छपी-अनछपीः फुलवारी का मामला एनआईए को, सीबीएसई रिजल्ट में नंबर की भरमार

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। 11 जुलाई को फुलवारी शरीफ में कथित देशद्रोही गतिविधियों पर हो रहे धर पकड़ का मामला अब बिहार पुलिस के हाथ से निकलता जा रहा है। आज के अखबारों ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि इस मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी- एनआईए करेगी। इसके अलावा सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं के रिजल्ट की खबर भी प्रमुखता से छपी है।
हिन्दुस्तान की लीड दिल्ली से हैः फुलवारी माड्यूल की जांच एनआईए करेगी। इसमें बताया गया है कि दोनों मामले-पीएफआई और ’गजवा-ए-हिंद’- की जांच एनआईए करेगी। भास्कर की लीड हैः फुलवारी टेरर माड्यूल की जांच अब एनआईए को, केन्द्र ने दी हरी झंडी। प्रभात खबर ने शीर्षक दिया हैः एनआईए करेगी फुलवारी में जेहादी ट्रेनिंग की जांच। जागरण और टाइम्स आॅफ इंडिया ने भी इसे प्रमुख जगह दी है। अखबारों में टेरर माड्यूल और जेहादी ट्रेनिंग जैसी शब्दावली धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही है।
जागरण की पहली खबर कोलकाता से हैः सीएम ममता के दो मंत्रियों के ठिकानों पर छापा, 20 करोड़ बरामद।
प्रभात खबर और टाइम्स आॅफ इंडिया में सीबीएसई की 12वीं और 10वीं के रिजल्ट की खबर लीड है। अन्य अखबारों में भी यह खबर पहले पेज पर है।
अपनी खबरों में अल्पसंख्यकों और खासकर मुसलमानों को टारगेट करने वाले जागरण अखबार की किशनगंज की खबर पर ध्यान देने की जरूरत है। इसकी सुर्खी हैः किशनगंज के 19 स्कूलों में शुक्रवार को होता है अवकाश। इसके साथ शिक्षा अधिकारी का यह बयान भी है कि यह उन स्कूलों के स्थापना काल से ही होती आ रहा है। इसके बावजूद इसे खबर बनाना वास्तव में पत्रकारिता नहीं, एजेंडा चलाना है। इसी अखबार ने ऐसी ही खबरें झारखंड में भी चलायी थी।
हिन्दुस्तान ने खबर दी है कि बिहार में आज और कल यानी शनिवार और रविवार को सरकार का आॅनलाइन काम बंद रहेगा।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को 15 दिनों के बाद एम्स, दिल्ली से छुट्टी मिलने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। लालू फिलहाल दिल्ली में अपनी बेटी मीसा देवी के पास रहंेगे।
आरा और बलिया को रेलवे से जोड़ने की योजना की खबर भी प्रमुखता से छपी है।
नेपाल की संसद में नागरिकता विधेयक पारित होने की खबर हिन्दुस्तान और भास्कर में प्रमुखता से छपी है। इससे वहां तराई में रह रहे 15 लाख लोगों को बतौर वंशज नागरिकता मिलेगी। भारत में पारित सीएए में नागरिकता से वंचित किये जाने की बात को यहां के अखबार दबा देते थे लेकिन नेपाल की इस नागरिकता कानून में नागरिकता देने की बात को बहुत खुशी के साथ पेश किया गया है।
अनछपीः हर साल सीबीएसई के रिजल्ट के वक्त अखबार में टाॅपरों और स्कूल के हिसाब से सफलता की खबरें छपती हैं। एक तरफ विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों को नंबर के पीछे नहीं भागना चाहिए। उनका ध्यान पढ़ाई और ज्ञान प्राप्ति पर होना चाहिए। सृजनात्मकता ही बच्चों की पहचान होनी चाहिए। दूसरी ओर फलां बच्चे को 100 प्रतिशत और फलां स्कूल में इतने बच्चों को 95 प्रतिशत से अधिक अंक आये, ऐसी खबरें अखबारों मंे भरी होती हैं। इसकी एक बड़ी वजह अखबारों को स्कूलों से मिलने वाले विज्ञापन होते हैं। फिर भी हमारे लिए सोचने की बात यह है कि अखबार बच्चों के लिए कैसा माहौल बना रहे हैं। खासकर जब कि केन्द्र सरकार नंबर के पीछे इस पागल दौड़ पर लगाम लगाने के लिए विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए नंबर का आधार हटाकर प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया अपना चुकी है।

 

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