नीतीश कुमार का तीसरा गुस्सा, मगर क्यों?

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने गुस्से के लिए लगातार चर्चा में रह रहे हैं। सोमवार को विधान परिषद में प्रश्नोत्तर काल के दौरान वे राजद के विधान पार्षद सुबोध कुमार पर सदन का नियम जानने की नसीहत देने उठे तो बीच में भड़क गये।
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद विधानमंडल में गुस्सा होने का नीतीश कुमार का यह तीसरा चर्चित मामला है। सबसे पहले वे नेता प्रतिपक्ष, तेजस्वी यादव की बात पर भड़के थे। दूसरी बार आरजेडी के विधान पार्षद सुनील पर गुस्सा निकाला। और अब तीसरी बार उनके गुस्से का शिकार हुए हैं सुबोध कुमार।
किस बात पर गुस्साये नीतीश
नीतीश कुमार इस बात पर खड़े हुए कि पूरक प्रश्न प्रश्नकर्ता पहले पूछता है और तब बाकी सदस्यों की बारी आती है मगर मुख्यमंत्री के अनुसार श्री सुबोध ने प्रश्नकर्ता से पहले ही पूरक प्रश्न पूछ लिया। प्रश्नकर्ता थे आरजेडी के एमएलसी मोहम्मद फारूक। उन्होंने एक तारांकित प्रश्न ग्रामीण कार्य मंत्री जयंत राज से पूछा था। उनके जवाब से मोहम्मद फारूक संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने पूरक सवाल किया। इसी बीच श्री सुबोध ने भी अपना पूरक प्रश्न पूछ लिया।
इस बात पर नीतीश कुमार ने खड़े होकर नियम की जानकारी देनी शुरू की तो श्री सुबोध नेयह कहा कि ऐसे पूरक प्रश्न सत्ता पक्ष के लोग बराबर करते आये हैं।
इसके बाद कार्यकारी सभापति ने उन्हें बैठने को कहा लेकिन श्री सुबोध नहीं बैठे तो नीतीश कुमार बिफर गये। उन्होंने कहा कि जब मैं खड़ा हूं तो आप कैसे बोलिएगा। उन्होंने नियम की जानकारी लेने को कहा और श्री सुबोध के बगल में बैठे आरजेडी के सीनियर लीडर रामचंद्र पूर्वे को भी सलाह दी कि वे श्री सुबोध को जानकारी दें।
इससे कुछ ही दिन पहले दो मार्च को नीतीश कुमार शराबबंदी और बिजली के मुद्दों पर की गयी आरजेडी एमएलसी सुनील कुमार सिंह की टिप्पणी पर भड़के थे। उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद का नाम लिये बिने सुनील सिंह से कहा था कि कहीं जेल से इस बात के लिए फोन न आ जाए कि चुप क्यों थे। नीतीश कुमार दरअसल उनकी टोकाटाकी से झल्लाये थे। उन्होंने सुनील कुमार की अध्यक्षता में चल रहे बिस्कोमान की जांच की बात भी कही।
पिछले साल विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड को 43 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रहना पड़ा था। इसके बाद विधानसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हत्या का अभियुक्त रहने और अन्य आरोप लगाये तो मुख्यमंत्री अचानक से तमतमा गये और कहा था कि भाई जैसे दोस्त लालू प्रसाद की वजह से वह बहुत कुछ सुन लेते हैं।

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