छपी-अनछपीः बिहार में सरकार से भाजपा आउट, अब झारखंड में हेमंत सरकार पर तलवार

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। अपने साम-दाम-दंड-भेद के तमाम तिकड़मों के लिए मशहूर हो चुकी भारतीय जनता पार्टी को मंगलवार को उस जगह अमंगल का सामना करना पड़ा जहां उसे नीतीश कुमार जैसे मंझे हुए नेता का 15 सालों तक सरकार में साथ मिला। अलग होने का फैसला भी भाजपा ने नहीं, नीतीश ने लिया और यह 2013 के बाद दूसरी बार हुआ है। नीतीश कुमार आज आठवीं बार शपथ लेंगे मगर असली बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर यह एनडीए के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। वैसे, भाजपा तो भाजपा है, इसलिए उसकी नजर अब झारखंड की हेमंत सरकार पर है जहां लोकपाल ने सोरेन परिवार को नोटिस भेजी है।
आज की सबसे बड़ी खबर क्या है, यह बताने की जरूरत नहीं। हिन्दुस्तान की हेडलाइन हैः बिहार में फिर महागठबंधन की सरकार। नीतीश कुमार ने 243 विधायकों वाली विधानसभा में 164 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।
प्रभात खबर की हेडिंग एक दूूसरी बात की तरफ भी इशारा करती हैः एनडीए टूटा, अब महागठबंधन की सरकार, नीतीश सीएम व तेजस्वी बनेंगे डिप्टी सीएम।
भास्कर की हेडिंग छोटी है लेकिन नीतीश कुमार के कद बढ़ने का संकेत देती हैः नीतीश…अब और तेजस्वी। यानी नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी तो आ ही गये, खुद नीतीश और अधिक तेजस्वी हो गये।
जाहिर है, भाजपा अब धोखे की शिकायत कर रही है। इसके प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल कह रहे हैं बिहार की जनता और भाजपा के साथ धोखा हुआ है। यही काम नीतीश कुमार ने 2017 में किया था, तब वे जीते तो महागठबंधन के साथ मगर आ गये थे भाजपा के साथ। खैर, विशुद्ध राजनीति में नीति-वीति नहीं, नंबर चलता है।
रांची से हिन्दुस्तान और अन्य अखबारों ने खबर दी है कि तत्कालीन कोयला मंत्री शिबु सोरेन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को लोकपाल की ओर से एक नोटिस गयी है जिसका जवाब उनसे 25 अगस्त तक देना है। यह मामला अगस्त 2020 में दर्ज हुआ था। उनपर अवैध कमाई करने और बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप है। इस खबर को दो नजरिए से देखा जा सकता है। पहला तो यह कि यह भ्रष्टाचार पर वार है और दूसरा यह कि यह वास्तव में शिबु सोरेन के बेटे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर वार है। यह बात भी याद रखने की है कि हेमंत सोरेन पर नियमों का उल्लंघन कर खदान लीज पर लेने का मामला चुनाव आयोग में है। इस बारे मंे 12 अगस्त को फैसला आना है।
कई राजनीतिक विश्लेषक इन दोनों मामलों को जोड़कर देखते हुए कह रहे हैं कि बिहार में पछाड़े जाने के बाद झेंप मिटाने के लिए झारखंड सरकार को अस्थिर करने की कोशिश और तेज होगी। यहां आॅपरेशन लोटस की जोरदार चर्चा है हालांकि कांग्रेस के तीन विधायकों के नोटों की गड्डियों के साथ बंगाल में पकड़े जाने के बाद वह आॅपरेशन धक्का खा चुका है।
आज की दूसरी खबरों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के घर पर एफबीआई के छापे की खबर भी प्रमुखता से छपी है। इसके अलावा बिहार में आर्थिक अपराध इकाई 13 डीएम, 6 डीडीसी और 38 अफसरों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। यह खबर हिन्दुस्तान में प्रमुखता से छपी है।
अनछपीः बिहार विधानसभा 2020 के चुनाव के दौरान नीतीश कुमार का एक बयान बहुत चर्चा में आया था कि यह उनका आखिरी चुनाव है। तब इसके बारे में यह भी कहा गया था कि नीतीश कुमार ने यूं ही बोल दिया है। लेकिन मंगलवार को जिस तरह वे भाजपा से अलग होकर महागठबंधन का मुख्यमंत्री होने को दोबारा राजी हुए, इसे ध्यान में रखकर सोचा जाए तो शायद नीतीश ने सही कहा था- उनका आखिरी विधानसभा चुनाव। अब उनके पीएम मटेरियल वाली चर्चा फिर जोरों पर है। यह बात ध्यान रखने की है कि बिहार में इसे जरूर तेजस्वी-नीतीश मिलन के रूप में देखा जा रहा है लेकिन यह काम कांग्रेस के सक्रिय सहयोग से हुआ है यानी इस पुनर्मिलन की अगुवा कांग्रेस ही है। इसके साथ ही कांग्रेस से किसी ठोस आश्वासन के बाद ही नीतीश कुमार ने राजद से अपने बहुत अच्छे रिश्ते न होेने के बावजूद इधर आना मंजूर किया होगा। कांग्रेस के लिए नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनना असली मुद्दा नहीं बल्कि भाजपा से उनकी दूरी और एनडीए को एक मजबूत नेता से वंचित करना महत्वपूर्ण है।

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