छ्पी-अनछपी: आर्मी की ज़मीन पर सबसे ज्यादा यूपी में कब्जा, ट्रंप ने स्टील पर लगाया 25% टैरिफ

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारत सरकार ने बताया है कि देश के अंदर आर्मी की 10 हज़ार एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जा है और उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर 25% तक का टैरिफ लगा दिया है। प्रयागराज में महाकुंभ से महाजाम लगने से लोग बिलबिला रहे हैं। बिहार के कम से कम 374 लोग दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में साइबर गुलामी कर रहे हैं।
और जानिएगा कि पटना पुलिस अपने ही 500 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर्स पर क्यों केस करेगी।
भास्कर के अनुसार केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि देशभर में लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि है। भारतीय सेना की इस जमीन से लगभग 10249 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। दरअसल सरकार से देश में अतिक्रमण के अंतर्गत रक्षा भूमि के विवरण के साथ-साथ राज्यवार डेटा मांगा गया था। उन्होंने सेना की जमीन पर राज्यवार अतिक्रमण की जानकारी भी दी है जिसके मुताबिक सेना की जमीन पर सबसे ज्यादा अवैध कब्जा उत्तर प्रदेश में (1759.2 एकड़) है। इसके बाद 1757.9 एकड़ के साथ दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है। फिर महाराष्ट्र में 1010.3 एकड़, पश्चिम बंगाल में 816 एकड़ और हरियाणा में 780 एकड़ रक्षा भूमि पर अतिक्रमण किया गया है।
स्टील पर टैरिफ, भारत को होगा घाटा
प्रभात खबर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी इस्पात व एल्यूमीनियम आयात पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाने की घोषणा की है। इसके बाद मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि इससे भारतीय इस्पात उत्पादकों को अपने उत्पादों के निर्यात में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मूडीज रेटिंग्स के सहायक उपाध्यक्ष हुई तिंग सिम ने कहा कि पिछले 12 महीनों में भारत में इस्पात के अधिक आयात ने पहले ही देश के इस्पात उत्पादकों की कीमतों और कमाई को घटा दिया है। ट्रंप प्रशासन के नए कदम से घरेलू उत्पाद की मांग बढ़ेगी और बिक्री कीमतें बढ़ने से अमेरिका के इस्पात उत्पादकों को फायदा होगा। दूसरी और इस कदम से भारत के उत्पादकों को अरबों रुपए का नुकसान होगा। पिछले साल भारत ने 95000 टन इस्पात अमेरिका को निर्यात किया था।
प्रयागराज के महाजाम से हर तरफ परेशानी
हिन्दुस्तान के अनुसार प्रयागराज में महाजाम के कारण सोमवार शाम पांच बजे से बिहार से उत्तर प्रदेश में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। महाकुम्भ में पूर्णिमा के अवसर पर स्नान के दौरान अपार भीड़ को देखते हुए यह आदेश दिया गया है। प्रतिबंध के कारण चिपली सीमा पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मंगलवार को यह महाजाम में तब्दील हो सकता है। चंदौली जिले के एएसपी विनय कुमार के निर्देश के बाद कैमूर पुलिस ने सासाराम और आरा मार्ग से आने वाले भारी वाहनों को रोक दिया।
टिकट वाले रह गए बाहर, अंदर ट्रेनों पर कब्जा
12 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर कुम्भ स्नान को लेकर सोमवार को पटना जंक्शन पर यात्रियों का रेला उमड़ पड़ा। यात्रियों की भीड़ इतनी हो गई कि प्लेटफॉर्म संख्या चार और पांच पर खड़ा होना भी दूभर हो गया। मेला स्पेशल, मगध एक्सप्रेस और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में हजारों यात्री घुस गए। इस कारण कई यात्री टिकट के बावजूद यात्रा से वंचित रह गए। शाम साढ़े छह बजे पटना प्रयागराज कुम्भ स्पेशल ट्रेन में बैठने के लिए हजारों की संख्या में यात्री प्लेटफॉर्म नंबर चार व पांच पर पहुंच गये। स्पेशल ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही यात्रियों का रेला बोगियों में टूट पड़ा। पांच मिनट में बोगी के गलियारे से लेकर शौचालय तक यात्री ठूंस गए थे। जिसे जहां खड़े होने की जगह मिली, वहीं पर खड़ा हो गया।
दूध, सब्जी, पानी जैसी जरूरी चीजों की कमी
प्रयागराज में कामर्शियल वाहनों की एंट्री बंद है। जनरल स्टोर संचालकों का कहना है कि चीनी, दूध, आटा और सब्जी आदि की कमी है। मेले में सप्लाई रुक गई है। यह सामान्य नहीं होती तो बड़ा संकट होगा। पेट्रोल डीजल की भी किल्लत है।
बिहार के 374 लोग साइबर गुलामी में
भास्कर के अनुसार दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में फंसे बिहार के लोग साइबर गुलामी के शिकार हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग इन बिहारियों से साइबर ठगी करवा रहा है। आर्थिक अपराध इकाई के साइबर सेल की टीम ने बिहार के ऐसे 374 लोगों का पता लगाया है जो लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और थाईलैंड में फंसे हुए हैं। इन देशों में बैठे साइबर ठगों ने इन बिहारियों को गुलाम बना लिया है। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने विदेशों में फंसे बिहारियों का पता लगाने के लिए स्लेवरी डेस्क बनाया है। ईओयू के अधिकारियों ने बताया कि यह 374 लोग नौकरी करने के लिए इन देशों में गए थे। वीजा समाप्त होने के बाद भी यह जब नहीं लौटे तब पता चला कि यह साइबर ठगों के ट्रैप में है।
पटना के 500 आईओ पर पुलिस करेगी केस
पटना के 400 से 500 आईओ यानी इन्वेस्टिगेशन ऑफिसरों पर गांधी मैदान थाने में केस दर्ज होगा क्योंकि इन्होंने तबादले के बाद भी अपने थाने के एसआई या एएसआई को केस हैंड ओवर नहीं किया और चले गए। सोमवार को जब एसएसपी अवकाश कुमार ने जिले के थानेदारों के साथ क्राइम मीटिंग में 5 घंटे समीक्षा की तो यह पता चला। एसएसपी ने बताया कि ऐसे आईओ की सूची बनने के बाद इन पर केस दर्ज होगा। इनकी तादाद 400 से 500 के बीच है। इनकी वजह से केस पेंडिंग हैं।
कुछ और सुर्खियां:
● सोना एक दिन में ₹2400 बढ़कर प्रति 10 ग्राम ₹88000 के पार
● पटना- गुवाहाटी जहाज के इंजन में खराबी, बोर्डिंग के बाद उतारे जाने पर यात्रियों का हंगामा
● मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा, नवादा में भी खुलेगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल
● कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की मांग, जनगणना जल्द कराए केंद्र सरकार
● तीन दिनों के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस पहुंचे, आज आई समेत की सह अध्यक्षता करेंगे
● सिमुलतला आवासीय विद्यालय में शिक्षकों के 62 पदों के लिए 18 फरवरी से 10 मार्च तक आवेदन
अनछपी: इलाहाबाद या प्रयागराज में आयोजित कुंभ या महाकुंभ मेले में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार का सबसे ज्यादा जोर इस बात के प्रचार प्रसार पर रहता है कि इतने करोड़ लोगों ने स्नान किया। मीडिया में भी ज्यादातर इसके महिमामंडन की खबर ही आती है लेकिन 13 जनवरी से शुरू हुए इस मेले के बारे में परेशानियों की बात मीडिया ने कम ही कवर किया। इस बीच मेले में भगदड़ मची और कितने लोगों की जान गई इसका सही-सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल 30 मौतों की पुष्टि की है। यह मेला अभी 26 फरवरी तक चलेगा लेकिन इस दौरान लोगों को होने वाली भारी परेशानियों की चर्चा भी जरूरी है। हालांकि बहुत से लोग श्रद्धा की आड़ में परेशानियों को छिपाना चाहते हैं और वह कहते हैं कि इतने बड़े आयोजन में ऐसी समस्याएं होती हैं। यह दलील सही नहीं लगती और अपनी कमियों को छिपाने का बहाना है। प्रयागराज में रह रहे लोगों को रोजमर्रा की ज़रूरत के सामान की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा वहां पहुंचने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई कई दिनों से जाम लग रहा है और लोग परेशान हो रहे हैं। ट्रेनों का हाल यह है कि जिनके पास टिकट है वह बाहर रह जा रहे हैं और बेटिकट यात्रा करने वाले लोग अंदर से गेट बंद कर दे रहे हैं। शौचालयों में घुसकर लोग सफर कर रहे हैं और ट्रेनों पर पथराव की खबर भी आई है। संक्षेप में कहा जाए तो उत्तर प्रदेश की सरकार व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। इसकी वजह समझने के लिए हमें प्रयागराज की सरकारी वेबसाइट पर दी गई एक जानकारी का इस्तेमाल करना होगा। इसके अनुसार, “महाकुंभ मेला (पवित्र घड़े का त्यौहार) हिंदू पौराणिक कथाओं में निहित है। यह दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक समागम और आस्था का सामूहिक आयोजन है। इस समागम में मुख्य रूप से तपस्वी, संत, साधु, साध्वियाँ, कल्पवासी और सभी क्षेत्रों के तीर्थयात्री शामिल होते हैं।” क्या इससे यह पता नहीं चलता कि इस महाकुंभ में मुख्य रूप से किन लोगों को शामिल होना चाहिए? वैसे तो उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार हिंदू धर्म के प्रवक्ता के रूप में काम कर रही है लेकिन उसने यह बताने की चिंता नहीं की कि वहां मुख्यतः किन लोगों को आना चाहिए। इसके उलट दोनों सरकारों का सहारा जोर इस बात पर रहा कि ज्यादा से ज्यादा स्नान का आंकड़ा पेश किया जाए। सरकारों को ज्यादा से ज्यादा आंकड़ा तो मिल गया लेकिन आम लोगों को इसके बदले उतने ही बड़े पैमाने पर परेशानी भी मिली।

 

 

 

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