कोविड से मृत्यु के आंकड़े : वास्तविक बनाम आधिकारिक

एम. एस. ख़ान

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर भारत में वास्तविक कोरोना मौतों के अनुमान (लगभग 3 लाख के आधिकारिक आंकड़ों के मुकाबले लगभग 42 लाख) के विवाद को पढ़कर, अपने गांव के डेटा की जांच करने के लिए मेरे दिमाग में आया, जो मुझे विश्वसनिय रूप से ज्ञात है।

मेरा गृह ग्राम बिहार के गया जिले में चरकी के पास बैदपुरा है। मार्च से मई 2021 तक, कुल मिलाकर 5 व्यक्तियों (शाकिर एवं उनकी पत्नी, मुमताज, इबरार और नासिर) की कोरोना से मृत्यु हो गई (3 कोरोना की पुष्टि हुई है, एक को हृदय की समस्या भी थी और एक अकेला वरिष्ठ व्यक्ति कोविड लक्षण के साथ बिना दवा, देखभाल और भोजन के एकान्त में रह रहा था)। इनमें से केवल एक (शाकिर) की रिपोर्ट हुई होगी क्योंकि ऑक्सीजन की कमी के कारण गया के एएनएमएम अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी।

मेरे गाँव की आबादी 757 है (6 वर्ष तक के बच्चों को छोड़ कर)। इस बीच मेरे गाँव के लगभग 15 प्रतिशत लोग बुखार, खांसी, शरीर में दर्द से गुजरे हैं जो कि कोविड के लक्षण हैं, लेकिन किसी की भी कोविड जाँच नहीं हो पाई (जब मेरे जैसा व्यक्ति जो गया शहर में रहता है और मुझ समेत 5 व्यक्तियों के परिवार को कोविड के लक्षणों के बावजूद जाँच करवाने के अनथक प्रयास करने पर भी जाँच की सुविधा न मिल पायी, तब ग्रामीणों के बारे में क्या कहा जाए) और वे सभी लोग दवा के साथ या बिना दवा के ठीक हो गये सिवाए पाँच लोगों के।

ज्ञात आंकड़ों के आधार पर, मेरे गांव में कोविड मृत्यु (मार्च से मई, 2021) कुल वयस्क आबादी का 0.66 प्रतिशत है। इसमें से केवल एक व्यक्ति को आधिकारिक आंकड़ों में सूचित किया गया होगा जिनका निधन अस्पताल में हुआ था, जो कि 0.13 प्रतिशत है। वास्तविक और आधिकारिक डेटा के बीच का अंतर 0.53 प्रतिशत (0.66-0.13) है। इसका मतलब है कि आधिकारिक रिपोर्टिंग वास्तविक मौतों की लगभग 20 प्रतिशत है।

अतः इस आधार पर अनुमानित रूप से कहा जा सकता है कि रिपोर्ट की गयी 3 लाख कोविड मौत 15 लाख हो सकती है। बड़े शहरों और कुछ राज्यों में मौतों का अनुपात बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है, क्योंकि बिहार की ग्रामीण आबादी मेहनत मजदूरी और कड़ी परिस्थितियों के बीच जीवनयापन करने से मजबूत प्रतिरक्षा शक्ति रखती है और महामारी संक्रमित आबादी के संपर्क में भी कम है। इस अंतर को ध्यान में रखते हुए, वास्तविक कोविड की मौतें उपरोक्त से कुछ अधिक हो सकती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह न्यूयाॅर्क टाइम्स के अनुमान के अनुसार 42 लाख नहीं होना चाहिए।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि न्यूयॉर्क टाइम्स का अनुमान भी वास्तविक आँकड़ों से कम है। दो तीन लोगों ने अपने मुहल्ले की गणना करके बताया कि मृत्यु दर उनके मुहल्ले की कुल आबादी का ०.६-०.८ प्रतिशत तक है। यह तो निश्चित है कि कोविड मृतकों की सही गणना का हमारे प्रशासन के पास कोई ठोस मेकैनिज्म नहीं है।

(मेरे गांव के आसपास के अन्य गांवों से भी कोविड से होने वाली मौतों की रिपोर्ट मेरे पास पहुंची है, लेकिन सटीक संख्या के बिना। इसलिए मैं अपने गांव के आंकड़ों को दूसरे गांवों तक फैलाने की स्थिति में नहीं हूं, कहीं कुछ कम हो सकती है और कहीं कुछ अधिक हो सकती है)।

लेखक वरिष्ठ समाजसेवी हैं।

Featured image: The Times of India

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