छपी-अनछपीः एएसपी का दावा- फुलवारी में चल रहा था देश विरोधी अड्डा, हामिद अंसारी पर संघी हमला

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। पटना के हिन्दी अखबारों में आज एक बेहद सनसनीखेज खबर लीड बनी है जिसमें दावा किया गया है कि फुलवारी शरीफ में देश विरोधी अड्डा चल रहा था। फुलवारी के एएसपी मनीष कुमार के मुताबिक इसके बारे में इनपुट आईबी, दिल्ली से मिला था और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन से एक दिन पहले 11 जुलाई को पकड़ा गया था। लेकिन इसकी जानकारी पुलिस ने 13 जुलाई को प्रेस को दी।
इस खबर में बताया गया है कि पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया और एसडीपीआई जैसे राजनैतिक दलों की आड़ में देश विरोधी गतिविधि करने, एक विशेष समुदाय को टारगेट करने, 2047 में मुस्लिम राष्ट् बनाने के आरोप में झारखंड के रिटायर्ड दारोगा जलालउद्दीन और सिमी के पूर्व सदस्य अतहर परवेज को गिरफ्तार किया गया है।
हिन्दुस्तान की हेडिंग हैः फुलवारी शरीफ में देश विरोधी गतिविधि के अड्डे का खुलासा। प्रभात खबर की सुर्खी हैः फुलवारी में चल रही थी आतंक की पाठशाला, सिमी का पूर्व सदस्य व रिटायर्ड दारोगा धराया।
भास्कर ने लिखा हैः 4 राज्यों के युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग दे रहा था रिटायर दारोगा, पीएम के दौरे से पहले गिरफ्तार।
जागरणः भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के मिशन का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार।
पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी को संघ तंत्र के हमले का श्किार होना पड़ा है। इसकी खबर हिन्दी अखबारों में भाजपा की घेराबंदी से शुरू होती है जिसमें उसने भारत में जाूससी करने आये एक पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा से मिलने का आरोप लगाया है। श्री अंसारी ने इस पूरे मामले का झूठ का पुलिंदा बताया है। टाइम्स आॅफ इंडिया में यह खबर पहले पेज पर है।
गोपालगंज में शराबकांड में 20 लोगों की मौत के मामले में नौ लागों की फांसी की सजा को हाईकोर्ट द्वारा रद्द करने की खबर सभी अखबारों में पहले पेज पर छपी है। 15-16 अगस्त 2016 को गोपालगंज के खजूरबन्नी में यह कांड हुआ था। निचली अदालत ने इस मामले में 9 लोगों को फांसी की सजा सुनायी थी।
श्रीलंका में राष्ट्रपति के मालदीप भागने से आक्रोश भड़कने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। टाइम्स आॅफ इंडिया में यही खबर लीड है जिसमें यह जानकारी दी गयी है कि प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने वहां इमर्जेंसी लागू कर दी है।
अनछपीः हिन्दी अखबारों में फुलवारी शरीफ में देश विरोधी गतिविधि चलाये जाने का जितना बड़ा समाचार छपा है, वह कई मामलों में अजीब है। सबसे पहली बात, इतने बड़े मामले में जानकारी एएसपी की प्रेस काॅन्फ्रेंस द्वारा दिया जाना पुलिस की आम चलन से हटकर है। एएसपी मनीष कुमार ने 11 जुलाई की गिरफ्तारी की खबर को 13 जुलाई को मीडिया को बताया, यह भी ताज्जुब की बात है। मीडिया द्वारा कोई सवाल नहीं पूछा जाना तो खैर कोई ताज्जुब की बात नहीं क्योंकि वह तो पुलिस के बयान को हू ब हू छापने के लिए ही जाना जाता है और खासकर तब जबकि आरोपित मुसलमान हो और उनपर देश विरोधी कार्रवाई का आरोप लगा हो। इस खबर में दावा किया गया है कि मार्शल आर्ट की आड़ में वहां देश विरोधी हथियार चलाने और उन्माद पैदा करने की रणनीति बतायी जाती थी। मगर यह नहीं बताया गया कि हथियार चलाने की बात साबित करने के लिए पुलिस ने कोई हथियार जब्त कर उसे दिखाया, या कम से कम उसका नाम बताया। यह जरूर है कि 83 लाख रुपये जब्त करने की बात जांच का विषय हो सकता है लेकिन पीएफआई और एसडीपीआई का दफ्तर चलाने से ही उनकी गतिविधि देश विरोधी हो जाती है, यह कहां से तार्किक है। यह आरोप है कि अतहर परवेज आतंकी मामलों में मुकदमा झेलने वालों का बेलर रहा है। तो पुलिस के अनुसार बेलर होना भी आतंकी गतिविधि का हिस्सा है।
एक बात और है कि इस मामले को प्रधानमंत्री के आगमन से जोड़कर एएसपी ने अपने आरोप को मजबूत करने की कोशिश की है लेकिन यह तो बिहार के डीजीपी को बताना चाहिए कि ये आरोप कितने सच हैं।

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