छ्पी-अनछपी: अमेरिका का जंगी बेड़ा तेहरान की ओर, ‘करप्ट’ अफसरों की लिस्ट जारी होगी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का और आरोप चल रहा है निगरानी विभाग उनकी सूची जारी करेगा। बिहार के 76000 स्कूलों में जल्द ही टैब से हाज़िरी बनेगी।

और जानिएगा कि सायंस मैगज़ीन लैंसेट ने बिहार की हवा को साइलेंट किलर क्यों कहा।

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरान में बीते 28 दिनों से लगातार सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों पर की गयी सख्त कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़ कर कम से कम 5,002 बताई गयी है. इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा ईरान के नजदीक पहुंच रहा है. इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है. ट्रंप ने दावा किया था कि उनके हस्तक्षेप से 800 लोगों की फांसी रुक गयी, लेकिन ईरान के शीर्ष अभियोजक ने इस दावे को पूरी तरह झूठा बताया है. अभियोजक ने साफ कहा कि न ऐसी कोई सूची है और न ही सामूहिक फांसी का कोई आदेश. दुनिया भी अब इस बड़े झूठ से वाकिफ हो गयी है. ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (आइआरजीसी) के कमांडर ने इसराइल और अमेरिका को चेतावनी दी कि वह उनकी ताकत को कम आंकने से बचें. “हम ट्रिगर पर उंगली रखे हुए हैं.” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका का विध्वंसक युद्धपोत यूएसएस अब्राहम तेहरान की ओर आगे बढ़ रहा है.

जिन पर भ्रष्टाचार का मामला, उनकी सूची जारी होगी

जागरण के अनुसार सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के  विरुद्ध शिकंजा कसते हुए अब सरकारी अफसरों-कर्मचारियों प्रोन्नति (प्रमोशन) पर कड़ी निगरानी तय कर दी गई है। निगरानी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है या आरोप पत्र समर्पित हो चुका है, उन्हें प्रमोशन देने से पहले निगरानी स्वच्छता का निर्धारण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इसके लिए साल में दो बार जनवरी और जुलाई में निगरानी विभाग प्रशासी विभागों को ऐसे अफसर-कर्मियों की सूची उपलब्ध कराएगा जिनपर भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई-न-कोई मामला जरूर दर्ज है। दिसंबर 2025 तक जांच एजेंसियों ने जो कांड केस दर्ज किए उसका विवरण भेजा निगरानी विभाग की ओर से इस संबंध में सभी प्रमुख विभागों और जिला कार्यालयों को एक पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि दिसंबर 2025 तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई ने जो भी केस, कांड दर्ज किए हैं या फिर आरोप पत्र समर्पित किया है उनके नाम समेत अन्य विवरण एक सीडी में संबंधित विभागों प्रमंडलों और जिलों को भेजी जा रही है।

76 हजार सरकारी स्कूलों में टैब से बनेगी हाज़िरी

बिहार के 76 हजार सरकारी स्कूलों में अगले माह से शिक्षकों और बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी बनेगी। लगभग पौने दो करोड़ स्कूली बच्चों और करीब छह लाख शिक्षकों की भी हाजिरी टैब से ही बनेगी। इसके अलावा मध्याह्न भोजन की रिपोर्ट भी टैब के जरिए ही ली जाएगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तैयारी पूरी कर इसे अगले माह से शुरू कराने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई होगी। राज्य में 76 हजार 116 सरकारी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें से अभी तक 75640 स्कूलों में 155 417 टैब उपलब्ध करा दिये गए हैं।

तमिलनाडु और तमिलनाडु में मोदी का विवादास्पद भाषण

प्रभात ख़बर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल और तमिलनाडु में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया. केरल के तिरुवनंतपुरम में मोदी ने कांग्रेस को ‘एमएमसी’ (मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस) करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी राज्य में कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा दे रही है और उसके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस माओवादियों से भी अधिक कम्युनिस्ट और मुस्लिम लीग से अधिक सांप्रदायिक हो गयी है. प्रधानमंत्री ने केरल की सत्ताधारी एलडीएफ सरकार को भी आड़े हाथों लिया और शबरिमला मंदिर से सोना चोरी होने के आरोपों की जांच कराने की ‘मोदी की गारंटी’ दी. उन्होंने कहा कि एलडीएफ और यूडीएफ के झंडे अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की सोच एक ही है. तमिलनाडु के मदुरंथकम में राजग की पहली चुनावी रैली में मोदी ने द्रमुक सरकार को ‘सीएमसी’ (करप्शन, माफिया और क्राइम) वाली सरकार बताया.

बिहार की हवा बन चुकी है साइलेंट किलर

भास्कर की ख़ास खबर है कि विश्व की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका ‘द लैंसेट’ ने बिहार के लिए खतरे की सबसे बड़ी घंटी बजाई है। शुक्रवार को जारी एक डरावनी रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बिहार की हवा अब ‘साइलेंट किलर’ बन चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के लोग आज जिस जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं, उसका असली और घातक असर अगले 12 से 24 महीनों में ‘हार्ट अटैक’ और ‘बेन स्ट्रोक’ के रूप में सामने आएगा। लैंसेट के संपादकों और वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में उत्तर भारत, विशेषकर बिहार के भौगोलिक क्षेत्र को ‘पॉल्यूशन ट्रैप’ बताया है। गंगा के मैदानी इलाकों में स्थित पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, गया और पूर्णिया जैसे जिलों में प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) हवा में स्थिर हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बिहार की 100 प्रतिशत आबादी ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर है जो डब्ल्यूएचओ के मानकों से कई गुना ज्यादा जहरीली है। यह प्रदूषण एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम कर रहा है, जो शरीर के अंगों को धीरे-धीरे अंदर से खोखला बना रहा है। द लैंसेट के प्रधान संपादक रिचर्ड हॉर्टन ने रिपोर्ट में बिहार समेत उतर भारत में वायु प्रदूषण के प्रति सार्वजनिक उदासीनता और राजनीतिक जवाबदेही की कमी पर सवाल उठाए हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • बेतिया के पास रेल पटरी पर रेल्स बना रहे दो किशोर ट्रेन से कटे, दोनों की मौत
  • डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कीमत 92 तक पहुंची, बाद में कुछ सुधार के साथ 91.90 पर बंद
  • चौतरफा बिकवाली से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 780 अंक टूटा
  • अमेरिका वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन डब्ल्यूएचओ से अलग हुआ
  • मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला के परिसर में शुक्रवार को सरस्वती पूजा के साथ जुमा की नमाज भी हुई
  • बांग्लादेश से भागी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में ऑडियो संदेश में बोलीं- यूनुस हत्यारा, फासीवादी

अनछपी: भारतीय राजनीति इस समय ऐसे अफसोसनाक मोड़ पर है कि जब सबसे ज्यादा सांप्रदायिक नफरत फैलाने के लिए बदनाम पार्टी के नेता दक्षिण के दो राज्यों में जाकर दूसरी पार्टियों पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हैं। बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है जो तमिलनाडु और केरल में भारतीय जनता पार्टी की नामुमकिन दिख रही सरकार देखने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं। वैसे तो उनका ज्यादा जोर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार को हटाकर भारतीय जनता पार्टी को स्थापित करने पर है लेकिन वह केरल और तमिलनाडु जैसे हिंदुत्व और भाजपा की नीति को नकारने वाले राज्यों में तुकबंदी कर वहां शासन कर रही पार्टियों को बदनाम करने के लिए बयान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुकबंदी बहुत पसंद है और उनकी टीम उनकी इस राजनीतिक लत में मददगार साबित होती है। विपक्ष को सकारात्मक राजनीति का पाठ देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद इस बारे में सोचना चाहिए कि उनके भाषणों में ज्यादातर नकारात्मक बातें क्यों होती हैं। शायद उनका मकसद यह होता है कि बात तो केरल और तमिलनाडु में की जाए लेकिन इसका फायदा दूसरे राज्यों में लिया जाए जहां की जनता को थोड़ा भ्रम हो कि वहां क्या हो रहा है। इसके लिए वह धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल करने से नहीं चूकते और इसमें शायद ही किसी को शक हो कि तमिलनाडु में सबरीमाला मंदिर की चर्चा भी उन्होंने इसी मकसद के साथ की है। बहरहाल अब तमिलनाडु और केरल की सरकार चला रही पार्टियों के ऊपर है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इन दुष्प्रचारों से अपने वोटरों को कैसे आगाह रखते हैं।

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