छ्पी-अनछपी: ज्ञानेश पर लगे आरोपों की जांच होगी, नेतन्याहू की कुर्सी मुश्किल में 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 में बदलाव और उसके दूसरे कामकाज को चुनौती देने वाली अर्जी पर निर्वाचन आयोग और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है क्योंकि उन्हें चुनाव में पर्याप्त सीट नहीं मिली। सारण शिक्षक विधान परिषद सीट से जनसुरज समर्थित आफाक अहमद चुनाव हार गए हैं।

पहली खबर

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 17 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, हमें सब कुछ पता है। हम इस मुद्दे से जुड़े सभी आरोपों और बिंदुओं की जांच करेंगे। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिन में ईसीआई के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने को कहा है। ईसीआई ने सोमवार को हलफनामा में कहा था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्तों डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी की आपत्तियों को दरकिनार कर आयोग की ओर से अकेले फैसला ले रहे हैं। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं, जिनमें ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती दी गई है। 

फाइल नोटिंग्स सुरक्षित रखने की मांग उठाई

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की तरफ से दाखिल याचिका में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से आयोग को फाइल-नोटिंग्स और आतरिक संचार को सुरक्षित रखने का आदेश देने की मांग की। सिंघवी ने कहा यह पूरा मामला फैसला लेने की प्रक्रिया, सलाह-मशविरे और इस बात पर निर्भर करता है कि फैसला एकमत से लिया गया था या नहीं।

राहुल बोले- ज्ञानेश की स्थिति तक जारी रहेगा आंदोलन

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में शीर्ष स्तर से मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा रही है। इसके जरिये करोड़ों लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने या प्रधानमंत्री के उन्हें पद से हटाए जाने तक विपक्ष की यह लड़ाई जारी रहेगी। राहुल गांधी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने उन लोगों से बातचीत की, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वोट हर भारतीय नागरिक का अधिकार है, लेकिन एसआईआर के जरिये करोड़ों लोगों से उनका अधिकार छीना जा रहा है।

कर्नाटक में 99.3 लाख मतदाताओं के नाम काटे

कर्नाटक में एसआईआर के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें मतदाताओं की संख्या 99.32 लाख कम हो गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची में 4.55 करोड़ वोटर हैं। एसआईआर से पूर्व राज्य में 5,54,32,314 मतदाता थे। इस तरह मतदाताओं की संख्या में 99.32 लाख की कमी आई है।

बिन्यामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में

बीबीसी के अनुसार इसराइल में मतदान का प्रतिशत अब तक रिकॉर्ड स्तर पर है. देश में हो रहे इन चुनावों को कई लोग इसराइल के इतिहास के सबसे अहम चुनावों में से एक मान रहे हैं. शुक्रवार को जारी हुए सर्वे के मुताबिक़, प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़नकोट के बीच लगभग बराबरी का मुक़ाबला है. लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों में से किसी के भी राजनीतिक गठबंधन को बहुमत की सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 61 सीटें नहीं मिलेंगी. इसका मतलब है कि चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर कई हफ़्तों या महीनों तक राजनीतिक खींचतान चल सकती है।

चैनल 12 के एक प्रमुख एग्जिट पोल में 120 सदस्यीय इसराइली संसद में सीटों का अनुमान इस तरह लगाया गया है-

नेतन्याहू का गठबंधन – 50

नेतन्याहू विरोधी यहूदी पार्टियां- 52

अरब पार्टियांः राअम और जॉइंट लिस्ट- 18

बहुमत का आंकड़ा-61

जनसुरज समर्थित आफाक अहमद चुनाव हार 

विधान परिषद के सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राहुल राज ने जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को 1815 मतों से पराजित किया है। निवर्तमान विधान पार्षद आफाक अहमद तीसरे स्थान पर रहे। 2020 के चुनाव में इस सीट पर भाकपा के केदारनाथ पाडेय की जीत हुई थी। 2022 में उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में जनसुराज समर्थित निर्दलीय आफाक अहमद जीते थे। 

मंगलवार देर रात तक के परिणाम-रुझान: 

तिरहुत शिक्षक : भाजपा समर्थित उम्मीदवार डा. नरेंद्र प्रसाद सिंह जीते। दूसरे स्थान पर निर्दलीय भूषण कुमार झा रहे। सीपीआई समर्थित डा. संजय कुमार सिंह से यह सीट छिन गई।

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन: जनसुराज समर्थित सुरेश प्रसाद राय चुनाव जीत गए है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। कांग्रेस समर्थित डा. मदन मोहन झा दूसरे स्थान पर रहे।

पटना शिक्षक : राजद समर्थित संजीव कुमार दूसरी वरीयता के मतों की गिनती में 800 वोटों से आगे हो गए। भाजपा समर्थित डा. नवल किशोर यादव उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

पटना स्नातकः जदयू समर्थित नीरज कुमार राजद के दिलीप पटेल पर 350 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं। देर रात तक मतगणना जारी रही।

केसरिया की मुख्य पार्षद और पति के पास 5 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई

भास्कर के अनुसार पूर्वी चंपारण के केसरिया नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी और उनके पति सह भाजपा नेता रजनीश कुमार पाठक उर्फ रिंकू पाठक के दानापुर और केसरिया स्थित 5 ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने छापेमारी की। आरोप है कि दोनों ने कई मामलों में सरकारी दर से कम पर रजिस्ट्री करवाई और बदले में नकद पैसे वसूले। इस तरह दोनों ने 5.70 करोड़ की संपत्ति बनाई छापा में बड़ी संपत्ति का पता चला। रजनीश ने 15 साल में 5.70 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति बना ली।

कुछ और सुर्खियां:

  • जन सुराज पार्टी के डिजिटल मीडिया मैनेजर देव पालिक गुप्ता कैलाश रांची के पास झाड़ियों में मिली
  • गोपालगंज के होटल के कर्मचारी की हत्या के मामले में भाजपा के एमएलसी राजीव कुमार पर एफआईआर
  • नेशनल हाईवे के टोल के 20 किलोमीटर दायरे वालों को 1 नवंबर से ₹1500 में मिलेगा सालाना पास
  • टेंडर घोटाले में 6 आईएएस अफसर को ईडी का नोटिस, आनंद किशोर भी तलब किए गए
  • साइक्लोनिक तूफान अर्नब का कर शुरू आंध्र प्रदेश में तत्वों से टकराईं समुद्री लहरें
  •  दरभंगा के दो, पटना, छपरा, मधेपुरा, और मुजफ्फरपुर के एक-एक विश्वविद्यालय के कुलपतियों के नीतिगत फैसले पर रोक
  • नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोपित 146 स्टूडेंट 3 महीने के लिए सस्पेंड

अनछपी: मुनाफा कमाना व्यापारियों का अधिकार है और दरअसल मुनाफे के लिए ही व्यापार किया जाता है लेकिन मुनाफा कमाना और मुनाफाखोरी करना दो अलग-अलग बातें हैं। मुनाफाखोरी सही शब्द है या नहीं, इस बहस में पड़े बिना यह कहा जा सकता है कि जब बेतहाशा मुनाफा लिया जाए और इसमें लोगों की मजबूरी शामिल हो तो उसके लिए यह सही शब्द है। ऐसा ही एक मामला पिछले कई सप्ताह से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है जहां इस बात पर चर्चा हो रही है कि कैंसर की दवाओं पर कितने प्रतिशत तक का मुनाफा सही होगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कैंसर की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और रिटेल विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत (रिटेलर प्राइस) के बीच 70-80 प्रतिशत के भारी अंतर पर सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने तो यह भी पूछा कि दवाओं के मूल्य निर्धारण में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद पूरा तंत्र दवा निर्माताओं की मदद में क्यों जुटा है? उसने पूछा, “कीमतों का ये भारी अंतर क्या तर्कसंगत है? इस ‘लूट’ का कोई औचित्य है? क्या निर्माताओं को ‘मनमानी करने की छूट’ दी जानी चाहिए?” कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा आम नागरिक और गरीब मरीजों से जुड़ा है, यह केवल व्यापार का मामला नहीं है। यही बात मुनाफा कमाने और मुनाफाखोरी में फर्क बताती है। केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि वह दवाओं की कीमतों की निगरानी कर रही है, लेकिन कोर्ट इन तर्कों से संतुष्ट नहीं दिखा। सरकार की दलील तब सही मानी जाती जब इसका असर दवा की दुकानों पर होता और कैंसर के मरीजों को सही कीमत पर दवाएं मिलतीं। सुप्रीम कोर्ट ने एनपीपीए यानी नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के बारे में भी यह कहा कि लगता है कि वह कुछ कर नहीं रहा है। ऐसे में सरकार की ढिलाई और दवा पर नजर रखने के लिए बनाई गई अथॉरिटी की निष्क्रियता का मतलब मिलीभगत के तौर पर भी देखा जा सकता है। 

 

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