छपी-अनछपी: बिहार में बिजली दर नहीं बढ़ेगी, सासाराम व बिहारशरीफ में रामनवमी पर उपद्रव

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में लगभग 24% बिजली दर बढ़ने की बात फिलहाल टल गई है। इसकी खबर सभी जगह प्रमुखता से ली गई है। रामनवमी पर दूसरे दिन निकाले गए जुलूस के दौरान बिहार शरीफ और सासाराम में उपद्रव की खबर भी पहले पेज पर है। शेखपुरा के मोहम्मद रुम्मान मैट्रिक परीक्षा परिणाम में स्टेट टॉपर बने हैं। इससे संबंधित खबर भी पहले पेज पर है।

हिन्दुस्तान की पहली खबर है: बिहार में बिजली की दरें नहीं बढ़ेंगी: मुख्यमंत्री। जागरण ने लिखा है बड़ी बिजली दर का नहीं पड़ेगा बोझ। बिहार में बिजली महंगी नहीं होगी। बिजली उपभोक्ताओं को पिछले वर्ष के आधार पर ही बिजली शुल्क देना होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को विधानसभा में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो शुल्क बढ़ा है, उसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार सब्सिडी बढ़ाकर करेगी। सरकार ने पिछले साल 8895 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, इस साल 13114 करोड़ की सब्सिडी देगी। इस बढ़ी हुई राशि से आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय भार को खत्म किया जाएगा।

मैट्रिक के टॉपर

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: शेखपुरा के मोहम्मद रुम्मान स्टेट टॉपर, टॉप 10 में 90 परीक्षार्थी शामिल। भास्कर की सबसे बड़ी सुर्खी भी यही है: पहली बार 90 टॉपर, साधन संपन्न पटना से सिर्फ एक। हिन्दुस्तान ने लिखा है राज्य में छोटे शहरों के लालों ने किया कमाल। बिहार बोर्ड ने शुक्रवार को मैट्रिक का रिजल्ट जारी कर दिया। 81.04 फीसदी परीक्षार्थी सफल हुए हैं। यह साल 2022 की तुलना में 1.16 फीसदी ज्यादा है। आठ साल के बाद इस बार मेधा सूची में 90 विद्यार्थी शामिल हैं। रिजल्ट में टॉपरों पर अंकों की बारिश हुई है। बिहार बोर्ड के इतिहास में पहली बार मेधा सूची (टॉप 10) में शामिल 90 विद्यार्थियों को 95.2 फीसदी से 97.8 फीसदी तक अंक आए हैं।

इस्लामिया हाई स्कूल शेखपुरा के विद्यार्थी मोहम्मद रुम्मान अशरफ ने 500 में 489 अंक यानी 97.80% अंक के साथ राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भोजपुर की नम्रता कुमारी व औरंगाबाद की ज्ञानी अनुपमा 486 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। रुम्मान के पिता नजीबुर रहमान शिक्षक हैं।

 

सासाराम और बिहारशरीफ में उपद्रव

सासाराम और बिहार शरीफ में रामनवमी के दूसरे दिन हुए उपद्रव पर हिन्दुस्तान की हेडिंग है: सासाराम-बिहारशरीफ में उपद्रव, स्थिति काबू में। सासाराम और बिहारशरीफ में शुक्रवार को उपद्रवियों ने उत्पात मचाया। दो गुटों में संघर्ष के दौरान अलग-अलग स्थानों पर 18 लोग जख्मी हो गए। पुलिस-प्रशासन ने संख्त कार्रवाई करते हुए स्थिति पर काबू पाया। दोनों शहरों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किये गये हैं। एहतियातन धारा 144 लगा दी गई है। दोनों जगह इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। सासाराम में गुरुवार देर रात हुए विवाद के खुन्नस में शुक्रवार की सुबह 10 बजे दो गुटों में भिड़ंत है गई। इसके बाद कई दुकानों में उपद्रवियों ने क्षति पहुंचाई। घटना नवरत्न बाजार से शुरू हुई, जो कई मोहल्लों में फैल गई। उप्रदव के दौरान पथराव में 12 लोग घायल हो गए। बिहारशरीफ के लहेरी थाना क्षेत्र के गगनदीवान मोहल्ले के पास दो गुटों में रोड़ेबाजी व फायरिंग हुई। छह युवक जख्मी व कुछ चोटिल हुए हैं। भीड़ ने एक दर्जन से अधिक वाहनों व दुकानों को क्षति पहुंचाई।

80 लाख का हीरे का सेट किसके पास!

बिहार के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने शुक्रवार की देर शाम अपनी (पत्नी तथा आश्रित सहित) संपत्तियों का ब्यौरा दिया है। इसकी जानकारी संबंधित महकमे की वेबसाइट पर है। राज्य सरकार की परंपरा के मुताबिक 31 मार्च को घोषित संपत्तियों में ज्यादातर आईएएस अधिकारियों से अमीर उनकी पत्नी हैं। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के पास नकद 65 हजार है। पीएफ में 12 लाख 92 हजार है। बैंक में पांच लाख, 26 हजार 920 रुपये है। उनके पास वर्ष 2013 मॉडल की मारुति अल्टो 800 कार है। दो फ्रीज और एक डेढ़ टन का एसी है। कोई ज्वेलरी नहीं है। सीवान के बहुआरा गांव में विरासत में मिली एक बीघा कृषि भूमि है। पटना के सुल्तानगंज में 1.75 कह्वा गैरकृषि जमीन है। पटना के कंकड़बाग में चार हजार वर्गफीट का प्लॉट है जो उनकी स्व पत्नी से उन्हें विरासत में मिली है। पटना के बेली रोड में 1425 वर्गफीट का एक फ्लैट है, जिसे वर्ष 1998 में बिहार सरकार से एडवांस लेकर खरीदा गया था। डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी के पास कैश, बॉन्ड्स व पॉलिसी के रूप में 11 करोड़ 30 लाख रुपये हैं। 15.7 तीन लाख की गाड़ी है। पत्नी के नाम डेढ़ किलो सोना, 2 किलो चांदी व 80.5 लाख रुपये का हीरे का सेट है

प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर खबर दी है: फैसला: मोदी की डिग्री दिखाने का आदेश रद्द, केजरीवाल पर जुर्माना। गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री दिखाने संबंधी केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द कर दिया । साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सात साल पहले केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के डिग्री की जानकारी मांगी थी। इस पर सीआईसी ने गुजरात विश्वविद्यालय को मोदी की डिग्री के बारे में केजरीवाल को जानकारी मुहैया कराने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। अरविंद केजरीवाल ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर  ट्वीट किया, क्या देश को ये जानने का भी अधिकार नहीं है कि उनके पीएम कितना पढ़े हैं? कोर्ट में इन्होंने डिग्री दिखाए जाने का जबरदस्त विरोध किया। क्यों? उनकी डिग्री देखने की मांग करने वालों पर जुर्माना लगा दिया जाएगा? वहीं, भाजपा ने कहा, केजरीवाल झूठ फैला रहे हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • ट्रंप ने अय्याशी छिपाने के लिए पोर्न स्टार को पैसे दिए, 4 साल जेल संभव
  • जमीन की रजिस्ट्री शुल्क में आज से नहीं होगी बढ़ोतरी, कैटेगरी बदलने में हुई देरी
  • बिहार पुलिस में 68 हज़ार 360 पदों पर जून से सीधी बहाली, इनमें 35 हज़ार सिपाही के
  • एनएससी और सुकन्या समृद्धि योजना पर मिलेगा अब पहले से ज्यादा ब्याज
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर आज पटना आएंगे
  • हावड़ा में रामनवमी पर पथराव के बाद तनाव फैला

अनछपी: बिहार में रामनवमी ठीक-ठाक से ही गुजर गई थी लेकिन इसके अगले दिन इससे जुड़ी हिंसा ने सासाराम और बिहारशरीफ को अपने घेरे में ले लिया। इसके लिए उपद्रवियों को चाहे जितना दोष दिया जाए लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह दरअसल प्रशासन और पुलिस की विफलता के कारण हुआ। यह बात तो सबको पता है कि जब से भारतीय जनता पार्टी बिहार की सरकार से बाहर हुई है उससे जुड़े तत्व ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं जब उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट करने का बहाना मिले। सासाराम और बिहारशरीफ- दोनों जगह यह बात साफ है कि प्रशासन अगर पहले दिन अलर्ट रहता तो अगले दिन ऐसी हिंसा नहीं होती। रामनवमी के जुलूसों का मस्जिदों और दूसरी संवेदनशील जगहों के पास आकर नारेबाजी करना और भड़काऊ नारे लगाना अब आम बात हो चुकी है। वास्तव में ये जुलूस राजनीतिक हित साधने का एक साधन बना दिए गए हैं। भड़काऊ नारों के अलावा स्वीकृत संख्या से अधिक संख्या में लोगों का जुलूस में शामिल होना और समय के बाद तक जुलूस जारी रहना भी प्रशासन के लिए सर दर्द बना रहता है।

जाहिर है इसमें रामनवमी मनाने वालों का नहीं बल्कि रामनवमी के राजनीतिक इस्तेमाल करने वाले का दोष है। अक्सर जगहों से रामनवमी जुलूस में शामिल लोगों को अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा शररबत पिलाने आदि के खबर भी आ चुकी है। इसी तरह अल्पसंख्यक समुदाय के पर्व त्योहार पर भी हिन्दू समुदाय द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय दिया जाता है। लेकिन इन बातों से हिंसा की बात खत्म नहीं होती।

इन दोनों मामलों में खुफिया तंत्र भी या तो बुरी तरह विफल रहा या उसकी बात पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह ऐसे तत्वों के साथ-साथ प्रशासन में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

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