से आठ गोलियां मारी गईं। घटनास्थल से आधा दर्जन खोखे भी बरामद किए गए हैं। इधर, वारदात के बाद गुस्साये लोगों ने सड़क जाम कर पांच घंटे तक बवाल किया। इस दौरान लोगों की पुलिस के अफसरों के साथ नोकझोंक भी हुई। पूर्व अधिकारी मूल रूप से बिहिया के लहंग डुमरिया गांव निवासी स्व. हरवंश सिंह के 70 वर्षीय पुत्र थे। अभी वह नवादा थाना क्षेत्र के कनकपुरी में मकान बनाकर रहते थे। 2015 में पटना से रिटायर होने के बाद वह समाज सेवा में लगे थे। रेडक्रॉस, रोटरी क्लब और नगर रामलीला समिति से भी जुड़े थे। परिजनों ने बलबतरा की 14 कट्ठा जमीन पर कब्जा करने के लिए 14 लोगों पर हत्या व हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। इस मामले में एसपी ने थानाध्यक्ष राम कल्याण यादव को निलंबित कर दिया है। वहीं, पुलिस एक आरोपित मनोज सिंह उर्फ लक्की को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
पावापुरी में शराब तस्करों की फायरिंग में सिपाही की मौत
नालंदा के गिरियक थाना क्षेत्र में एनएच 20 पर बुधवार की देर रात शराब तस्करों ने उत्पाद विभाग और पुलिस की टीम पर हमला किया। इस दौरान पीछा कर रहे उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना गिरियक थाना और पावापुरी ओपी क्षेत्र की सीमा पर बिहारशरीफ-नवादा मार्ग पर हुई। 30 वर्षीय अजीत नगरनौसा थाना क्षेत्र के नगवां गांव निवासी सेवानिवृत्त दारोगा मदन प्रसाद के पुत्र थे। वह पटना में उत्पाद विभाग में कार्यरत थे। एसपी हृदयकांत ने बताया कि झारखंड से कोडरमा के रास्ते में नालंदा में शराब लाये जाने की गुप्त सूचना मिली। इसपर उत्पाद विभाग की टीम ने राजगीर उत्पाद थाना और स्थानीय पुलिस की मदद से घेराबंदी की। जैसे ही शराब लदा वाहन नवादा जिले के खरांट मोड़ से नालंदा में दाखिल हुआ, टीम ने पीछा करना शुरू कर दिया। अजीत एक वाहन पर ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठे थे। उन्होंने हाथ से गाड़ी को रुकने का इशारा किया। इसी दौरान तस्कर एक स्कॉर्पियो से पहुंचा और चलते पुलिस वाहन में बैठे सिपाही को गोली मार दी। गोली अजीत के सिर में लगी। इसके बाद पुलिस की टीम उनको पावापुरी मेडिकल कॉलेज ले गयी। यहां से उन्हें पटना रेफर किया गया। पटना जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी। राजगीर डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि तस्करों की पहचान की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि चार साल पहले उत्पाद विभाग में उनका चयन हुआ था।
एसआईआर के बाद अब एसएसआर: 17 राज्यों में वोटर लिस्ट रिवीजन
भास्कर के अनुसार निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की घोषणा की। इनमें यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर भी हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव है। आदेश ऐसे समय में आया है, जब एसआईआर में वोटर्स के नाम हटाने और फॉर्म-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठे हैं। इस मुद्दे पर देशभर में प्रदर्शन भी हो रहे हैं। एसएसआर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना नहीं करेंगे। मौजूदा लिस्ट के आधार पर नए नाम जोड़े जाएंगे, गलत एंट्री सुधरेंगी और गलत वोटर्स के नाम तय प्रक्रिया के तहत हटेंगे। आयोग के 15 पेज के आदेश की सबसे अहम बात वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर ज्यादा निगरानी है। किसी बूथ पर 2% से अधिक नाम हटने की सूरत में ईआरओ को स्वयं जांच करनी होगी। इसी तरह, एक व्यक्ति 5 से अधिक नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराता है तो भी ईआरओ को जांच करनी होगी।
केंद्रीय गृह सचिव ने बिना शर्त माफी मांगी
हिन्दुस्तान के अनुसार केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगी है। यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेआई) द्वारा 10 अक्तूबर को बुलाए गए विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर ‘पूर्ण प्रतिबंध’ न लगाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में, मोहन ने बताया कि दिल्ली पुलिस से 10 अक्तूबर को रात 10 बजे तक, एक दिन के लिए सेलुलर इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध मिला था।
हिंदू से मुसलमान हुए तो रिजर्वेशन नहीं: सुप्रीम कोर्ट
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मतांतरण के बाद आरक्षण का लाभ लेने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से किसी गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में मतांतरण करने वाला व्यक्ति अपने पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर संविधान के अनुच्छेद-16(4) के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्लाम स्वीकार कर लेने मात्र से कोई व्यक्ति राज्य के अधिसूचित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग समुदायों में से किसी एक का सदस्य नहीं बन जाता। मतांतरण से पहले को अपने आप किसी दूसरे धर्म के नहीं किया जा सकता। हिंदू, सिख की जाति या सामुदायिक पहचान पिछड़ा वर्ग समुदाय में स्थानांतरित या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) का सदस्य नहीं माना जा सकता। यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज करते हुए सुनाया है। कोर्ट ने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि पुनः मतांतरण पर स्वतः लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी को तथ्यों की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
बिहार में पहली बार ट्रिपल तलाक़ कानून के तहत सज़ा और जुर्माना
पत्नी को ट्रिपल तलाक देने और मारपीट के मामले में पटना जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने गुरुवार को बिहटा के सिमरी निवासी पति नौशाद अहमद को दो वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. साथ ही साढ़े छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर अभियुक्त को एक महीना 22 दिन अतिरिक्त जेल में रहना होगा. जुर्माना की राशि मामले की परिवादिनी को दी जायेगी. जानकारों के मुताबिक बिहार का यह पहला मामला है, जब तीन तलाक में किसी की सजा सुनायी गयी है.
अदालत में क्या इल्ज़ाम लगा
नौशाद और रजिया की शादी 9 नवंबर 2001 को हुई थी. उन दोनों से तीन बच्चे भी हुए. शादी के 16 साल बाद 2017 से पति का बर्ताव पत्नी के प्रति खराब हो गया. नौशाद हमेशा मारपीट व अपशब्दों का प्रयोग करता था. उसने 14 नवंबर 2017 को पत्नी को मारपीट कर घर से निकाल दिया और आर्थिक मदद बंद कर दी थी. 31 अगस्त 2022 को नौशाद किराये के मकान में आया और रजिया व बच्चों के साथ मारपीट की. आरोप है कि उसने तेजाब फेंक कर जख्मी करने का प्रयास किया था और घर में रखे सारे सामान को तोड़ दिया था. इसके बाद गहना भी जबरन लेकर चला गया था. आरोपों के अनुसार नौशाद ने पांच सितंबर 2022 को रजिया को तीन तलाक दे दिया. रजिया खातून उर्फ गुड़िया ने फुलवारी थाना में आइपीसी की धारा 341, 323, 326, 511, 354 (बी), 379, 427, और ट्रिपल तलाक अधिनियम 2019 की धारा 4 के अंतर्गत मामला दर्ज कराया था. जांच के बाद पुलिस ने मामले को सत्य पाते हुए 31 जुलाई 2023 को दोषी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया.
कुछ और सुर्खियां:
- आय से अधिक संपत्ति के मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर चंद्रशेखर सिंह के चार ठिकानों पर छापेमारी, दार्जिलिंग में 31 कट्ठा जमीन
- बिहार कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी जितेंद्र कुमार रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के डायरेक्टर जनरल बने
- आईजीआईएमएस में रैगिंग के आरोप में तीन छात्र सस्पेंड
- बिहार में वर्ष 2027 में सरकारी कर्मचारी 38 दिन तक छुट्टी ले सकेंगे
- आमिर खान के रिश्तेदार एक्टर इमरान खान को 28 तक भारत छोड़ने का आदेश, इमरान हैं ओसीआई कार्ड लधारी अमेरिकी नागरिक
- प्राइवेट शिक्षण संस्थानों को इंडिया, इंडियन और नेशनल जैसे शब्द हटाने का आदेश
अनछपी: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कि जो लोग ओबीसी और दलित वर्ग से अपना धर्म परिवर्तन करेंगे उन्हें रिजर्वेशन का लाभ नहीं मिलेगा दरअसल भारत में धर्म चुनने की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला दिया कि शेड्यूल कास्ट या ओबीसी वर्ग से आने वाला व्यक्ति अगर हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर हिंदू सामाजिक व्यवस्था में आता है तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यह लाभ उन्हें मिलता है जिनकी पहचान संविधान द्वारा आरक्षण के लिए की गई है। अगर संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था की गई है तो संविधान संशोधन का भी रास्ता चुना जा सकता है लेकिन किसी के पिछड़ेपन को सिर्फ इसलिए नामंजूर करना क्योंकि उसने धर्म परिवर्तन कर लिया है दरअसल धर्म परिवर्तन से रोकने की एक असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसका विरोध करना और जिसे दूर करना जरूरी है। पहले तो यह कहा गया था कि शेड्यूल्ड कास्ट के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो धर्म परिवर्तन की वजह से हिंदू धर्म में पाया जाने वाला छुआछूत आगे नहीं जाता इसलिए उन्हें शेड्यूल्ड कास्ट का दर्जा नहीं मिलेगा और आरक्षण भी नहीं मिलेगा। अब यह बात ओबीसी यानी पिछड़े वर्ग के लिए भी कही जा रही है। पहले यह बात हिंदूत्ववादी राजनीति में कही जाती थी और अब खेदजनक बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी यही फैसला दिया है जो किसी भी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अनुरूप नहीं है।
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